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40 में से केवल 19 गांव शामिल करने पर राजनीित गर्म
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:52 AM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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चालीस गांवों की जगह केवल 19 गांवों को नगर निगम सीमा विस्तार में शामिल करने का प्रकरण गरमा गया है। इस पर सपा, बसपा और कांग्रेस ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया है। पटवारी नगला, रजा नगर, नींवरी, चिलकौरा, किला रोड को शहरी सीमा विस्तार में शामिल नहीं करने के विरोध में सपाइयों ने महानगर अध्यक्ष अज्जू इसहाक के कैंप कार्यालय में बैठक की।
अज्जू इसहाक ने कहा कि सपा शासन में 40 गांवों को सीमा विस्तार में शामिल करने का प्रस्ताव विधानसभा में आया था, लेकिन भाजपा ने विरोध किया और प्रस्ताव पास नहीं होने दिया। अब भाजपा सरकार में ये प्रस्ताव पास हुआ तो मुस्लिम आबादी वाले गांवों को छोड़ दिया गया। 40 में से केवल 19 गांवों को ही शामिल किया है। बैठक में मांग हुई कि या तो नगर निगम के चुनाव पुराने परिसीमन से कराए जाएं या फिर 40 गांवों को शामिल करने के बाद चुनाव हों। विधानसभा चुनाव 2022 में भी चुनाव बढ़े हुए सीमा के विस्तार में 40 गांवों के साथ कराए जाएं।
अज्जू ने कहा कि सीमा विस्तार को राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए। बैठक में जिला उपाध्यक्ष शान मियां, प्रभात कुमार सविता, बादशाह खान, विकास राघव, संजय प्रजापति, दिनेश यादव, तरुण चौहान, अफजाल अहमद, हस्मत, नईम खान, बशीर अलवी, शाहिद मलिक आदि मौजूद रहे।
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इधर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. विजेंद्र सिंह ने कहा है कि निवर्तमान महापौर शकुंतला भारती ने सीमा विस्तार के प्रस्ताव में नगला पटवारी, तालसपुर, नींवरी, नादा, सराय कुतुब, अमरपुर, किले का नगला, ऊदला, कमालपुर, सिंधौली आदि गांवों को जान बूझकर शासन को नहीं भेजा। जिससे 40 हजार गरीब व मुसलमान वोटर विकास से वंचित हो गया है। ताजा सीमा विस्तार से हिंदू मुस्लिम भेदभाव की बू आती है।
ऐसा प्रतीत होता है कि साजिश के तहत भाजपा नेताओं ने मुस्लिम बस्तियों को सीमा विस्तार से वंचित किया है। जिला प्रशासन ने न्याय हित में इसमें सुधार नहीं कराया तो कांग्रेस इन बस्तियों की जनता के साथ विकास के लिए आंदोलन करेगी। कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन दिया है।
ज्ञापन देते समय प्रदेश के महामंत्री अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष सिंह जादौन एडवोकेट, एनएसयूआई के वरिष्ठ नेता रजत शर्मा, यूथ कांग्रेस के नेता कुंवर गोरांगदेव चौहान, रूपेंद्र चौधरी, लोकेश चौधरी, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
ऐसा सीमा विस्तार राजनीतिक साजिश
जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हाजी अरशान खान ने कहा है कि जब 40 गांवों को सीमा विस्तार में शामिल करने की बात तय थी, तो केवल 19 गांवों को ही क्यों शामिल किया गया। ये राजनीतिक साजिश नहीं तो और क्या है..? पहले पूरे 40 गांव नगर निगम सीमा में शामिल किए जाएं, इसके बाद ही चुनाव होना चाहिए।
रजा नगर, नगला पटवारी, एएमयू किला, नींवरी सहित तमाम गांव सीमा विस्तार में जानबूझकर छोड़ दिए गए हैं। नोटिफिकेशन में वे गांव भी छोड़ दिए, जो शहरी क्षेत्र में शामिल हैं। ये हजारों ग्रामीणों के साथ धोखा है। हम जिलाधिकारी से मिल कर पुन: प्रस्ताव भेजने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे।
- अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष
सीमा विस्तार का प्रस्ताव बसपा सरकार में सामने आया था। 40 गांव निगम सीमा में शामिल करने की बात हुई थी। योगी सरकार ने दर्जनों गांवों के साथ धोखा किया है। भाजपा सरकार हिंदू, मुसलमान के नाम पर बांटने की राजनीति कर रही है। सभी छोड़े गए गांव सीमा विस्तार में शामिल हों, प्रशासन और शासन से पत्राचार किया जाएगा।
- अशोक सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
