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हिंदी दिवसः भारतीय संस्कृति की आत्मा है हिंदी
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मदर्स टच सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी दिवस पर बच्चों ने बनाई पेंटिंग।
- फोटो : CITY OFFICE
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हिंदी दिवस पर शैक्षणिक संस्थाओं में विचार गोष्ठी, भाषण प्रतियोगिता हुई। कविता वाचन कार्यक्रम आयोजित हुए। वक्ताओं नेे कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हिंदी है।
कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी दिवस मनाया गया। शुभारंभ प्रबंध निदेशक प्रवीण अग्रवाल व प्रधानाचार्या नंदिनी सिंह अग्रवाल ने किया। हिंदी विभागाध्यक्ष एमएस शर्मा ने कविता पाठ किया। शिक्षिका गौरा पांडेय, रेखा गोयल, मोनिका गर्ग, पूजा राठी ने विचार व्यक्त किए।
एसके इंटर कॉलेज भुजपुरा में स्कूल संचालक बाबा फरीद आजाद ने हिंदी दिवस पर कहा कि दैनिक व्यवहार में हिंदी का उपयोग करना होगा, तभी राज भाषा हिंदी का हक अदा कर सकते हैं। इस अवसर पर मजहर उद्दीन, हसीन, मुस्तकीम, इमरान, सलमान, हाजरा बेगम आदि मौजूद रहे।
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जीडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रधानाचार्या डॉ. पायल सिंह ने हिंदी दिवस पर कहा कि अब हिंदी राज भाषा की गंगा से विश्व भाषा का महासागर बन रही है। भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि भारद्वाज प्रथम, झलक शर्मा द्वितीय और व तृतीय स्थान पर सक्षम रहे। जूनियर वर्ग में निश्चय वार्ष्णेय प्रथम, दक्ष अग्रवाल द्वितीय व रियांशी सिंह तृतीय स्थान पर रहे। संचालन शिक्षिका रेखा मोहन ने किया। निर्णायक मुशाहिद अहमद व कलीम अहमद रहे।
एसएसडी इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस पर भाषण प्रतियोगिता हुई। प्रबंधक पवन शर्मा ने विद्यार्थियों को हिंदी के महत्व को बताया। प्रधानाचार्या अलका अग्रवाल ने कविता प्रस्तुत की। यहां प्रधानाध्यापिका शालू वर्मा, आशीष, आदर्श, सनी, दीनदयाल, कमल सिंह, प्रिंस, श्रद्धा, सपना, काजल, रितु, वंदना, ज्योति आदि मौजूद रहे।
लाल बहादुर शास्त्री कन्या महाविद्यालय में हिंदी की दिशा और दशा विषय पर गोष्ठी हुई। प्राचार्या डॉ. आभा कृष्ण जौहरी, केपी सोसाइटी के सदस्य राज सक्सेना, ज्योति माथुर, डॉ. मीनाक्षी कुदेशिया, ज्योति कमठानिया ने विचार व्यक्त किए।
पीएम कॉलेज ऑफ एजूकेशन में ऑनलाइन वाद विवाद प्रतियोगिता हुई। शुभारंभ प्राचार्या डॉ. बिनीता प्रकाश ने किया। संस्थापक अजीत सिंह तोमर ने हिंदी भाषा को आत्मनिर्भर भारत का सबसे सशक्त हथियार बताया। इस अवसर पर मीना तोमर, निशा राघव, जमील अशरफ , डॉ. लोकेंद्र सिंह, डॉ. निम्मी सिंह, कल्पना रानी, रंजना वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
हिंदी दिवस पर मोहकमपुर गांव में वीर फातिमा समूह की बैठक हुई। अध्यक्षता शाजिया ने की। समूह की उपाध्यक्ष ने बच्चों को रोजाना एक घंटा पढ़ाने के लिए जिम्मेदारी ली। बैठक में निशा, शिवानी, मुस्कान, सानिया, नसरीन, करिश्मा, शबनम, बीना, निशा, नगमा, रोहित सोलंकी आदि मौजूद रहे। सरस्वती विद्या मंदिर में हिंदी दिवस मनाया गया। यहां प्रधानाचार्या डॉ. सूर्य प्रकाश, मदन मोहन, गोपाल स्वरूप पचौरी, दिनेश सिंह, विशन स्वरूप, चंद्र प्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
सहज, उदात्त प्रकृति ही हिंदी को जीवंतता प्रदान करती है : प्रो. मिश्र
एएमयू व राजभाषा कार्यान्वयन समिति े संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस पर ऑनलाइन कार्यक्रम हुआ।
अध्यक्षता राज भाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने की। लखनऊ विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रो. हरिशंकर मिश्र ने ‘आजादी के 75 वर्ष हिंदी का यथार्थ और उसकी चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी को भावात्मक एकता के साधन के रूप में माना गया है। उन्होंने कहा कि हिंदी की सहज, उदात्त प्रकृति उसे जीवंतता प्रदान करती है। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कई यूरोपीय भाषाओं की तुलना में हिंदी भाषा का परिवार कहीं अधिक बड़ा और विशाल है। राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सचिव व एएमयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद ने हिंदी की मौलिकता और रचनात्मकता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। संचालन प्रो. शंभूनाथ तिवारी ने किया।
