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जब से जावित्री गांव आई, तब से एक ही कहानी सुनाई
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प्रधान राजेश परीक्षित।
- फोटो : CITY OFFICE
गांव कमालाबाद के वीरेंद्र को ब्याही जिस युवती ने खुद को जालौन के कालपी की राजो देवी व जयप्रकाश की बेटी बताया। उस मां ने जावित्री को पहचानने और बेटी स्वीकारने से इनकार कर दिया। इधर, गांव कमालाबाद के लोग एक ही बात कह रहे हैं कि जब से जावित्री गांव आई है, तब से खुद की यही कहानी सुनाती है। अब सच्चाई क्या है? यह जावित्री या ऊपरवाला ही जाने। फिलहाल जावित्री कालपी में है और शनिवार को उसके यहां पहुंचने की उम्मीद है।
गांव कमालाबाद में जावित्री और उसके पति वीरेंद्र के पड़ोसी रिश्ते के चाचा अजयवीर से शुक्रवार को जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने पहुंचकर बात की तो उन्होंने यही बताया कि जावित्री को वीरेंद्र करीब छह बरस पहले ब्याहकर लाया था। हालांकि दोनों का परिचय काफी पहले हो गया था। दिल्ली के तिलक नगर में वीरेंद्र काम करने गया था, वहीं जावित्री अपनी मुंह बोली बुआ के पास रहती थी। दोनों की मुलाकात हुई और बात शादी तक पहुंच गई। तिलक नगर, दिल्ली वाली बुआ यही बताती थी कि उसे रास्ते में भटकती मिली। यहां आने के बाद भी जावित्री अपने मां-बाप, भाइयों के विषय में इसी तरह जिक्र करती।
अजयवीर सवाल उठाते हैं कि अगर जावित्री राजो देवी की बेटी नहीं तो जावित्री को कैसे पता कि राजो देवी की बेटी उसी समय से लापता है और उसके कितने बच्चे हैं और उनके नाम क्या हैं। दिल्ली के बाद छर्रा आने के बाद जावित्री कहीं नहीं गई। उसने पूरा वाकया बताने के बाद पुलिस की मदद से ही तो चिट्ठी लिखवाई थी। अब सच्चाई जो भी हो। गांव वालों को जावित्री व वीरेंद्र के लौटने का इंतजार है।
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इंस्पेक्टर छर्रा रामसिया मौर्य के अनुसार जो बातें जावित्री ने बताईं थीं, उनके अनुसार ऐसा कहना मुश्किल है कि वह मनगढ़ंत कहानी सुना रही है या झूठ बोल रही है। कालपी पुलिस से लगातार संपर्क में हैं। शनिवार को कालपी पुलिस उन्हें यहां छोड़ने आ रही है। इसके बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि बुधवार के अंक में अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
- ग्राम सभा के मजरा कमालाबाद में वीरेंद्र व जावित्री परिवार सहित रहते हैं। जबसे अनीता उर्फ जावित्री व उसका पति वीरेन्द्र गांव में हैं, तभी से पति-पत्नी के रूप में रहते हैं। जावित्री की कहानी सुनकर ही पुलिस ने चिट्ठी भेजी है। यह कैसे मान लिया जाए कि जावित्री ने झूठ बोला है। अगर पुलिस चाहे तो सच्चाई का पता डीएनए कराकर भी लगाया जा सकता है।-राजेश परीक्षित प्रधान ग्राम पंचायत सिहावली
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गांव कमालाबाद में जावित्री और उसके पति वीरेंद्र के पड़ोसी रिश्ते के चाचा अजयवीर से शुक्रवार को जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने पहुंचकर बात की तो उन्होंने यही बताया कि जावित्री को वीरेंद्र करीब छह बरस पहले ब्याहकर लाया था। हालांकि दोनों का परिचय काफी पहले हो गया था। दिल्ली के तिलक नगर में वीरेंद्र काम करने गया था, वहीं जावित्री अपनी मुंह बोली बुआ के पास रहती थी। दोनों की मुलाकात हुई और बात शादी तक पहुंच गई। तिलक नगर, दिल्ली वाली बुआ यही बताती थी कि उसे रास्ते में भटकती मिली। यहां आने के बाद भी जावित्री अपने मां-बाप, भाइयों के विषय में इसी तरह जिक्र करती।
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अजयवीर सवाल उठाते हैं कि अगर जावित्री राजो देवी की बेटी नहीं तो जावित्री को कैसे पता कि राजो देवी की बेटी उसी समय से लापता है और उसके कितने बच्चे हैं और उनके नाम क्या हैं। दिल्ली के बाद छर्रा आने के बाद जावित्री कहीं नहीं गई। उसने पूरा वाकया बताने के बाद पुलिस की मदद से ही तो चिट्ठी लिखवाई थी। अब सच्चाई जो भी हो। गांव वालों को जावित्री व वीरेंद्र के लौटने का इंतजार है।
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इंस्पेक्टर छर्रा रामसिया मौर्य के अनुसार जो बातें जावित्री ने बताईं थीं, उनके अनुसार ऐसा कहना मुश्किल है कि वह मनगढ़ंत कहानी सुना रही है या झूठ बोल रही है। कालपी पुलिस से लगातार संपर्क में हैं। शनिवार को कालपी पुलिस उन्हें यहां छोड़ने आ रही है। इसके बाद आगे निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि बुधवार के अंक में अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
- ग्राम सभा के मजरा कमालाबाद में वीरेंद्र व जावित्री परिवार सहित रहते हैं। जबसे अनीता उर्फ जावित्री व उसका पति वीरेन्द्र गांव में हैं, तभी से पति-पत्नी के रूप में रहते हैं। जावित्री की कहानी सुनकर ही पुलिस ने चिट्ठी भेजी है। यह कैसे मान लिया जाए कि जावित्री ने झूठ बोला है। अगर पुलिस चाहे तो सच्चाई का पता डीएनए कराकर भी लगाया जा सकता है।-राजेश परीक्षित प्रधान ग्राम पंचायत सिहावली

जावित्री।- फोटो : KANPUR