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Aligarh News: गंगा तट की 47.74 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण का विरोध, जमीन वापस नहीं मिलने पर पलायन का एलान
Tue, 23 Jul 2024 05:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2024 05:37 AM IST
सार
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1970 में बाढ़ आने पर गांव की 41.74 हेक्टेयर जमीन गंगा में समा गई। जब पानी कम हुआ तो लोग पुन: अपने खेतों को जोतने लगे। यह सिलसिला वर्ष 2019 तक चला। 2019 में राजस्व टीम ने इसे गंगा की ही भूमि बताया। विभाग ने कहा कि 40 वर्ष से यह भूमि गंगा के खाते में दर्ज है।
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गांव हारनपुर में ग्रामीणों से वार्ता करते एसडीएम अनिल कटियार
- फोटो : संवाद
विस्तार
दादों क्षेत्र के गांव हारनपुर कला में गंगा तट से लगी हुई 47.74 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद पैदा हो गया है। राजस्व विभाग इसको गंगा की भूमि बता कर सरकारी अभिलेखों का हवाला दे रहा है। वहीं, ग्रामीण इसको अपनी बता कर वहां कराए जा रहे पौधरोपण का विरोध कर रहे हैं।
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जमीन वापस नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने पलायन करने का एलान कर दिया है। विरोध के बाद रविवार को मौके पर पहुंचे एसडीएम ने ग्रामीणों को पूरा मामला समझाया। ग्रामीणों ने अफसरों से भूमि के पुराने रिकार्ड उपलब्ध कराने के लिए आठ दिन का समय मांगा है। जिसमें वह अपने मालिकाना हक के पुराने कागजात प्रस्तुत करेंगे।
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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1970 में बाढ़ आने पर गांव की 41.74 हेक्टेयर जमीन गंगा में समा गई। जब पानी कम हुआ तो लोग पुन: अपने खेतों को जोतने लगे। यह सिलसिला वर्ष 2019 तक चला। 2019 में राजस्व टीम ने इसे गंगा की ही भूमि बताया। विभाग ने कहा कि 40 वर्ष से यह भूमि गंगा के खाते में दर्ज है।
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इस वर्ष जब यहां वन विभाग ने पौधरोपण शुरू किया तो ग्रामीण विरोध करने लगे। एसडीएम अतरौली अनिल कटियार, वन विभाग के अधिकारी, नायाब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि यह भूमि अभिलेखों में गंगा के नाम दर्ज है। अगर किसानों के पास मालिकाना हक के कागज हैं तो वह प्रस्तुत करें। इस पर किसानों ने आठ दिन का समय मांगा है। जिसमें वह पुराना रिकार्ड निकलवाएंगे।
वन रेंजर महफूज अली ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा 41.74 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को पौधरोपण के लिए दी गई थी। जिस पर पौधे लगाए जा रहे हैं। गांव हारनपुर के कुछ ग्रामीण इसको अपनी पैतृक जमीन बता रहे हैं। इस संबंध में एसडीएम अनिल कटियार ने बताया ग्रामीणों ने भूमि पर अपना नाम दर्ज कराने के लिए आठ दिन का समय मांगा है। 40 वर्ष से यह जमीन गंगा में दर्ज है। कुछ जमीन को छोड़कर शेष पर पौधरोपण हो रहा है।