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कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में हिंदी दिवस मनाया गया। शुभारंभ प्रबंध निदेशक प्रवीण अग्रवाल व प्रधानाचार्या नंदिनी सिंह अग्रवाल ने किया। हिंदी विभागाध्यक्ष एमएस शर्मा ने कविता पाठ किया। शिक्षिका गौरा पांडेय, रेखा गोयल, मोनिका गर्ग, पूजा राठी ने विचार व्यक्त किए।
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एसके इंटर कॉलेज भुजपुरा में स्कूल संचालक बाबा फरीद आजाद ने हिंदी दिवस पर कहा कि दैनिक व्यवहार में हिंदी का उपयोग करना होगा, तभी राज भाषा हिंदी का हक अदा कर सकते हैं। इस अवसर पर मजहर उद्दीन, हसीन, मुस्तकीम, इमरान, सलमान, हाजरा बेगम आदि मौजूद रहे।
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जीडी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रधानाचार्या डॉ. पायल सिंह ने हिंदी दिवस पर कहा कि अब हिंदी राज भाषा की गंगा से विश्व भाषा का महासागर बन रही है। भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि भारद्वाज प्रथम, झलक शर्मा द्वितीय और व तृतीय स्थान पर सक्षम रहे। जूनियर वर्ग में निश्चय वार्ष्णेय प्रथम, दक्ष अग्रवाल द्वितीय व रियांशी सिंह तृतीय स्थान पर रहे। संचालन शिक्षिका रेखा मोहन ने किया। निर्णायक मुशाहिद अहमद व कलीम अहमद रहे।
एसएसडी इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस पर भाषण प्रतियोगिता हुई। प्रबंधक पवन शर्मा ने विद्यार्थियों को हिंदी के महत्व को बताया। प्रधानाचार्या अलका अग्रवाल ने कविता प्रस्तुत की। यहां प्रधानाध्यापिका शालू वर्मा, आशीष, आदर्श, सनी, दीनदयाल, कमल सिंह, प्रिंस, श्रद्धा, सपना, काजल, रितु, वंदना, ज्योति आदि मौजूद रहे।
लाल बहादुर शास्त्री कन्या महाविद्यालय में हिंदी की दिशा और दशा विषय पर गोष्ठी हुई। प्राचार्या डॉ. आभा कृष्ण जौहरी, केपी सोसाइटी के सदस्य राज सक्सेना, ज्योति माथुर, डॉ. मीनाक्षी कुदेशिया, ज्योति कमठानिया ने विचार व्यक्त किए।
पीएम कॉलेज ऑफ एजूकेशन में ऑनलाइन वाद विवाद प्रतियोगिता हुई। शुभारंभ प्राचार्या डॉ. बिनीता प्रकाश ने किया। संस्थापक अजीत सिंह तोमर ने हिंदी भाषा को आत्मनिर्भर भारत का सबसे सशक्त हथियार बताया। इस अवसर पर मीना तोमर, निशा राघव, जमील अशरफ , डॉ. लोकेंद्र सिंह, डॉ. निम्मी सिंह, कल्पना रानी, रंजना वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
हिंदी दिवस पर मोहकमपुर गांव में वीर फातिमा समूह की बैठक हुई। अध्यक्षता शाजिया ने की। समूह की उपाध्यक्ष ने बच्चों को रोजाना एक घंटा पढ़ाने के लिए जिम्मेदारी ली। बैठक में निशा, शिवानी, मुस्कान, सानिया, नसरीन, करिश्मा, शबनम, बीना, निशा, नगमा, रोहित सोलंकी आदि मौजूद रहे। सरस्वती विद्या मंदिर में हिंदी दिवस मनाया गया। यहां प्रधानाचार्या डॉ. सूर्य प्रकाश, मदन मोहन, गोपाल स्वरूप पचौरी, दिनेश सिंह, विशन स्वरूप, चंद्र प्रकाश पांडेय आदि मौजूद रहे।
सहज, उदात्त प्रकृति ही हिंदी को जीवंतता प्रदान करती है : प्रो. मिश्र
एएमयू व राजभाषा कार्यान्वयन समिति े संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस पर ऑनलाइन कार्यक्रम हुआ।
अध्यक्षता राज भाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने की। लखनऊ विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रो. हरिशंकर मिश्र ने ‘आजादी के 75 वर्ष हिंदी का यथार्थ और उसकी चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी को भावात्मक एकता के साधन के रूप में माना गया है। उन्होंने कहा कि हिंदी की सहज, उदात्त प्रकृति उसे जीवंतता प्रदान करती है। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कई यूरोपीय भाषाओं की तुलना में हिंदी भाषा का परिवार कहीं अधिक बड़ा और विशाल है। राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सचिव व एएमयू हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद ने हिंदी की मौलिकता और रचनात्मकता पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकृष्ट किया। संचालन प्रो. शंभूनाथ तिवारी ने किया।