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मेडिकल कॉलेज में हड़ताल, मरीज की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/अलीगढ़
Updated Wed, 02 Dec 2015 01:29 AM IST
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डॉक्टर से दुर्व्यवहार एवं मारपीट से आक्रोशित जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही।
इमरजेंसी समेत अन्य सेवाएं ठप होने के कारण उपचार को पहुंचे उस्मानपाड़ा के एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। जबकि दूरदराज से उपचार के लिए पहुंच रहे मरीज एवं उनके तीमारदार आंखों में आंसू लिए लौट रहे हैं।
रविवार रात में उपचार के दौरान भुजपुरा निवासी अब्दुल मजीद नामक युवक की मौत हो गई थी। आरोप है कि तीमारदारों ने इमरजेंसी में तैनात रेजीडेंट डॉक्टर फैसल रशीद के साथ दुर्व्यवहार एवं मारपीट कर दी।
इससे आक्रोशित डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी वजह से दो दिन से मेडिकल कॉलेज में नए मरीजों (एएमयू छात्र एवं स्टाफ को छोड़कर) को उपचार नहीं मिल रहा है।
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मन में घबराहट होने पर उस्मानपाड़ा के 75 वर्षीय महफूज खान को लेकर परिजन उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। अस्पताल तक आते-आते मरीज की हालत काफी बिगड़ गई थी।
यहां डॉक्टरों की हड़ताल देखकर तीमारदारों के होश उड़ गए। वे लोग किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की तैयारी करते मरीज की सांसे थम चुकी थी।
तीमारदार आबिद ने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल न होती तो उनके चाचा की जान बच सकती थी। इसके अतिरिक्त दूर-दूर से उपचार को आ रहे मरीज एवं तीमारदार आंखों में आंसू लिए लौट रहे थे।
खासकर गंभीरमरीजों की जान हड़ताल के कारण संकट में है। निर्धन परिवार के लोग ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनके पास प्राइवेट नर्सिंग होम में उपचार कराने के लिए पैसे नहीं हैं। अस्पताल में हड़ताल से पहले भर्ती मरीज भी तरह-तरह की आशंकाओं से ग्रस्त हैं।
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इमरजेंसी समेत अन्य सेवाएं ठप होने के कारण उपचार को पहुंचे उस्मानपाड़ा के एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। जबकि दूरदराज से उपचार के लिए पहुंच रहे मरीज एवं उनके तीमारदार आंखों में आंसू लिए लौट रहे हैं।
रविवार रात में उपचार के दौरान भुजपुरा निवासी अब्दुल मजीद नामक युवक की मौत हो गई थी। आरोप है कि तीमारदारों ने इमरजेंसी में तैनात रेजीडेंट डॉक्टर फैसल रशीद के साथ दुर्व्यवहार एवं मारपीट कर दी।
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इससे आक्रोशित डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर चले गए हैं। इसकी वजह से दो दिन से मेडिकल कॉलेज में नए मरीजों (एएमयू छात्र एवं स्टाफ को छोड़कर) को उपचार नहीं मिल रहा है।
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मन में घबराहट होने पर उस्मानपाड़ा के 75 वर्षीय महफूज खान को लेकर परिजन उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। अस्पताल तक आते-आते मरीज की हालत काफी बिगड़ गई थी।
यहां डॉक्टरों की हड़ताल देखकर तीमारदारों के होश उड़ गए। वे लोग किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की तैयारी करते मरीज की सांसे थम चुकी थी।
तीमारदार आबिद ने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल न होती तो उनके चाचा की जान बच सकती थी। इसके अतिरिक्त दूर-दूर से उपचार को आ रहे मरीज एवं तीमारदार आंखों में आंसू लिए लौट रहे थे।
खासकर गंभीरमरीजों की जान हड़ताल के कारण संकट में है। निर्धन परिवार के लोग ज्यादा परेशान हैं, क्योंकि उनके पास प्राइवेट नर्सिंग होम में उपचार कराने के लिए पैसे नहीं हैं। अस्पताल में हड़ताल से पहले भर्ती मरीज भी तरह-तरह की आशंकाओं से ग्रस्त हैं।