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Muharram: गम व मातम के बीच निकला ताजिये-अलम का जुलूस, कर्बला में 125 ताजिये हुए सुपुर्द-ए-खाक

Mon, 07 Jul 2025 01:03 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 07 Jul 2025 01:03 AM IST
सार

अलीगढ़ में मुहर्रम का जुलूस निकला। सुबह 10 बजे मजलिस हुई। मौलाना गरबी ने करबला के वाकये का जिक्र किया। फिर अजादारों ने मातम किया। महिलाएं भी मातम करने वालों में शामिल रहीं।

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Muharram julus in Aligarh
एएमयू बैतुल सलात इमामबाड़े से मुहर्रम के जुलूस में मातम करते अजादार - फोटो : संवाद

विस्तार

इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन... 6 जुलूस को 10वीं मुहर्रम के जुलूस में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। गम व मातम के बीच निकले जुलूस में हमारे हैं हुसैन की सदा गूंज उठी। कर्बला में 125 ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए। कमा (चाकू) के मातम से कई अजादार जख्मी भी हो गए।

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परंपरागत तरीके से एएमयू के बैतुल सलात से अलम व ताजिया जुलूस निकला। सुबह 10 बजे मजलिस हुई। मौलाना गरबी ने करबला के वाकये का जिक्र किया। फिर अजादारों ने मातम किया। महिलाएं भी मातम करने वालों में शामिल रहीं। जुलूस आफताब हॉल से होते शमशाद मार्केट पर पहुंचा, जहां नोहा ख्वानी फिर मजलिस हुई। अजादारों ने जंजीरी मातम किया। इसमें वह खून से लथपथ हो गए। यहां भी मौलाना ने तकरीर की। 
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 जुलूस नुमाइश मैदान, तहसील तिराहा, गूलर रोड होकर देहली गेट पहुंचा। जहां ऊपरकोट, फूल चौराहा, बाबरी मंडी से आने वाला जुलूस भी पहुंच गया। सभी जगह के ताजिये एकत्रित होने के बाद देहली गेट से जुलूस शाहजमाल स्थित कर्बला पहुंचा। यहां मौलाना समर ने तकरीर की। कर्बला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने जिला प्रशासन व नगर निगम की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। इस अवसर पर पूर्व मेयर मो. फुरकान, सपा नेता अज्जू इशहाक, पूर्व विधायक विवेक बसंल, एएमयू ओल्ड बॉयज सचिव आजम मीर, हाजी चांद, हाजी राशिद, मुस्तकीम, अहमद जैदी, नादिर नकवी, गुलजार अहमद आदि मौजूद रहे। 

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मजलूमों के मददगार थे इमाम

शमशाद मार्केट पर लखनऊ से आए मौलाना गरबी ने कहा कि इमाम हुसैन जालिम के मुकाबले में थे और मजलूमों के मददगार थे। इमाम हुसैन जंग के पक्षधर नहीं थे। उन्हें जंग के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि यजीद चाहता था कि वह दासता स्वीकार करें या जंग लड़ें। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज भी जुल्म हो रहे हैं। 
करबला में 10 मुहर्रम पर दफन ताजिये
मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोगों ने जोहर की नमाज नुमाइश की मस्जिद में पढ़ी। हालांकि, पहले यह नमाज नुमाइश मैदान में पढ़ी जाती थी। करबला से देर शाम लौटने के बाद शाम-ए-गरीबां इमामबाड़ों में हुईं। बत्ती, चिराग बुझाकर अंधेरे में कर्बला में इमाम हुसैन व उनके 71 साथियों की शहादत और इमाम हुसैन के खेमों को जलाने को याद कर अजादार खूब रोए।

ड्रोन कैमरे से हुई मुहर्रम जुलूस की निगरानी
मुहर्रम के जुलूस की निगरानी पुलिस ने ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी से की। डीएम, एसएसपी, एडीएम सिटी व एसपी सिटी, सीओ प्रथम सहित पूरा अमला शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सक्रिय रहा। देहली गेट से ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। 

ताजिये देखने को छतों पर उमड़ी भीड़ 

मुहर्रम के जुलूस में अलम व ताजियों के अलावा बच्चों ने करतब दिखाए। ट्यूबलाइट फोड़े। ढोल-ताशे बजाए। सज्जादा नशीं ने कहा कि 10 मुहर्रम जीनत-ए-इस्लाम है। जुलूस देखने के लिए सुबह पहले शमशाद मार्केट पर भीड़ उमड़ी। छतों से महिलाओं ने ताजिये देखे व वहीं से मातम भी मनाया। इसके बाद दोपहर में जब जुलूस देहली गेट पर पहुंचा तो यहां भी आसपास की छतों पर भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं व बच्चे इनमें शामिल रहे। कोई हादसा न हो जाए इसे लेकर पुलिस हिदायत देती रही।
मुहर्रम जुलूस
दारा शिकोह फाउंडेशन ने बांटा शर्बत 
दारा शिकोह फाउंडेशन ने केला नगर पर आशिकाने हुसैन के लिए एक सबील का आयोजन किया। यहा शर्बत वितरित कर अजादारे हुसैन की सेवा। इस अवसर पर अध्यक्ष मोहम्मद आमिर रशीद, तनवीर रशीद, अजीमुद्दीन, बिन्नामी, उजैफा, कामरान, शानू खान, फराज वली, बाबू आदि मौजूद रहें।

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