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'रोजी' के हुनर से फूलेंगी प्रवासियों की 'रोटी'
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प्रवासी मजदूर।
- फोटो : CITY OFFICE
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राहुल दक्ष
रोजी-रोटी की तलाश में सालों अपनी माटी से दूर रहे श्रमिकों के लिए कोरोना काल को सुनहरे अवसर में तब्दील करने का प्लान चल रहा है। रोजी-रोजगार की चिंता में लगे इन प्रवासी श्रमिकों को अलीगढ़ में ही उनके हुनर के अनुसार काम मिलेगा। जिलाधिकारी ने पहल कर प्रवासियों के लिए प्लान तैयार किया है। जिले की छोटी-बड़ी इकाईयों के संचालकों, ईंट भट्टा संचालक, कोल्ड स्टोरेज संचालकों से बात की गई है। उनसे उनकी जरूरत के मुताबिक किन कामों के लिए किस हुनर के कारीगर चाहिए।
इसका खाका मांगा है। जीएम डीआईसी श्रीनाथ पासवान इसकी जिम्मेदारी दी गई है कि वह प्रवासियों की एक सूची तैयार करवाएं. उसमें उनके हुनर का उल्लेख किया जाए। मध्यस्थता करते हुए उनको इकाईयों में काम दिलाया जाए। इसके साथ ही जिले में कुछ ऐसे नये उद्योग भी स्थापित करने वालों को प्राथमिकता के तौर पर मंजूरी दी जाए जो भारी मात्रा में श्रमिकों को काम पर रख सकें। मजदूरों को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानदेय पर ही मजदूरी दिलाई जाए।
बाहरी श्रमिकों कीं भरीं जाएंगी जगह
कोरोना काल के दौरान जिस प्रकार से अन्य जिलों या प्रदेशों से अलीगढ़ के रहने वाले श्रमिकों की घर वापसी हुई है। उसी प्रकार से यहां की इकाईयों में काम करने वाले बाहरी मजदूर भी अपने घरों को लौटे हैं। जिले में करीब 20 हजार श्रमिक आए हैं। जबकि 8 हजार के करीब श्रमिक जो कि बाहरी जिलों के रहने वाले थे वह अपने घरों को लौटे हैं। इन 8 हजार श्रमिकों की जगह को भरा जाएगा। इसके साथ ही नये उद्योग, स्वयं रोजगार स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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कामिसपुर पावर प्लांट में 1500 श्रमिकों की जरूरत
कासिमपुर पावन प्लाट में काम करने वाले 800 के करीब बाहरी श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। इसके साथ ही वहां पूर्व से कुछ जगह खाली चल रहीं थीं। जिन्हें मिलाकर करीब 1500 श्रमिकों की जगह वहां खाली हो गई है। इसे भरा जाएगा।
ओडीओपी के तहत ताला बनाने का दस दिवसीय प्रशिक्षण
जीएम डीआईसी ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों को इकाईयों में मजदूरी दिलाने के साथ ही स्वयं रोजगार के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत ताले बनाने का प्रशिक्षण ओडीओपी और अन्य कई छोटे रोजगारों का प्रशिक्षण विश्वकर्मा श्रम रोजगार योजना के तहत दिया जा रहा है। 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद लोगों को काम करने के लिए टूल किट दी जाती है। ओडीओपी के तहत लोन दिलवाया जाता है।
साड़ी, जरी-जरदोजी का काम पसारेगा पैर
गुजरात से लौटे श्रमिकों में से अधिकांश ऐसे हैं, जो वहां पर साड़ी बनाने का काम करते थे। इनकों ध्यान में रखते हुए जिले में अब इस एक और उद्योग को स्थापित करने की राह खुल गई है। जिला प्रशासन, उद्योग केंद्र साड़ी, जरी-जरदोजी की इकाईयों के स्थापना के इच्छुक लोगों की तलाश कर रहा है। इधर, कपड़ों पर इटलिक वर्क में 40 हजार लोग काम कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक महिलाएं हैं। इस काम को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
स्वयं रोजगार का 28 करोड़ों का टारगेट
जीएम डीआईसी के मुताबिक प्रधानमंत्री सृजन कार्यक्त्रस्म का टारगेट इस साल 10 करोड़ के प्रोजेक्ट, मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 8 करोड़ के प्रोजेक्ट, ओडीओपी के तहत 10 करोड़ के प्रोजेक्ट को स्थापित कराने का टारगेट रखा गया है। जैसे-जैसे लोगों के आवेदन आएंगे, उनको स्वीकृति दी जाएगी।
जितने भी प्रवासी मजदूर आए हैं। उन सबको निजी इकाईयों में उनके हुनर के मुताबिक काम दिलाया जाएगा। स्वयं रोजगार के लिए लोन दिलाने आदि की जिम्मेदारी जीएम डीआईसी को दी है। इस बड़ी मुहिम पर अपनी सीधी निगाह बना रखी है। अगले दो माह में हर हाथ रोजगार होगा।
- चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
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रोजी-रोटी की तलाश में सालों अपनी माटी से दूर रहे श्रमिकों के लिए कोरोना काल को सुनहरे अवसर में तब्दील करने का प्लान चल रहा है। रोजी-रोजगार की चिंता में लगे इन प्रवासी श्रमिकों को अलीगढ़ में ही उनके हुनर के अनुसार काम मिलेगा। जिलाधिकारी ने पहल कर प्रवासियों के लिए प्लान तैयार किया है। जिले की छोटी-बड़ी इकाईयों के संचालकों, ईंट भट्टा संचालक, कोल्ड स्टोरेज संचालकों से बात की गई है। उनसे उनकी जरूरत के मुताबिक किन कामों के लिए किस हुनर के कारीगर चाहिए।
इसका खाका मांगा है। जीएम डीआईसी श्रीनाथ पासवान इसकी जिम्मेदारी दी गई है कि वह प्रवासियों की एक सूची तैयार करवाएं. उसमें उनके हुनर का उल्लेख किया जाए। मध्यस्थता करते हुए उनको इकाईयों में काम दिलाया जाए। इसके साथ ही जिले में कुछ ऐसे नये उद्योग भी स्थापित करने वालों को प्राथमिकता के तौर पर मंजूरी दी जाए जो भारी मात्रा में श्रमिकों को काम पर रख सकें। मजदूरों को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानदेय पर ही मजदूरी दिलाई जाए।
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बाहरी श्रमिकों कीं भरीं जाएंगी जगह
कोरोना काल के दौरान जिस प्रकार से अन्य जिलों या प्रदेशों से अलीगढ़ के रहने वाले श्रमिकों की घर वापसी हुई है। उसी प्रकार से यहां की इकाईयों में काम करने वाले बाहरी मजदूर भी अपने घरों को लौटे हैं। जिले में करीब 20 हजार श्रमिक आए हैं। जबकि 8 हजार के करीब श्रमिक जो कि बाहरी जिलों के रहने वाले थे वह अपने घरों को लौटे हैं। इन 8 हजार श्रमिकों की जगह को भरा जाएगा। इसके साथ ही नये उद्योग, स्वयं रोजगार स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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कामिसपुर पावर प्लांट में 1500 श्रमिकों की जरूरत
कासिमपुर पावन प्लाट में काम करने वाले 800 के करीब बाहरी श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। इसके साथ ही वहां पूर्व से कुछ जगह खाली चल रहीं थीं। जिन्हें मिलाकर करीब 1500 श्रमिकों की जगह वहां खाली हो गई है। इसे भरा जाएगा।
ओडीओपी के तहत ताला बनाने का दस दिवसीय प्रशिक्षण
जीएम डीआईसी ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों को इकाईयों में मजदूरी दिलाने के साथ ही स्वयं रोजगार के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत ताले बनाने का प्रशिक्षण ओडीओपी और अन्य कई छोटे रोजगारों का प्रशिक्षण विश्वकर्मा श्रम रोजगार योजना के तहत दिया जा रहा है। 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद लोगों को काम करने के लिए टूल किट दी जाती है। ओडीओपी के तहत लोन दिलवाया जाता है।
साड़ी, जरी-जरदोजी का काम पसारेगा पैर
गुजरात से लौटे श्रमिकों में से अधिकांश ऐसे हैं, जो वहां पर साड़ी बनाने का काम करते थे। इनकों ध्यान में रखते हुए जिले में अब इस एक और उद्योग को स्थापित करने की राह खुल गई है। जिला प्रशासन, उद्योग केंद्र साड़ी, जरी-जरदोजी की इकाईयों के स्थापना के इच्छुक लोगों की तलाश कर रहा है। इधर, कपड़ों पर इटलिक वर्क में 40 हजार लोग काम कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक महिलाएं हैं। इस काम को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
स्वयं रोजगार का 28 करोड़ों का टारगेट
जीएम डीआईसी के मुताबिक प्रधानमंत्री सृजन कार्यक्त्रस्म का टारगेट इस साल 10 करोड़ के प्रोजेक्ट, मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 8 करोड़ के प्रोजेक्ट, ओडीओपी के तहत 10 करोड़ के प्रोजेक्ट को स्थापित कराने का टारगेट रखा गया है। जैसे-जैसे लोगों के आवेदन आएंगे, उनको स्वीकृति दी जाएगी।
जितने भी प्रवासी मजदूर आए हैं। उन सबको निजी इकाईयों में उनके हुनर के मुताबिक काम दिलाया जाएगा। स्वयं रोजगार के लिए लोन दिलाने आदि की जिम्मेदारी जीएम डीआईसी को दी है। इस बड़ी मुहिम पर अपनी सीधी निगाह बना रखी है। अगले दो माह में हर हाथ रोजगार होगा।
- चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी