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Aligarh News: एक किमी पथरीले रास्ते से पैदल अस्पताल जाती हैं गर्भवती महिलाएं
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रेलवे लाइन पार कर सूरजपुर के उप स्वास्थ्य केंद्र जाता युवक। संवाद
- फोटो : samvad
सीएचसी जवां के स्वास्थ्य उपकेंद्र सूरजपुर में भीषण गर्मी में दो घंटे ही बिजली मिल पा रही है। बदहाल और कच्चे रास्ते पर गर्भवती महिलाओं को भी पैदल आना पड़ता है। प्रसव व एक्सरे के लिए 20 किमी दूर सीएचसी जाना पड़ता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र के बीच रास्ते में रेलवे लाइन होने के कारण वाहनों से आने वाले मरीजों को एक किलोमीटर पहले ही अपने वाहनों को खड़ाकर पहुंचना पड़ता है।
स्वास्थ्य उपकेंद्र सूरजपुर से करीब 12 गांवों के मरीज अपना इलाज कराने आते हैं, यहां लगभग 20 से 25 की ओपीडी हो पाती है। स्वास्थ्य मेला लगने पर रविवार को ओपीडी लगभग 90 तक पहुंच जाती है, यहां तक आने का करीब एक किलोमीटर का रास्ता कच्चा और पथरीला है और थोड़ी भी बारिश हो जाए तो निकलना दूभर होता है खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए कष्टदायी हो जाता है।
बीच रास्ते में रेलवे ट्रैक होने के कारण चार पहिया व दो पहिया वाहन से आने वाले मरीजों को लगभग एक किलोमीटर पहले ही वाहन खड़ा करके आना पड़ता है। यहां गर्भवती महिलाओं की जांच तो हो जाती हैं, लेकिन रास्ता न होने के कारण गर्भवती प्रसव कराने नहीं पहुंच पाती और उन्हें 20 किलोमीटर दूर जवां सीएचसी पर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रभारी डॉक्टर सवा शाहीन का कहना है कि यहां पर सरकार से रखरखाव के लिए लगभग दो साल से कोई फंड नहीं आया है। बिजली कनेक्शन तो है, लेकिन भीषण गर्मी में दो-तीन घंटे ही बिजली आती है। विभाग द्वारा सोलर प्लांट का भी प्रबंध किया गया है। उपकेंद्र में अंदर तो सफाई रहती है लेकिन बाहर गंदगी व्याप्त है। प्रभारी डाक्टर ने बताया कि हम सफाई कराते रहते हैं, लेकिन फिर भी झाड़ियां हो जाती हैं, इनको भी जल्द ही साफ करा दिया जाएगा।
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स्वास्थ्य उपकेंद्र सूरजपुर से करीब 12 गांवों के मरीज अपना इलाज कराने आते हैं, यहां लगभग 20 से 25 की ओपीडी हो पाती है। स्वास्थ्य मेला लगने पर रविवार को ओपीडी लगभग 90 तक पहुंच जाती है, यहां तक आने का करीब एक किलोमीटर का रास्ता कच्चा और पथरीला है और थोड़ी भी बारिश हो जाए तो निकलना दूभर होता है खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए कष्टदायी हो जाता है।
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बीच रास्ते में रेलवे ट्रैक होने के कारण चार पहिया व दो पहिया वाहन से आने वाले मरीजों को लगभग एक किलोमीटर पहले ही वाहन खड़ा करके आना पड़ता है। यहां गर्भवती महिलाओं की जांच तो हो जाती हैं, लेकिन रास्ता न होने के कारण गर्भवती प्रसव कराने नहीं पहुंच पाती और उन्हें 20 किलोमीटर दूर जवां सीएचसी पर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रभारी डॉक्टर सवा शाहीन का कहना है कि यहां पर सरकार से रखरखाव के लिए लगभग दो साल से कोई फंड नहीं आया है। बिजली कनेक्शन तो है, लेकिन भीषण गर्मी में दो-तीन घंटे ही बिजली आती है। विभाग द्वारा सोलर प्लांट का भी प्रबंध किया गया है। उपकेंद्र में अंदर तो सफाई रहती है लेकिन बाहर गंदगी व्याप्त है। प्रभारी डाक्टर ने बताया कि हम सफाई कराते रहते हैं, लेकिन फिर भी झाड़ियां हो जाती हैं, इनको भी जल्द ही साफ करा दिया जाएगा।
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