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कोतवाली गोलीकांड: दरोगा गिरफ्तार कर भेजा जेल, पूछताछ में बताया क्यों भागा और कैसे बचता रहा आठ दिन

Sun, 17 Dec 2023 09:26 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 17 Dec 2023 09:26 AM IST
सार

अलीगढ़ शहर कोतवाली गोलीकांड का मुख्य आरोपी दरोगा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। दरोगा ने पूछताछ में बताया कि घटना के बाद वह क्यों भागा और कहां-कहां पर आठ दिन तक पुलिस से छिपता रहा। मामले में घायल महिला की मौत हो चुकी है।

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Inspector arrested in police station shooting reveals secrets
गिरफ्तार दरोगा मनोज शर्मा - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ कोतवाली में हुए गोलीकांड का मुख्य आरोपी और 20 हजार के इनामी दरोगा मनोज शर्मा को घटना के आठवें दिन 16 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की टीमें उसकी तलाश में पश्चिमी यूपी, एनसीआर और उत्तराखंड तक दौड़ लगा रही थीं, मगर उसे शहर में ही सारसौल से अलीगढ़ आते समय गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की खबर से अधिकारियों ने राहत महसूस की। दो घंटे तक चली पूछताछ के बाद दरोगा को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।

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इस घटना में भागे हुए इनामी दरोगा को पुलिस टीमों ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले मुकदमे में लापरवाही का दूसरा आरोपी मुंशी भी जेल भेजा जा चुका है। अब बाकी विवेचनात्मक कार्यवाही जारी है।-कलानिधि नैथानी, एसएसपी।

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खुद पर हमले के डर से भागा था दरोगा, पश्चिमी यूपी-एनसीआर में ही घूमता रहा
ऊपरकोट कोतवाली गोलीकांड के बाद दरोगा मनोज शर्मा को लगा था कि जिस अंदाज में हजारों की भीड़ जमा हो रही है, कहीं उस पर हमला न कर दे। इसलिए उसने खुद ही वहां से भाग जाना ही उचित समझा। इसके बाद उसने जो दौड़ लगाई तो वह गिरफ्तारी तक किसी जगह रात में नहीं ठहरा। बस दौड़ता ही रहा। खास बात यह रही कि उसने सबसे पहले मेरठ से अपनी पत्नी व बेटी को फोन कर नोएडा बुला लिया। अलीगढ़ से खुद नोएडा पहुंच गया। इसके बाद पत्नी व बेटी को लेकर लगातार इधर उधर भागता रहा। परिजनों व करीबियों से मदद लेता रहा। पुलिस कार्रवाई की जानकारी जुटाता रहा। पता चला कि बीस से ज्यादा रिश्तेदार पुलिस हिरासत में हैं तो फिर आत्मसमर्पण करने का मन बनाया।


गिरफ्तारी के बाद दरोगा ने पुलिस पूछताछ में स्वीकारा कि यह उसके पुलिस कॅरिअर की पहली गलती थी। लापरवाही खुद की मानें या पिस्टल सौंपने वाले दरोगा की, उससे गोली चल गई। वह थाने से भागने के मूड में नहीं था, मगर जब हजारों की भीड़ वहां जमा होने लगी तो उसे लगा कि कहीं लोग उस पर हमलावर न हो जाएं। इसलिए वह पहले भुजपुरा चौकी पहुंचा। मगर उसे अहसास हुआ कि महिला गैर समुदाय से है और चौकी भी उसी क्षेत्र में है। इसलिए उसने वहां भी रुकना उचित नहीं समझा। वहां अपनी बाइक खड़ी की और कार उठाकर सीधा शहर छोड़ जाना ही उचित समझा। भागते समय सबसे पहले अपनी पत्नी व बेटी को फोन कर मेरठ से नोएडा बुला लिया था। वे घर से स्विफ्ट कार से नोएडा पहुंचे। जहां से तीनों एक गाड़ी में सवार हुए और फिर दौड़ लगाना शुरू किया।

बस दोस्तों के पास ठहरे, रात कहीं नहीं काटी

इस दौरान दरोगा अपनी पत्नी व बेटी को गाड़ी में लेकर घूमता रहा। अपने किसी दोस्त के यहां कुछ घंटों के लिए रुकता था या फिर किसी होटल में कुछ घंटों के लिए आराम करता था। किसी एक ठिकाने पर उसने एक रात नहीं काटी। वह नोएडा से दिल्ली, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ व बागपत तक चक्कर लगाता रहा। किसी एक शहर में एक दिन भी नहीं रुका। वह खुद पुलिसवाला है और अच्छी तरह से जानता था कि कैसे पुलिस पीछे लगी रहती है और पकड़ लेती है। उसको उम्मीद थी कि गैर इरादतन धाराओं में मुकदमा होगा और अग्रिम जमानत हो जाएगी। मगर ऐसा नहीं हुआ।
गिरफ्तार दरोगा

गभाना टोल तक मिली लोकेशन, दबाव पर की वापसी
पुलिस को दरोगा की आखिरी लोकेशन गभाना टोल तक मिली। इसके बाद बस रिश्तेदारों से पूछताछ में मिले तथ्य ही आधार बने। कोई बताता कि आगरा में दोस्त है तो पुलिस वहां दौड़ती। कोई मेरठ, मुजफ्फर नगर, बागपत, शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर व हरिद्वार तक दौड़ाता। इस दौरान ससुराल पक्ष, गांव व परिवार के बीस से ज्यादा रिश्तेदार पुलिस ने पकड़ लिए। यही दबाव काम आया और उसने खुद वापस अलीगढ़ पहुंचकर आत्मसमर्पण करना उचित समझा। जिसके बाद वह दबोच लिया गया। अलीगढ़ आते समय पत्नी व बेटी को गाजियाबाद में छोड़ दिया।
दरोगा मनोज शर्मा

बोला, समय खराब था, ये पुलिस जीवन की पहली लापरवाही
गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेशी के समय मीडिया के सवालों पर दरोगा ने कहा कि उसका समय खराब चल रहा था। पिछले दो माह से उसने अपनी सर्विस पिस्टल थाने से नहीं ली थी। मगर अब सर्द रात आने लगी थीं और संवेदनशील इलाके में उसकी पोस्टिंग थी। इसलिए उसने पिस्टल लेने का मन बनाया था। मगर उसे अंदाजा न था कि मुंशी उसे लोड पिस्टल सौंप देगा। पिस्टल लेने के बाद उसने सिर्फ इस अंदेशे से फायर किया कि चेक कर लूं, कहीं लोड तो नहीं। मगर उसे अंदेशा न था कि इसमें कारतूस होगा। यह पुलिस की नौकरी में पहली बार हुआ। उसने दीवार की ओर गोली चलाई, मगर वह महिला के जा लगी। फरारी के दौरान वह खुद व उसका परिवार महिला की सलामती की दुआ करता रहा। मगर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर होगा। अब जो होगा, उसके अनुसार कदम उठाएगा। कानून से उसे मदद की उम्मीद है।

दरोगा व मुंशी के खिलाफ विवेचना और मजिस्ट्रेटी जांच जारी

एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना है कि महिला को गोली लगने और मौत हो जाने के मामले में दरोगा मनोज शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुकदमे में आरोपी दरोगा व मुंशी के खिलाफ विवेचना और मजिस्ट्रेटी जांच जारी है। दोनों को उनकी गलती के लिए दंडित किया जा रहा है। विभाग पीड़ित परिवार संग है। दो कर्मियों के दोष के लिए समस्त पुलिस विभाग को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। विभाग के सभी सिपाही और दरोगा रात दिन जनहित में कार्य कर रहे हैं। सभी को संवेदनशील रहकर कार्य करने के आदेश दिए गए हैं। विगत दो वर्षों में पुलिस को जनता के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए काफी प्रयास हुए हैं। हाल फिलहाल में गैर जनपद से अलीगढ़ आए पुलिस कर्मियों को जनता के साथ सरलता से पेश आने के आदेश दिए गए हैं।
मृतक इशरत जहां

ये रहा पूरा घटनाक्रम
कोतवाली के तुर्कमान गेट चौकी क्षेत्र के हड्डी गोदाम के बुजुर्ग हार्डवेयर/ताला व्यापारी शकील खां की 55 वर्षीय पत्नी इशरत निगार पासपोर्ट सत्यापन के सिलसिले में 8 दिसंबर को बेटे ईशान संग कोतवाली गई थीं। तभी दोपहर करीब ढाई बजे कोतवाली के मुंशियाने में मुंशी ने वहां आए दरोगा मनोज शर्मा को मालखाने से उनकी सर्विस पिस्टल निकालकर दी। दरोगा ने वहीं खड़े-खड़े पिस्टल को चेक किया। इस बीच अचानक गोली चल गई, जो इशरत निगार के सिर में जा लगी और वह जख्मी हो गई। उपचार के दौरान बुधवार देर रात उसने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। पुलिस ने उसके बेटे की तहरीर पर पहले हमले और बाद में हत्या व साजिश का मुकदमा दर्ज किया। उसी मुकदमे में गाजियाबाद निवासी दरोगा की लगातार तलाश जारी थी। उसके गैर जमानती वारंट जारी हुए और बाद में बीस हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ। अब पुलिस कुर्की की तैयारी में थी। मगर शनिवार दोपहर में दरोगा को गिरफ्तार कर लिया गया। जैसे ही यह खबर मिली कि दरोगा कार से अलीगढ़ आ रहा है। तभी पुलिस टीमें सक्रिय हो गईं और सारसौल पहुंचते-पहुंचते उसे दबोच लिया गया। जिला मुख्यालय लाकर गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी की गईं और दो घंटे तक दरोगा से पूछताछ की गई। इसके बाद सीजेएम न्यायालय में पेश किया गया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में लेकर उसे जेल भेज दिया गया।

महिला के बेटे ने कहा कि मिल रहा न्याय

मृत महिला के बेटे ईशान ने कहा कि दरोगा की गिरफ्तारी की खबर पुलिस ने वीडियो भेजकर दी है। उन्हें लगातार न्याय मिल रहा है। आगे भी उम्मीद है। अब यह देखा जाएगा कि किस तरह लिखा पढ़ी की है। उसी अनुसार पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
सीसीटीवी में घटना

सपा प्रतिनिधि मंडल पहुंचा महिला के घर
इस घटना की जांच के लिए सपा का जांच दल परिवार से मिलने घर पहुंचा। इस दौरान परिवार से वार्ता की और तमाम जानकारियां लीं। अब यह दल अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को देगा। इस जांच दल में शामिल नेताओं ने बताया कि परिवार से बात हुई है। जो भी उनकी मांग या समस्याएं हैं, उन्हें उठाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व विधायक जफर आलम, पूर्व सांसद चौ.बिजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, पूर्व महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक, महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोषी, जिला महासचिव मनोज यादव, शहर विधानसभा अध्यक्ष मो.साजिद शामिल रहे।

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