हाथरस के कृतार्थ हत्याकांड में हुए नए खुलासे में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से अहम साक्ष्य मिलने का दावा किया है, लेकिन वह अपडेट नहीं था और पांच दिन पुरानी तारीख दिखा रहा था। जिस अंगोछे ये हत्या किए जाने की बात कही गई है, वह आरोपी के हाथ में दिखा है।
घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरे के तार टूटे हुए थे, इसकी डीवीआर पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजी थी। वहां इसकी जांच की गई। इसमें पाया गया कि सीसीटीवी में 17 सितंबर की तारीख दिख रही है, जो घटना वाले दिन से पांच दिन पुरानी है।
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
समय में बदलाव दिख रहा है। वास्तविक दिनांक 23 सितंबर है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि ऐसा तकनीकी कमी के कारण हो सकता है। कैमरा नंबर तीन की फुटेज में 2.58 बजे जसोदन सिंह, प्रिसिंपल लक्ष्मण सिंह और शिक्षक राजेंद्र सिंह बच्चों के साथ भूतल की गैलरी में दिख रहे हैं। मृतक बच्चा कृतार्थ तख्त पर लेटा हुआ दिख रहा है। तीन बजे दो व्यक्ति बच्चे को ले जाते हुए दिख रहे हैं।
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कैमरे में अंगोछा फेंकते हुए दिखा आरोपी
आरोप पत्र में आरोपी बाल अपचारी के बयान में कृतार्थ के जमीन पर सोने की बात है। फिर उसे तख्त पर किसने लिटाया, यहां यह भी सवाल उठ रहा है। कैमरा नंबर चार में बच्चे को गेट की तरफ ले जाया जा रहा है। बाल अपचारी ने बताया कि ब्लैक टी शर्ट में वह स्वयं है, इसी कैमरे में वह अंगोछा फेंकते हुए दिख रहा है। फिर उसे उठाकर लाते हुए और हाथ में लपेटते हुए दिख रहा है।
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हत्याकांड का खुलासा
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नंबर बढ़ाने का खेल... जल्दबाजी में आरोपी भेज दिए थे जेल
हाथरस में कक्षा के मासूम छात्र की हत्या में पुलिस ने आनन-फानन आरोपी जेल भी भेज दिए। अब तीन माह बाद फिर से एक नया खुलासा हुआ और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सवाल उठते रहे, पुलिस जवाब देने से बचती रही, फिर खुद की ही पहली जांच को गलत ठहरा दिया। क्या यह सब एक विवेचक ने कर दिया, सवाल तो अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं।
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Hathras Murder
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कक्षा आठ का छात्र निकला आरोपी
तंत्र-मंत्र को हत्या की वजह बताते हुए पुलिस ने खुलासा किया था। स्कूल के प्रबंधक, उसके पिता, प्रिसिंपल और दो अध्यापकों को जेल भी भेज दिया। वह तब से ही जेल में है। तीन माह बाद जब चार्जशीट दाखिल की तो आरोपी कक्षा आठ का छात्र निकला। इतना ही नहीं तीन माह पहले पुलिस ने जो कहानी बनाई थी, उसे भी पूरी तरह से झूठा ठहरा दिया। जिन साक्ष्यों के आधार कक्षा आठवीं के छात्र को आरोपी बनाया गया, वह तथ्य तो पहले भी सामने आए थे। डीवीआर भी तभी जांच के लिए भेज दी गई थी।