फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Multi-storey buildings were also erected on the city's waqf properties

शहर की वक्फ संपत्तियों पर भी खड़े हो गए बहुमंजिला भवन

Fri, 23 Sep 2022 12:30 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2022 12:30 AM IST
सार

मगर पिछले दिनों केंद्र सरकार के निर्देश पर एएमयू की टीम द्वारा देश भर में किए गए सर्वे में अलीगढ़ के बेगपुर व शाहजमाल इलाके की कुछ संपत्तियों का यह जिक्र आया था। शाहजमाल के मौजूदा मुतवल्ली भी खुद की जान को खतरा बताकर कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं।सबसे ज्यादा कब्जे शाहजमाल वक्फ संपत्ति परवक्फ नंबर 63 पर दर्ज दरगाह हजरत शम्सुल आरफीन शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्ति बंदरबांट के कारण सिकुड़ती जा रही है। गृहकर की रसीदें मकान स्वामी के नाम से कटी तो बिजली कनेक्शन तथा अन्य तरह के पहचान पत्र तथा मतदाता पहचान पत्र तक बन गए।ये हुई अब तक कार्रवाई वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद तारिक की ओर से एक सर्वे कराया गया था, जिसमें यहां करीब 45 हजार परिवारों के वक्फ संपत्ति पर बसे होने का ब्योरा संकलित किया गया था।

विज्ञापन
Multi-storey buildings were also erected on the city's waqf properties

विस्तार

प्रदेश सरकार के वक्फ संपत्तियों के आदेश के बाद अपने जिले की वक्फ संपत्तियों पर गौर करें तो यहां की वक्फ संपत्तियों पर बहुमंजिला इमारतें बनकर खड़ी हो गई हैं। अब संपत्तियों पर भू उपयोग का बदलाव कब और कैसे हुआ? यह तो जांच का विषय है। मगर पिछले दिनों केंद्र सरकार के निर्देश पर एएमयू की टीम द्वारा देश भर में किए गए सर्वे में अलीगढ़ के बेगपुर व शाहजमाल इलाके की कुछ संपत्तियों का यह जिक्र आया था। बात अगर जिले की वक्फ संपत्तियों की करें तो यहां शाहजमाल में भूमाफिया की एंट्री ने गैंगवार तक का रूप लिया और हत्याएं तक हुईं। देहली गेट में शहर के हिस्ट्रीशीटर नौशे-चंदा की हत्या इसी रंजिश का परिणाम मानी गई और दोषियों को फांसी व साजिशकर्ता को उम्रकैद तक हुई। शाहजमाल के मौजूदा मुतवल्ली भी खुद की जान को खतरा बताकर कई बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं।
विज्ञापन

सबसे ज्यादा कब्जे शाहजमाल वक्फ संपत्ति पर
वक्फ नंबर 63 पर दर्ज दरगाह हजरत शम्सुल आरफीन शाहजमाल कब्रिस्तान की संपत्ति बंदरबांट के कारण सिकुड़ती जा रही है। इस संपत्ति के बंदरबांट पर पुष्टि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और तहसीलदार कोल ने की है। इस संपत्ति पर कब्जे की बात कहते हुए निर्णय लेने की संस्तुति वक्फ बोर्ड से की गई है। 1987 के गजट में वक्फ नंबर 63 पर 250 कच्चा बीघा शाहजमाल कब्रिस्तान दर्ज है। उससे पहले भी यह कब्रिस्तान वक्फ संपत्ति रहा है। इस पर कब्जे की शुरुआत 1971-72 के आसपास हुई। जब उन दिनों के मुतवल्ली ने इस जमीन पर एक रुपये प्रति गज के हिसाब से वहां रहने के लिए कमजोर और गरीब लोगों को छोटे-छोटे प्लाट 99 साल के पट्टे दिए। शुरुआत में लोग झोपड़ियों में रहे। बाद में इन जगहों पर बिल्डिंग खड़ी हो गईं। उसी पट्टे के आधार पर लोग नगर निगम को गृहकर भी देने लगे। गृहकर की रसीदें मकान स्वामी के नाम से कटी तो बिजली कनेक्शन तथा अन्य तरह के पहचान पत्र तथा मतदाता पहचान पत्र तक बन गए।
विज्ञापन

