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Aligarh: भांजे के अपहरण में मामा को सजा सुनाई, बच्चे की गवाही पर नाना को किया बरी

Sat, 27 Aug 2022 01:09 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 27 Aug 2022 01:09 AM IST
सार

बच्चे की गवाही को आधार मानते हुए अदालत ने नाना को बरी कर मामा विजयपाल को सात वर्ष कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।

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Court sentenced maternal uncle to seven years in kidnapping case
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

पालीमुकीमपुर के गांव हरदोई से 13 वर्षीय बच्चे के अपहरण की घटना में दोषी मामा को सात वर्ष कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे-13 विकास श्रीवास्तव के न्यायालय से सुनाया गया है। हालांकि मुकदमे में बच्चे का नाना भी आरोपी था, जिसे साक्ष्यों व बच्चे की गवाही के आधार पर बरी किया गया है।
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अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ के अनुसार, घटना 2 फरवरी 2014 की है। वादी मुकदमा अनिल कुमार ने मुकदमा दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उसका 13 वर्षीय बेटा पवन दोपहर में घर से कहीं गया था। इसके बाद नहीं लौटा। काफी तलाश के बाद सुराग न मिलने पर मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें गांव के चार लोगों पर रंजिशन बच्चे के अपहरण का संदेह जताया।
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पुलिस विवेचना के आधार पर दो माह बाद 2 अप्रैल को बच्चा बरामद किया गया। बयानों के आधार पर मामा विजयपाल व नाना चंद्रपाल निवासी नगला तोफी सहसवान बदायूं आरोपी बने। चार्जशीट में यह भी आरोप शामिल किया गया कि 6 लाख रुपये के लिए बच्चे का मामा उसे अगवा कर ले गया था और बंधक बनाकर रखा। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान बच्चे ने गवाही दी कि मामा विजयपाल उसे लेकर गया था। नाना उस समय साथ नहीं था। बच्चे की गवाही को आधार मानते हुए अदालत ने नाना को बरी कर मामा विजयपाल को सात वर्ष कैद व 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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मारपीट-हमले में दो लोगों को सजा
एडीजे प्रथम मनोज कुमार अग्रवाल की अदालत से मारपीट हमले के मामले में दो लोगों को सजा सुनाई गई है। एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार घटना 18 मार्च 2008 की है। सासनी गेट लोधी विहार के विनय अपने परिचित के साथ प्लाट देखने गए थे। तभी वहां नामजद डालचंद्र व शांतनु निवासी बैकुंठ नगर व सन्नू निवासी नौरंगाबाद ने उन पर हमला बोल दिया। मुकदमे में इन तीन के अलावा अन्य भी आरोपी थे। पुलिस ने चार्जशीट तीनों पर दायर की। सत्र परीक्षण के दौरान शांतनु की मौत हो गई। न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर दोनों को 5-5 वर्ष सजा व 6-6 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ में पांच हजार रुपया पीड़ित को देने का आदेश दिया है।


घर में घुसकर मारपीट के मुकदमे में सजा
एसीजेएम द्वितीय नरेश कुमार दिवाकर की अदालत से घर में घुसकर मारपीट के मामले में आरोपियों को सजा सुनाई गई है। एपीओ रविकांत के अनुसार 31 अगस्त 2011 को गांव मीरपुर हरदुआगंज की लक्ष्मी देवी के घर में घुसकर नामजदों ने मारपीट कर दी। इस मामले में न्यायालय में दायर परिवाद में सूरजपाल, प्रमोद, करन, पतरिया, छोटी, विजय, रामवती, राजू आरोपी बनाए गए। न्यायालय ने सभी आरोपियों को 4-4 वर्ष व 2-2 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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