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अब एएमयू भेज सकता है नगर निगम को बकाए का नोटिस
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14 करोड़ रुपये के हाउस टैक्स बकाए के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अपने नौ करोड़ रुपये बकाए के संबंध में नगर निगम को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। विधिक जानकारों से सलाह ली जा रही है।
नगर निगम के दो नलकूप विश्वविद्यालय परिसर में लगे हैं। इनसे आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति होती है। इन नलकूपों की भूमि का किराया और इनके संचालन में खर्च होने वाली बिजली के मद में पिछले 26 वर्षों का नौ करोड़ रुपया बकाया है। पिछले दिनों 14 करोड़ रुपये हाउस टैक्स चुकाने के लिए नगर निगम ने एएमयू को नोटिस भेजा था, बाद में स्टेट बैंक आफ इंडिया में संचालित एएमयू का खाता भी सीज कर दिया था। इस संबंध में 31 जनवरी तक हाईकोर्ट ने खाता सीज करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि नगर निगम ने कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों पर भी टैक्स लगा दिया है, जो कर मुक्त हैं। इस टैक्स का ब्याज 8 करोड़ रुपये है। साथ ही विश्वविद्यालय का नौ करोड़ रुपये भी नगर निगम पर बकाया है, उसका भी हिसाब होना चाहिए। विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई कहते हैं कि खाता सीज करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले को कोर्ट आफ स्माल काजेज ( स्थानीय अदालत की छोटे मामलों की सुनवाई की बेंच) में 15 दिनों में निस्तारित करने के लिए भी कहा है क्योंकि यह प्रकरण यहां पर भी विचाराधीन चल रहा है।
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नगर निगम के दो नलकूप विश्वविद्यालय परिसर में लगे हैं। इनसे आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति होती है। इन नलकूपों की भूमि का किराया और इनके संचालन में खर्च होने वाली बिजली के मद में पिछले 26 वर्षों का नौ करोड़ रुपया बकाया है। पिछले दिनों 14 करोड़ रुपये हाउस टैक्स चुकाने के लिए नगर निगम ने एएमयू को नोटिस भेजा था, बाद में स्टेट बैंक आफ इंडिया में संचालित एएमयू का खाता भी सीज कर दिया था। इस संबंध में 31 जनवरी तक हाईकोर्ट ने खाता सीज करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
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विश्वविद्यालय का कहना है कि नगर निगम ने कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों पर भी टैक्स लगा दिया है, जो कर मुक्त हैं। इस टैक्स का ब्याज 8 करोड़ रुपये है। साथ ही विश्वविद्यालय का नौ करोड़ रुपये भी नगर निगम पर बकाया है, उसका भी हिसाब होना चाहिए। विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई कहते हैं कि खाता सीज करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले को कोर्ट आफ स्माल काजेज ( स्थानीय अदालत की छोटे मामलों की सुनवाई की बेंच) में 15 दिनों में निस्तारित करने के लिए भी कहा है क्योंकि यह प्रकरण यहां पर भी विचाराधीन चल रहा है।
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