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अलीगढ़ के 20 से अधिक तालाब-पोखरों को निगल गए भू माफिया
Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Thu, 09 Jul 2020 09:09 PM IST
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बनबसा के अंबेडकर ग्राम फागपुर में रेलवे द्वारा किए गड्डे झील में हुए तब्दील।
- फोटो : अमर उजाला
आहुति संस्था के अध्यक्ष अशोक चौधरी का कहना है कि महानगर के मौजूदा एरिया में 1947 में करीब 46 तालाब-पोखरें थी, जो वर्तमान समय में 24 रह गई हैं। इनमें से भी 70-80 प्रतिशत भूभाग पर अवैध कब्जा हो चुका है। अशोक चौधरी ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर महानगर के तालाब-पोखरों को बचाने की मांग की है।
आहुति अध्यक्ष ने लिखा है कि गूलर रोड पोखर के आंशिक हिस्से को मुक्त कराया गया था। यह नगर निगम की सार्थक पहल थी। अचानक पोखरों के संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त आदि के कार्य स्थगित कर दिए गए हैं। लालडिग्गी तालाब छोड़कर अन्य किसी तालाब पर से अतिक्रमण हटाने एवं गहरीकरण आदि का कार्य नहीं हो रहा है।
वहां पर पिकनिक स्पॉट बनाने की योजना पर भी कोई काम नहीं हो रहा है। अशोक चौधरी ने कहा है कि पोखर पर कब्जा व अतिक्रमण का खेल नगर निगम एवं पूर्ववर्ती नगरपालिका के अधिकारियों के भ्रष्टाचार का दुष्परिणाम है। यह काम आज भी जारी है।
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अतिक्रमणकारियों व भूमाफिया के मंसूबे को ध्वस्त नहीं किया गया तो नगर निगम के औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। आबादी के बढ़ते घनत्व व पेयजल की जरूरत को देखते हुए भी आज तालाब-पोखरों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
प्रमुख मांगे...
- 1947 के समय के सभी तालाबों-पोखरों के मानचित्र, खसरा व खतौनी, जो उपलब्ध हों, निकलवा कर उन्हें मूल स्वरूप में लाया जाए।
- इस उद्देश्य से एक मजिस्ट्रेट अधिकार संपन्न अधिकारी मय पुलिस बल स्थायी रूप से नियुक्त हो।
- इसे एक सतत अभियान के रूप में संचालित किया जाए।
- सभी तालाबों-पोखरों के संरक्षण के लिए प्रशासन, नगर निगम अधिकारी व क्षेत्रीय नागरिकों की संरक्षण समितियां बनाई जाएं।
- अचल सरोवर के चारों ओर की भूमि नगर निगम की ही है, अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए।
तालाब को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। कब्जा के प्रयास को भी नाकाम किया गया। महामारी एवं लॉकडाउन के कारण तालाबों को संरक्षित करने के कार्य में कुछ दिक्कतें आई हैं, लेकिन उसे नजरअंदाज नहीं किया गया है। हमलोग आहुति के सदस्यों से भी तालाबों के संरक्षण में सहयोग लेंगे।
- राजबहादुर सिंह, सहायक नगर आयुक्त
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आहुति अध्यक्ष ने लिखा है कि गूलर रोड पोखर के आंशिक हिस्से को मुक्त कराया गया था। यह नगर निगम की सार्थक पहल थी। अचानक पोखरों के संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त आदि के कार्य स्थगित कर दिए गए हैं। लालडिग्गी तालाब छोड़कर अन्य किसी तालाब पर से अतिक्रमण हटाने एवं गहरीकरण आदि का कार्य नहीं हो रहा है।
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वहां पर पिकनिक स्पॉट बनाने की योजना पर भी कोई काम नहीं हो रहा है। अशोक चौधरी ने कहा है कि पोखर पर कब्जा व अतिक्रमण का खेल नगर निगम एवं पूर्ववर्ती नगरपालिका के अधिकारियों के भ्रष्टाचार का दुष्परिणाम है। यह काम आज भी जारी है।
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अतिक्रमणकारियों व भूमाफिया के मंसूबे को ध्वस्त नहीं किया गया तो नगर निगम के औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। आबादी के बढ़ते घनत्व व पेयजल की जरूरत को देखते हुए भी आज तालाब-पोखरों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
प्रमुख मांगे...
- 1947 के समय के सभी तालाबों-पोखरों के मानचित्र, खसरा व खतौनी, जो उपलब्ध हों, निकलवा कर उन्हें मूल स्वरूप में लाया जाए।
- इस उद्देश्य से एक मजिस्ट्रेट अधिकार संपन्न अधिकारी मय पुलिस बल स्थायी रूप से नियुक्त हो।
- इसे एक सतत अभियान के रूप में संचालित किया जाए।
- सभी तालाबों-पोखरों के संरक्षण के लिए प्रशासन, नगर निगम अधिकारी व क्षेत्रीय नागरिकों की संरक्षण समितियां बनाई जाएं।
- अचल सरोवर के चारों ओर की भूमि नगर निगम की ही है, अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए।
तालाब को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। कब्जा के प्रयास को भी नाकाम किया गया। महामारी एवं लॉकडाउन के कारण तालाबों को संरक्षित करने के कार्य में कुछ दिक्कतें आई हैं, लेकिन उसे नजरअंदाज नहीं किया गया है। हमलोग आहुति के सदस्यों से भी तालाबों के संरक्षण में सहयोग लेंगे।
- राजबहादुर सिंह, सहायक नगर आयुक्त