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महाशिवरात्रि : भोलेमय हुआ अलीगढ़
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महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए कांवड़ लेकर जाते कांवड़िए।
- फोटो : CITY OFFICE
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कांवड़ियों की सेवा के लिए रामघाट रोड से लेकर शहर के हर हिस्से में सोमवार को शिविर लगे। इन शिविरों में जलपान, आराम और कांवड़ रखने की व्यवस्था थी। सोमवार दोपहर के बाद शिवभक्तों का रेला चलने लगा, जो शाम को इतना बड़ा हो गया कि एक तरफ की सड़क पर शाम छह बजे से सिर्फ कांवड़िए ही चल रहे थे। उनके साथ चल रहे वाहन सड़क की दूसरी तरफ चल रहे थे। कांवड़ियों के साथ जगह-जगह लगे शिविरों ने मेले जैसा माहौल बना दिया। पूरे शहर में जल रही सतरंगी लाइटें, सजावट और डीजे के भजनों के माहौल भक्तिमय हो गया। कांवड़ियों की सेवा के लिए समाजसेवियों के साथ-साथ विभिन्न मोहल्ले, कालोनी व अपार्टमेंट के लोग सेवा में जुटे रहे।
रामघाट रोड से लेकर क्वार्सी-एटा चुंगी बाईपास, आगरा रोड, जीटी रोड, अनूपशहर रोड, गोंडा मोड़, खैर रोड, मथुरा रोड, पलवल रोड से सोमवार को सैकड़ों कांवड़िए गुजर रहे थे। इस दौरान जगह-जगह शिविर लगाकर शहरवासियों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने उनकी सेवा की। कांवड़ियों के थकने पर लोग उनकी कांवड़ रखवा देते। हाथ-पैर धुलवाकर आराम कराते। इसके साथ ही जलपान कराते और सोने के लिए विस्तर लगा देते। चोटिल अथवा तबियत बिगड़ने पर लोग दवाएं और उपचार करने लग जाते। इस काम के लिए अधिकांश शिविरों में डॉक्टर और स्टाफ तैनात था। जरूरत पड़ने पर जगह जगह एंबुलेंस भी खड़ी हुई थीं। अतरौली से लेकर क्वार्सी चुंगी और इसके बाद पूरे शहर में एक तरफ हर पांच कदम की दूरी पर शिविर लगे हुए थे। शाम चार बजे के बाद जैसे ही भीड़ बढ़ी, वैसे ही जगह-जगह मेले जैसा माहौल रहा। जगह-जगह लगे डीजे पर जोर शोर से भोलेनाथ के भजन बजाए जा रहे थे। भक्ति गीतों पर कांवड़िए भी नाचने लग जाते। जबकि स्थानीय लोग भी नाच गाकर सेवा में लगे रहे। इसके अलावा कांवड़ियों की टोली भी डीजे बजाते हुए साथ चल रही थी। डाक कांवड़ भले ही नाममात्र को देखने के लिए मिली। लेकिन सामूहिक कांवड़ों की संख्या बहुत थी। सुबह से शुरू हुई भीड़ देर रात तक सड़कों पर पैदल-पैदल चलती रही।
पकवान वाले शिविरों में दिनभर लगी रही भीड़
अधिकांश शिविरों में फल, पेठा, दूध, चाय और पूरी सब्जी की व्यवस्था थी। लेकिन कई शिविर ऐसे भी थे। जिनमें चीला, पावभाजी, राजमा चावल या दही-आलू या फलाहार के अन्य वस्तुएं थीं। ऐसे शिविरों में सुबह से लेकर शाम तक प्रसादी पाने के लिए कांवड़ियों की भीड़ रही। इन शिविरों में सैकड़ों सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
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मोहल्ले-कॉलोनियों के लोगों ने भी लगाए शिविर
-समाजसेवी या सामर्थ्यवान व्यक्तियों ने तो शिविर लगाए ही थे। उनके साथ शहर की विभिन्न कॉलोनी, गली, अपार्टमेंट के लोगों ने मिलकर शिविर लगवाया। जिसमें बारी-बारी से दिनभर अलग-अलग व्यंजन कांवड़ियों को परोसे जा रहे थे।
देर शाम से शहर व देहात के कांवड़ियों की हुई शुरुआत
-अलीगढ़ शहर और आसपास के देहात क्षेत्र के कांवड़िए अलीगढ़ शहर में देर शाम के बाद आना प्रारंभ हुए। कई कांवड़िए ऐसे भी हैं, जो मंगलवार सुबह दस बजे तक मंदिरों में पहुंचेंगे। दिन में हाथरस, सादाबाद, दाऊजी, मथुरा, वृंदावन, नौहझील, बाजना, टप्पल आदि क्षेत्र के कांवड़िये रामघाट रोड से गुजरे।
हजारों शिवभक्तों का किया उपचार
-शिविरों के माध्यम से कई कांवड़ियों को जगह-जगह चिकित्सक उपचार भी देते रहे। किसी के पैर में छाले पड़ गए या दर्द की वजह से कोई चल नहीं पा रहा था। जबकि पेट दर्द, सिर दर्द की समस्या को लेकर भी कांवड़िये स्वास्थ्य शिविरों में संपर्क कर रहे थे। मौजूद चिकित्सक स्टाफ ने हजारों की संख्या में कांवड़ियों का उपचार किया।
तिरंगा और बीजेपी झंडा भी रहा हाथ में
-कांवड़ियों के बीच कई टोलियां ऐसी भी थीं। जो अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर चल रही थीं। जबकि कुछ कांवड़िए ऐसे भी दिखे जो बीजेपी झंडा और नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनकर आगे बढ़ रहे थे। यह टोलियां भोलेनाथ के जयकारों के साथ भारत माता के भी जयकारे लगा रहे थे।
व्रत व पूजन सामग्री की हुई खरीदारी
- मंगलवार को व्रत रखने के लिए श्रद्धालुओं ने सोमवार को बाजारों में व्रत व पूजन सामग्री की खरीदारी की। उपवास के लिए कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, केला, काली मिर्च, सेंधा नमक, बेर, संतरा, अमरूद आदि फलों की खरीदारी की। पूजा के लिए दूध, गंगाजल और धूप-दीप की व्यवस्था भी की।
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रामघाट रोड से लेकर क्वार्सी-एटा चुंगी बाईपास, आगरा रोड, जीटी रोड, अनूपशहर रोड, गोंडा मोड़, खैर रोड, मथुरा रोड, पलवल रोड से सोमवार को सैकड़ों कांवड़िए गुजर रहे थे। इस दौरान जगह-जगह शिविर लगाकर शहरवासियों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने उनकी सेवा की। कांवड़ियों के थकने पर लोग उनकी कांवड़ रखवा देते। हाथ-पैर धुलवाकर आराम कराते। इसके साथ ही जलपान कराते और सोने के लिए विस्तर लगा देते। चोटिल अथवा तबियत बिगड़ने पर लोग दवाएं और उपचार करने लग जाते। इस काम के लिए अधिकांश शिविरों में डॉक्टर और स्टाफ तैनात था। जरूरत पड़ने पर जगह जगह एंबुलेंस भी खड़ी हुई थीं। अतरौली से लेकर क्वार्सी चुंगी और इसके बाद पूरे शहर में एक तरफ हर पांच कदम की दूरी पर शिविर लगे हुए थे। शाम चार बजे के बाद जैसे ही भीड़ बढ़ी, वैसे ही जगह-जगह मेले जैसा माहौल रहा। जगह-जगह लगे डीजे पर जोर शोर से भोलेनाथ के भजन बजाए जा रहे थे। भक्ति गीतों पर कांवड़िए भी नाचने लग जाते। जबकि स्थानीय लोग भी नाच गाकर सेवा में लगे रहे। इसके अलावा कांवड़ियों की टोली भी डीजे बजाते हुए साथ चल रही थी। डाक कांवड़ भले ही नाममात्र को देखने के लिए मिली। लेकिन सामूहिक कांवड़ों की संख्या बहुत थी। सुबह से शुरू हुई भीड़ देर रात तक सड़कों पर पैदल-पैदल चलती रही।
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पकवान वाले शिविरों में दिनभर लगी रही भीड़
अधिकांश शिविरों में फल, पेठा, दूध, चाय और पूरी सब्जी की व्यवस्था थी। लेकिन कई शिविर ऐसे भी थे। जिनमें चीला, पावभाजी, राजमा चावल या दही-आलू या फलाहार के अन्य वस्तुएं थीं। ऐसे शिविरों में सुबह से लेकर शाम तक प्रसादी पाने के लिए कांवड़ियों की भीड़ रही। इन शिविरों में सैकड़ों सदस्यों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
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मोहल्ले-कॉलोनियों के लोगों ने भी लगाए शिविर
-समाजसेवी या सामर्थ्यवान व्यक्तियों ने तो शिविर लगाए ही थे। उनके साथ शहर की विभिन्न कॉलोनी, गली, अपार्टमेंट के लोगों ने मिलकर शिविर लगवाया। जिसमें बारी-बारी से दिनभर अलग-अलग व्यंजन कांवड़ियों को परोसे जा रहे थे।
देर शाम से शहर व देहात के कांवड़ियों की हुई शुरुआत
-अलीगढ़ शहर और आसपास के देहात क्षेत्र के कांवड़िए अलीगढ़ शहर में देर शाम के बाद आना प्रारंभ हुए। कई कांवड़िए ऐसे भी हैं, जो मंगलवार सुबह दस बजे तक मंदिरों में पहुंचेंगे। दिन में हाथरस, सादाबाद, दाऊजी, मथुरा, वृंदावन, नौहझील, बाजना, टप्पल आदि क्षेत्र के कांवड़िये रामघाट रोड से गुजरे।
हजारों शिवभक्तों का किया उपचार
-शिविरों के माध्यम से कई कांवड़ियों को जगह-जगह चिकित्सक उपचार भी देते रहे। किसी के पैर में छाले पड़ गए या दर्द की वजह से कोई चल नहीं पा रहा था। जबकि पेट दर्द, सिर दर्द की समस्या को लेकर भी कांवड़िये स्वास्थ्य शिविरों में संपर्क कर रहे थे। मौजूद चिकित्सक स्टाफ ने हजारों की संख्या में कांवड़ियों का उपचार किया।
तिरंगा और बीजेपी झंडा भी रहा हाथ में
-कांवड़ियों के बीच कई टोलियां ऐसी भी थीं। जो अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर चल रही थीं। जबकि कुछ कांवड़िए ऐसे भी दिखे जो बीजेपी झंडा और नरेंद्र मोदी का मुखौटा पहनकर आगे बढ़ रहे थे। यह टोलियां भोलेनाथ के जयकारों के साथ भारत माता के भी जयकारे लगा रहे थे।
व्रत व पूजन सामग्री की हुई खरीदारी
- मंगलवार को व्रत रखने के लिए श्रद्धालुओं ने सोमवार को बाजारों में व्रत व पूजन सामग्री की खरीदारी की। उपवास के लिए कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, केला, काली मिर्च, सेंधा नमक, बेर, संतरा, अमरूद आदि फलों की खरीदारी की। पूजा के लिए दूध, गंगाजल और धूप-दीप की व्यवस्था भी की।

रामघाट रोड से महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए कांवड़ लेकर जाते श्रद्धालु।- फोटो : CITY OFFICE