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Aligarh: निर्यात घटा इस साल...फिर भी मंहगे हुए लड्डू गोपाल

Tue, 30 Jul 2024 12:13 PM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 30 Jul 2024 12:13 PM IST
सार

अलीगढ़ में बनने वाले लड्डू गोपाल वजन के अनुसार बिकते हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले पीतल की कीमतों में 50 से 70 रुपये किलो तक का इजाफा होने के कारण इनकी कीमतों में वृद्धि हुई है।

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Laddu Gopal construction in Aligarh
जयगंज स्थित एक ब्रास के शोरूम में लगी लड्डू गोपाल की मूर्तियां - फोटो : संवाद

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों के बीच अलीगढ़ शहर के हैंडीक्राफ्ट-आर्टवेयर उद्योग में निर्मित लड्डू गोपाल की बात न हो, ये संभव नहीं। वजह ही कुछ ऐसी है कि ब्रास, पीतल और अष्टधातु के जो लड्डू गोपाल अलीगढ़ में बनते हैं, वह भारत में कहीं अन्य जगह नहीं बनते हैं, मगर इस बार अलीगढ़ में बनने वाले इन लड्डू गोपाल की कीमतों में इजाफा हुआ है। इसके पीछे की मुख्य वजह पीतल पर महंगाई है। इस महंगाई की वजह और चीन से जुड़े कुछ कारणों से निर्यात भी घटा है। हालांकि इस महंगाई के बीच इस कारोबार से जुड़े लोग दिन रात लड्डू-गोपाल बनाकर सप्लाई देने में जुटे हैं।

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लड्डू गोपाल की खरीदारी
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अलीगढ़ में बनने वाले लड्डू गोपाल वजन के अनुसार बिकते हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले पीतल की कीमतों में 50 से 70 रुपये किलो तक का इजाफा होने के कारण इनकी कीमतों में वृद्धि हुई है। यही वजह है कि उत्पादकों के पास बड़े वजन के लड्डू गोपाल के बजाय छोटे वजन के लड्डू गोपाल की मांग अधिक है। महंगाई की वजह ही इस बार बाजार में ऑर्डरों में कमी बन रही है। वहीं, महंगाई व चीन की विदेशी नीति के चलते अलीगढ़ के बने लड्डू गोपाल का निर्यात भी पचास से साठ फीसदी तक घट गया है। फिर भी उत्पादकों को उम्मीद है कि त्योहार नजदीक आते आते डिमांड बढ़ेगी तो वे अपनी तैयारी पूरी कर रहे हैं।

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इस बार पीतल पर महंगाई की वजह से बड़े वजनी लड्डू गोपाल की डिमांड कम है। बाकी हमारी जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां जारी हैं। - कोमल कटारा, निर्माता/निर्यातक

इस बार पीतल की कीमतें अधिक होने के कारण निर्यात कुछ घटा है। भारतीय बाजार में जरूर जन्माष्टमी को लेकर लड्डू गोपाल की डिमांड है। जिसे लेकर हमारी तैयारी है और ऑर्डर भेजे जा रहे हैं।-सुशील मित्तल, निर्माता/निर्यातक
चीन व अमेरिका के बीच ड्यूटी मुक्त व कंटेनर बुकिंग के निर्णय ने भारतीय निर्यात काफी घटाया है। मगर पंद्रह अगस्त के बाद हालात सुधरेंगे। पिछले वर्षों की तुलना में जन्माष्टमी पर निर्यात पचास फीसद तक घटा है।-ललित गुप्ता, विदेशी ट्रांसपोर्टर

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कहीं नहीं बनते अलीगढ़ जैसे लड्डू-गोपाल

ब्रास (कापर, पीतल व जस्ता मिक्स) निर्मित यह मूर्ति देश में कहीं और नहीं बनती। यहां की मूर्ति की अपनी एक पहचान है। यहां की मूर्ति अंदर से खोखली मूर्ति वेल्डिंग के साथ बनाने की कला है। दक्षिण भारत में ठोस मूर्ति बनाई जाती हैं, जो वजनी और कीमती भी होती है। पीतल नगरी मुरादाबाद के कारोबारी भी यहां से ऑर्डर पर मूर्ति बनवाकर मंगाते हैं। शहर के कुछ इलाकों में यह कुटीर उद्योग के रूप में चल रहा है। यहां पीतल की चादर या सिल्ली की दो तरह से मूर्ति बनती हैं। इसमें सबसे महीन काम हाथ की दस्तकारी चिताई के जरिये डिजाइन बनाई जाती है। सामान्य दिनों में यहां विभिन्न प्रकार की मूर्तियां बनती हैं। इन दिनों लड्डू गोपाल की मांग के अनुसार उन्हें ज्यादा बनाया जा रहा है।
मूर्ति निर्माण
यहां तक सप्लाई
दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट, कर्नाटक के अलावा यूपी के अधिकांश शहरों में मूर्ति की आपूर्ति होती है। इनकी मुरादाबाद, मथुरा, वृंदावन में सर्वाधिक आपूर्ति होती है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी मूर्तियां बिक रही हैं। कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, दुबई में रहने वाले भारतीयों के बीच इनकी मांग है। इसके अलावा इस्कॉन के स्टॉलों पर भी इनकी आपूर्ति लार्ड कृष्णा के नाम से होती है।

लड्डू गोपाल बनाने में जुटे हैं मैराज
अतरौली वैसपाड़ा के मैराज खां सासनीगेट सराय भूखी में कारखाना चलाते हैं। वह अपने ससुर के कहने पर 1996 में अतरौली से मोटर मैकेनिक का काम छोड़कर आए थे। तभी से यहां परिवार के साथ मूर्तियां बनाते हैं।

भारतीय बाजार में मांग, पर विदेशी निर्यात धड़ाम

इस बार चीन का विदेशी निर्यात पंद्रह अगस्त तक ड्यूटी मुक्त है। पंद्रह अगस्त के बाद चीन के माल पर तीस फीसदी का एंटी डंपिंग शुल्क लगेगा। इसलिए पंद्रह अगस्त के बाद विदेशों में चीन का माल महंगा होगा। हालांकि वहां एल्युमीनियम की मशीन से मूर्ति बनाकर बेची जा रही है। मगर सस्ती व भारतीय माल की अपेक्षा सुंदर होने के कारण उसकी मांग इस बार अधिक है। यहां का निर्यात आधे पर रह गया है। दूसरी वजह चीन ने ड्यूटी मुक्त का लाभ लेने के लिए 70 फीसदी से अधिक समुद्री कंटेनर बुक कर रखे हैं। वह भी 15 अगस्त के बाद फ्री होंगे। ऐसे में भाड़ा 1200 डॉलर टन से 7 हजार डॉलर टन तक पहुंच गया है। इसलिए भारतीय माल विदेश में महंगा है। 15 अगस्त के बाद कीमत गिरेंगी, तब ऑर्डर अधिक मिलने की उम्मीद है।
मूर्ति निर्माण
मूर्तियों का सालाना कारोबार एक नजर में
-500 करोड़ रुपये सालाना है पीतल मूर्ति का कारोबार
-150 करोड़ रुपये सालाना का है निर्यात
-35 निर्यातक विदेशी बाजार में बेचते हैं पीतल मूर्ति
-50 बड़े पीतल मूर्ति के हैं निर्माता
-50 हजार लोगों की जुड़ी है रोजी रोटी
-500 ढलाई और निर्माण यूनिट

मूर्तियों की कीमत में इजाफा
-900 रुपये किलो तक रेग्यूलर मूर्तियां, 100 रुपये महंगी
-1100 रुपये किलो तक फाइन मूर्तियां, 100 रुपये महंगी
-1200 रुपये किलो तक सुपरफाइन मूर्तियां-पत्थर युक्त, 50 रुपये महंगी
-1300 रुपये किलो तक अष्टधातु मूर्तियां, 50 रुपये महंगी
(पिछले वर्ष तक फाइन उत्पाद की कीमत 800 रुपये से शुरू थी)
मूर्ति निर्माण
इस वर्ष पीतल में ये इजाफा

  • 450 रुपये किलो वाली पीतल इस वर्ष 525 रुपये किलो है। 
  • 200 ग्राम से 20 किलो वजन तक के बनते हैं लड्डू गोपाल।


महंगाई की वजह से जन्माष्टमी के ऑर्डर में अंतर
-7 करोड़ तक सिमटे पिछले वर्ष 10 करोड़ रुपये के कुल ऑर्डर
-2 करोड़ रुपये सिमटे पिछले वर्ष 5 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर

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