लंबे अरसे से नादा, उदला, नींवरी, नगला पटवारी, किला, तालिमनगर, अमरपुर, रजानगर सहित दर्जनों गांव शहर का हिस्सा हैं। भाजपा सरकार ने प्रस्ताव ऐसा बनाया है जिसमें मुसलमान, दलित और सातों जात के गांवों को छोड़ दिया गया है, ताकि मेयर पद पर चुनाव हो तो भाजपा जीत जाए। अदालत तक का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
- चौ. विजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष
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अज्जू इसहाक ने कहा कि सपा शासन में 40 गांवों को सीमा विस्तार में शामिल करने का प्रस्ताव विधानसभा में आया था, लेकिन भाजपा ने विरोध किया और प्रस्ताव पास नहीं होने दिया। अब भाजपा सरकार में ये प्रस्ताव पास हुआ तो मुस्लिम आबादी वाले गांवों को छोड़ दिया गया। 40 में से केवल 19 गांवों को ही शामिल किया है। बैठक में मांग हुई कि या तो नगर निगम के चुनाव पुराने परिसीमन से कराए जाएं या फिर 40 गांवों को शामिल करने के बाद चुनाव हों। विधानसभा चुनाव 2022 में भी चुनाव बढ़े हुए सीमा के विस्तार में 40 गांवों के साथ कराए जाएं।
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अज्जू ने कहा कि सीमा विस्तार को राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए। बैठक में जिला उपाध्यक्ष शान मियां, प्रभात कुमार सविता, बादशाह खान, विकास राघव, संजय प्रजापति, दिनेश यादव, तरुण चौहान, अफजाल अहमद, हस्मत, नईम खान, बशीर अलवी, शाहिद मलिक आदि मौजूद रहे।
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इधर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. विजेंद्र सिंह ने कहा है कि निवर्तमान महापौर शकुंतला भारती ने सीमा विस्तार के प्रस्ताव में नगला पटवारी, तालसपुर, नींवरी, नादा, सराय कुतुब, अमरपुर, किले का नगला, ऊदला, कमालपुर, सिंधौली आदि गांवों को जान बूझकर शासन को नहीं भेजा। जिससे 40 हजार गरीब व मुसलमान वोटर विकास से वंचित हो गया है। ताजा सीमा विस्तार से हिंदू मुस्लिम भेदभाव की बू आती है।
ऐसा प्रतीत होता है कि साजिश के तहत भाजपा नेताओं ने मुस्लिम बस्तियों को सीमा विस्तार से वंचित किया है। जिला प्रशासन ने न्याय हित में इसमें सुधार नहीं कराया तो कांग्रेस इन बस्तियों की जनता के साथ विकास के लिए आंदोलन करेगी। कांग्रेसियों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन दिया है।
ज्ञापन देते समय प्रदेश के महामंत्री अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष सिंह जादौन एडवोकेट, एनएसयूआई के वरिष्ठ नेता रजत शर्मा, यूथ कांग्रेस के नेता कुंवर गोरांगदेव चौहान, रूपेंद्र चौधरी, लोकेश चौधरी, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
ऐसा सीमा विस्तार राजनीतिक साजिश
जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हाजी अरशान खान ने कहा है कि जब 40 गांवों को सीमा विस्तार में शामिल करने की बात तय थी, तो केवल 19 गांवों को ही क्यों शामिल किया गया। ये राजनीतिक साजिश नहीं तो और क्या है..? पहले पूरे 40 गांव नगर निगम सीमा में शामिल किए जाएं, इसके बाद ही चुनाव होना चाहिए।
रजा नगर, नगला पटवारी, एएमयू किला, नींवरी सहित तमाम गांव सीमा विस्तार में जानबूझकर छोड़ दिए गए हैं। नोटिफिकेशन में वे गांव भी छोड़ दिए, जो शहरी क्षेत्र में शामिल हैं। ये हजारों ग्रामीणों के साथ धोखा है। हम जिलाधिकारी से मिल कर पुन: प्रस्ताव भेजने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे।
- अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष
सीमा विस्तार का प्रस्ताव बसपा सरकार में सामने आया था। 40 गांव निगम सीमा में शामिल करने की बात हुई थी। योगी सरकार ने दर्जनों गांवों के साथ धोखा किया है। भाजपा सरकार हिंदू, मुसलमान के नाम पर बांटने की राजनीति कर रही है। सभी छोड़े गए गांव सीमा विस्तार में शामिल हों, प्रशासन और शासन से पत्राचार किया जाएगा।
- अशोक सिंह, बसपा जिलाध्यक्ष
लंबे अरसे से नादा, उदला, नींवरी, नगला पटवारी, किला, तालिमनगर, अमरपुर, रजानगर सहित दर्जनों गांव शहर का हिस्सा हैं। भाजपा सरकार ने प्रस्ताव ऐसा बनाया है जिसमें मुसलमान, दलित और सातों जात के गांवों को छोड़ दिया गया है, ताकि मेयर पद पर चुनाव हो तो भाजपा जीत जाए। अदालत तक का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
- चौ. विजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष