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अतीत का अलीगढ़ 18: 1856 में पहली बार गृहकर लगाया गया था अलीगढ़ में, एक पैकेट भेजने में लगता था दो पैसे

Tue, 26 Dec 2023 09:15 PM IST
चमन शर्मा कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़
कुमार अतुल, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 26 Dec 2023 09:15 PM IST
सार

राज्य सरकार ने एक शासनादेश के जरिए प्रदेश के सभी जिलों के लिए नया जिला गजेटियर तैयार करने का आदेश दिया है। उसके लिए कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अलीगढ़ का अंतिम गजेटियर 1909 में तैयार किया गया था। लगभग 400 पेजों की इस पुस्तक में लगभग 114 साल पुराने अलीगढ़ के भूगोल, नदियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सिंचाई व ड्रेनेज सिस्टम, पुलिस व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से वर्णन है। इस संबंध में अतीत का अलीगढ़ नाम से एक समाचार श्रृंखला शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि पुराने अलीगढ़ के बारे में जानकारी पाठकों को रुचिकर लगेगी। कृपया अपनी राय से हमें अवगत कराएं।

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House tax was imposed for the first time in Aligarh in 1856
अतीत का अलीगढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज भी अलीगढ़ शहर के बाशिंदों और नगर निगम में गृहकर को लेकर रस्साकशी चल रही है। निगम सौ फीसदी लोगों से गृहकर की वसूली नहीं कर पा रहा है। अंग्रेजी शासन काल में स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से स्वायत्त बनाने के कदम उठाए गए थे। चुंगी अर्थात स्थानीय निकाय की सीमा में सामान समेत प्रवेश करने पर लिया जाने वाला महसूल ही सर्वप्रथम आय का प्रमुख स्रोत था। वसूली का लक्ष्य पूरा किया जाता था। कोल क्षेत्र में 1805-1810 में चुंगी और  आंतरिक आयात शुल्क से होने वाली सालाना आमदनी 6000 रुपये थी। 1836 में यह आय दोगुनी होकर12500 रुपये सालाना तक पहुंच गई थी। आंतरिक आयात शुल्क को 1836 में खत्म कर दिया गया था।

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1882 में हरदुआगंज से टाऊन एरिया का दर्जा छिना था
कर संग्रहण के पहले दशक में अकेले कोल (अलीगढ़) में विकास कार्यों पर 30000 रुपये खर्च किए गए। गृहकर की जगह शुरुआती दौर में टाऊन टैक्स वसूला जाता था। यह राशि मोहल्लों के विकास में खर्च की जाती थी। इसे 1856 ईस्वी में 20वें अधिनियम द्वारा लगाया गया था।  इसे कोल (अलीगढ़) और हाथरस में तो इसी साल लागू किया गया था। 1 जनवरी 1856 को कोल, हाथरस, अतरौली, सिकंदराराऊ और हरदुआगंज को पालिका का दर्जा मिला। लेकिन सितंबर 1882 में हरदुआगंज से पालिका का दर्जा वापस ले लिया गया था। जिले के ज्यादातर क्षेत्रों का प्रशासन 1856 में पारित 20वें अधिनियम द्वारा किया जाता था। यह अधिनियम 1860 में अतरौली, सिकंदराराऊ और हरदुआगंज में लागू किया गया था।
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इसके बाद इसे टप्पल, खैर, मुरसान, सासनी और मेंडू इसमें जोड़े गए। बाद में इसका विस्तार पिलखना, कौड़ियागंज, पुरदिलनगर, विजयगढ़, जलाली, कछौरा, दतौली, हसायन, छर्रा-रफतपुर, और गंगीरी में किया गया। लेकिन 1902 में दरयाबपुर  और 1909 में दतौली, गंगीरी और जट्टारी को इस अधिनियम की जद से बाहर कर दिया गया था। उस वक्त टाऊन की संख्या 15 थी। 1860 और 1867 के दौरान दादों, बरौली, चंडौस, इगलास, सोमना और अकराबाद में भी गृहकर लगाए गए मगर इन क्षेत्रों की तात्कालिक गरीबी को देखते हुए 1882 से 1895 के मध्य गृहकर को समाप्त कर दिया गया था।
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अंग्रेजों ने गांवों की सफाई पर भी दिया था ध्यान, 1892 में लागू कियाग्रामीण स्वच्छता अधिनियम
आज भी कई गांवों में साफ-सफाई न होने की शिकायत मिलती है। अंग्रेजों ने गांवों की साफ-सफाई पर खास तवज्जो दी थी। 1892 में अंग्रेज ग्रामीण स्वच्छता अधिनियम लाए थे। इसे पूरे जिले में लागू किया गया था। जिले के सभी टाऊन एरिया क्षेत्रों में संग्रह किए गए कर और गृहकरों का आवंटन रोड एंड फेरी फंड कमेटी, दवाखाना कमेटी और स्कूल कमेटियों के मध्य होता था। 1871 में सभी कमेटियों का विलय जिला कमेटी में कर दिया गया।

1884 में गठित किया गया था जिला परिषद

डिस्ट्रिक बोर्ड अथवा जिला परिषद का पहली बार गठन 1884 ईस्वी में किया गया था। बोर्ड सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। बाद में 1906 में एक अधिनियम लाकर इसके स्वरूप में परिवर्तन किया गया। शुरुआती दौर में जिला परिषद में सदस्यों की संख्या 25 थी। इसमें मजिस्ट्रेट अध्यक्षता करता था। छह उपसंभागीय अधिकारी, तीन तहसीलों से तीन-तीन साल के लिए चुने सदस्य शामिल थे। बोर्ड के मुख्य कार्यों में सड़कों,घाटों, स्कूलों, दवाखानों, मवेशी तालाबों, टीकाकरण आदि की व्यवस्था और संचालन था।

एक पैकेट भेजने के लिए लगता था दो पैसे, 1872 में 15 इंपीरियल और 14 जिला पोस्ट आफिस थे जिले में
शुरुआती दौर में अलीगढ़ में डाक सेवाएं कुछ ही शहरों के लिए सीमित थीं। जिले के भीतर तहसीलों और टाऊन एरिया क्षेत्रों में कोई आंतरिक डाक सेवा नहीं थी। अलीगढ़ से जिन जिलों तक डाक सेवाएं थीं उनमें अलीगढ़-दिल्ली, अलीगढ़-मेरठ, अलीगढ़-मुरादाबाद, अलीगढ़-बरेली, अलीगढ़-आगरा और अलीगढ़-इलाहाबाद शामिल थे। जिले में आंतरिक डाक व्यवस्था पुलिस के जिम्मे थी। किसी प्रकार का संदेश आने-ले जाने में पुलिस कर्मियों का उपयोग किया जाता था। स्वाभाविक है कि इस तरह के संदेशों में ज्यादातर प्रशासनिक ही होते थे।

आम लोग निजी तौर पर ही संदेशों का आदान-प्रदान किया करते थे। अलीगढ़ में 1846 में आम जनता के लिए पहला पोस्ट आफिस खोला गया। एक पैकेट सामान भेजने के लिए दो पैसे लिए जाते थे। 1866 में इंपीरियल पोस्ट ऑफिस का तेजी से विस्तार किया गया। इस वक्त तक दो प्रकार के पोस्ट आफिस स्थापित किए गए। विदेश , अन्य जिलों से आई डाकों के आदान-प्रदान के लिए इंपीरियल और आंतरिक डाक के लिए जिला पोस्ट आफिस खोले गए। 1872 तक जिले में 15 इंपीरियल और 14 जिला पोस्ट आफिस स्थापित किए गए थे।
जारी... 
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)

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