ये हुई अब तक कार्रवाई
वर्ष 2008 में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद तारिक की ओर से एक सर्वे कराया गया था, जिसमें यहां करीब 45 हजार परिवारों के वक्फ संपत्ति पर बसे होने का ब्योरा संकलित किया गया था। साथ ही, एक प्रस्ताव वक्फ बोर्ड को भेजा गया, जिसमें सिफारिश की गई कि इन्हें हटाना संभव नहीं है। अगर नियमित किया जाता है तो किराया आदि वसूल कर राजस्व प्राप्त किया जा सकता है। इसी तरह का दूसरा प्रस्ताव 2020 में भेजा गया, जिसमें एक शिकायत पर तहसील प्रशासन से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रिपोर्ट तलब की। उस रिपोर्ट में इस संपत्ति पर अवैध कब्जे माने गए और इन्हें हटाने के बारे में वक्फ बोर्ड की संस्तुति मांगी गई, मगर दोनों प्रस्ताव लटके हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन संपत्तियों पर भी हुए निर्माण
दानपुर कंपाउंड, बेगपुर, दोदपुर, बरगद हाउस, धौर्रा माफी, जमालपुर माफी, देहली गेट में कई वक्फ संपत्तियां ऐसी हैं, जहां पिछले कुछ दशकों में निर्माण हुए हैं। पुराने जानकार बताते हैं इन संपत्तियों को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। शिकायतें वक्फ बोर्ड से हुई हैं। पिछले दिनों एक महिला मुतवल्ली ने तो खुद को खतरा बताते हुए शिकायत दी थी।
- हम पहले दिन से वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं। शाहजमाल संपत्ति पर 70 फीसदी कब्जा है। जमालपुर माफी की प्रापर्टी पर किरायेदार हैं, जबकि धौर्रा की प्रापर्टी कब्जे में है। मुझे खुद जान को खतरा है। लगातार अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठाता रहता हूं। यहां विद्यालय व अस्पताल बनें, इससे बेहतर और क्या बात होगी। शहर में और भी संपत्तियां ऐसी हैं, जिन्हें कब्जा मुक्त कराया जाए और जनता के काम में लगाया जाए।-मुईन उर्फ मून मुतवल्ली शाहजमाल

ये हैं आंकड़े--
जिले में कुल 4251 वक्फ संपत्ति में शिया की 113 व सुन्नी की 4138
कोल तहसील में 79 शिया और 2746 सुन्नी, कुल 2825 संपत्तियां
गभाना तहसील में 1 शिया और 32 सुन्नी, कुल 33 संपत्तियां
अतरौली तहसील में 32 शिया और 939 सुन्नी, कुल 971 संपत्तियां
इगलास तहसील में 0 शिया और 153 सुन्नी, कुल 153 संपत्तियां
खैर तहसील में 1 शिया और 268 सुन्नी, कुल 269 संपत्तियां
अकेले शाहजमाल में 45 हजार मकान वक्फ संपत्ति पर बने
कुल 30 से ज्यादा मुकदमे वक्फ ट्रिब्युनल लखनऊ में लंबित
- शासन के निर्देश प्राप्त हो गए हैं। इसमें राजस्व टीमों की मदद लेकर वक्फ संपत्तियों की मौजूदा तस्वीर, अवैध कब्जे आदि का सर्वे शुरू कराया जा रहा है। अब तक जगजाहिर है कि शाहजमाल सहित शहर की कुछ वक्फ संपत्तियों पर कब्जे हैं, जिनकी शिकायतें भी बोर्ड में लंबित हैं। शाहजामल को लेकर पूर्व में कब्जे हटाने के संबंध में अनुरोध किया गया था।- स्मिता सिंह, प्रभारी अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी/जिला प्रोवेशन अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed