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सिर्फ एक आया कोरोना बीमार, उसकी भी मौत, कर गया 70 को बाहर

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2020 02:40 PM IST
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just one corona infected has been come in jn medical college, that too expired and now more than 70 member of medical staff in isolation
जेएन मेडिकल कॉलेज - फोटो : AMAR UJALA
अलीगढ़। एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमण से ग्रस्त केवल एक मरीज आया। उसकी भी मौत हो गई। उसके आने के बाद से एक डॉक्टर कोरोना संक्रमित हो गई, 70 से अधिक स्टाफ और भर्ती पेशेंट आइसोलेशन में हैं। कुछ अन्य डॉक्टरों के भी संक्रमण से ग्रस्त होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस तरह कोरोना महामारी के उपचार और इसके प्रसार को रोकने संबंधी जो व्यवस्थाएं पिछले 2 महीने से मेडिकल कॉलेज में की जा रही थी, उन पर अब सवाल उठने लगे हैं।
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इस हालात पर जनहित मानव अधिकार एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडे की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है जिसने मेडिकल कॉलेज में व्याप्त इन अव्यवस्थाओं का संज्ञान लेने की मांग की गई है। इस पत्र में कहा गया है कि अगर आंकड़ों की बात करें तो मेडिकल कॉलेज की कोरोना संक्रमित की मृत्यु दर 100 फ़ीसदी बनती है क्योंकि यहां पर सिर्फ एक मरीज आया, उसकी भी मौत हो गई। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में जिस महिला डॉक्टर को कोरोना संक्रमण पाया गया है, उसकी ड्यूटी भी आइसोलेशन वार्ड में नहीं थी। इसके बाद भी वह पॉजिटिव हो गई। जबकि आगरा जैसे शहर में कोरोना संक्रमण से ग्रस्त मरीजों का आंकड़ा साढे तीन सौ से ऊपर है । ऐसे में सवाल उठता है कि अगर मेडिकल कॉलेज में पांच छह मरीज और आ गए होते तो यहां पर बुरी तरह संक्रमण फैल जाता। यह भी कहा गया है कि इस समय मेडिकल कॉलेज में सामान्य ओपीडी बंद है। नए मरीजों को भी भर्ती नहीं किया जा रहा है। सामान्य सर्जरी और ऑपरेशन जिन्हें टाला जा सकता है, स्थगित कर दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज में एक तरह से बहुत सीमित कार्य हो रहा है। इसके बाद भी इस तरह की अव्यवस्था हो रही है। कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के साथ ही यह बात भी सामने आ गई है कि जेएन मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टर निजी प्रैक्टिस भी करते हैं । कोरोना संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति का इलाज जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. अंजुम चुगताई कर रहे थे। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मरीज को सामान्य वार्ड में भर्ती कराया। यह भी यहां पर संक्रमण फैलने का बड़ा कारण माना जा रहा है।
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पत्र में कोरोना के संबंध में पिछले 2 महीने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा की जा रही कवायद को व्यर्थ और निरर्थक बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
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................... मेडिकल कॉलेज में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से आने वाले कोरोना संक्रमण सैंपल की जांच का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है । यहां पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मानकों के अनुसार कोरोना के संबंध में काम किया जा रहा है। नई मशीन भी लग गई है और स्क्रीनिंग का काम भी तेज कर दिया गया है। जिन डॉक्टरों को आइसोलेशन में भेजा गया है और जिनको फाइव स्टार सुविधाएं देने की बात की जा रही है उनके संबंध में मानक ही ऐसी सुविधाएं देने का है। 7 दिन कोरना वार्ड में में ड्यूटी देने के बाद उनको आइसोलेशन के लिए भेजा जाता है।
- प्रोफेसर शाफे किदवई, एमआईसी जनसंपर्क विभाग, एएमयू
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