फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Global Investors Summit in Aligarh

Aligarh: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से नहीं हुआ भला, ताला अपने ही दम पर चला, एक भी बड़ी इकाई नहीं हुई स्थापित

Fri, 13 Dec 2024 10:57 AM IST
चमन शर्मा आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 13 Dec 2024 10:57 AM IST
सार

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अलीगढ़ में ऐसी एक भी बड़ी इकाई स्थापित नहीं हुई, जिससे इस कारोबार को चार चांद लगते, उत्पादन और कमाई बढ़ती। हां, इसमें कुछ इकाइयों का विस्तार जरूर हुआ है।

विज्ञापन
Global Investors Summit in Aligarh
रावण टीला स्थित ताले की फैक्ट्री में ताले की पेकिंग करते कर्मचारी - फोटो : संवाद

विस्तार

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से अलीगढ़ के ताला उद्योग को कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ है। यह कुटीर उद्योग अपने ही दम पर आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में यह उद्योग 1500 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर पर पहुंच रहा है। हर साल लगभग 70 करोड़ रुपये के ताले विदेशों में निर्यात हो रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अलीगढ़ में ऐसी एक भी बड़ी इकाई स्थापित नहीं हुई, जिससे इस कारोबार को चार चांद लगते, उत्पादन और कमाई बढ़ती। हां, इसमें कुछ इकाइयों का विस्तार जरूर हुआ है।

विज्ञापन


अब थोड़ा पीछे चलिए..। वर्ष 2016 में नोटबंदी और उसके बाद वर्ष 2019 में कोरोना काल के दौरान हुए लॉकडाउन का इस कारोबार पर गहरा असर पड़ा। कई छोटी और बड़ी इकाइयों में उत्पादन बंद हो गया था। इन दो बड़ी चुनौतियों से ताला कारोबार जैसे-तैसे उबर सका। अब महंगाई और इसकी वजह से मांग में आई कमी परेशान कर रही है। राजकोट और मोदीनगर में ताला उत्पादन बढ़ा है तो चीन, ताइवान और कोरिया से आ रहे ताले भी अलीगढ़ के ताले को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कच्चे माल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव भी कारोबारियों को सिरदर्द दे रहा है। फिलहाल ताला उद्योग अपनी ही दम पर सभी चुनौतियों से जूझते हुए आगे बढ़ रहा है। यह हाल तब है, जब अलीगढ़ का ताला ओडीओपी में शामिल है।
विज्ञापन


मुगलकाल से बन रहा ताला, अंग्रेजों ने बनाई थी मेटल वर्कशॉप
अलीगढ़ में ताला कब बनना शुरू हुआ, इसका कोई सटीक प्रमाण नहीं है, लेकिन मुगलकाल से इसकी शुरुआत मानी जाती है। अंग्रेजी हुकूमत ने इसको व्यवस्थित किया। सन 1870 में जॉनसन एंड कंपनी ने इंग्लैंड से अच्छे ताले लाकर यहां बेचना शुरू किया था। उस वक्त यहां का हाथ का बना ताला देखने में कम अच्छा होता था। इसके बाद विदेशी तालों को देख कर यहां के तालों का रूप बदला। जब काम बढ़ा तो अंग्रेजों ने 1926 में यहां पहली मेटल वर्कशॉप खोली। अंग्रेजी गजेटियर आगरा-अवध के अनुसार 20वीं सदी की शुरुआत में अलीगढ़ में सालाना पांच लाख ताले बनते थे। जिसकी कीमत लगभग 2.76 लाख रुपये थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

दो वर्ष में ताले का निर्यात

  • वर्ष 2022-23 में 61 करोड़
  • वर्ष 2023-24 में 70 करोड़

ताला उद्योग

  • 6500 इकाइयों में हो रहा ताला का निर्माण
  • 1,50000 लोग इस कारोबार से जुड़े हैं
  • 1500 करोड़ का स्वदेशी और निर्यात कारोबार

इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने वाली यूनिटें

  • 2018 में 167 ने भाग लिया
  • 2022 में 490 ने भाग लिया

उद्यमी बोले- किसी भी बड़ी समस्या का नहीं हो रहा समाधान

इन्वेस्टर्स समिट से अलीगढ़ के ताला कारोबार को कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं मिला है। अधिकतर इकाइयों ने अपग्रेडेशन किया है, लेकिन अगर आप सीधे-सीधे रुपयों के टर्नओवर में देखेंगे तो बात बहुत आगे बढ़ती नहीं दिखती है। क्योंकि महंगाई, कच्चे माल की किल्लत, मजदूरों की कमी और मशीनरी का अपग्रेडेशन इस कारोबार की बड़ी परेशानी है। जब तक इनका समाधान नहीं होता, तब तक बहुत ज्यादा बढ़त नहीं मिल सकती है।-विजय बजाज, औद्योगिक आस्थान निर्माता विकास समिति, आईटीआई रोड।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से सूक्ष्म और मध्यम उद्योग को कोई सब्सिडी तो मिली नहीं हैं। यह समिट केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए है। ताला उद्योग हैंडीक्राफ्ट है, इसकी कीमत कम होती है। इसलिए कारीगर को कम पैसा मिलता है। जो कारीगर काम कर रहे थे, अब उनके बच्चे इस काम में नहीं आ रहे हैं। इसलिए कारीगरों की कमी है। ऑटोमेशन के लिए कई नई मशीनें चाहिए, जिनकी लागत बहुत ज्यादा है। सरकारी योजनाओं में इसके लिए महज ढाई लाख रुपये मिलते हैं। यह भी बड़ी समस्या है।-सुनील दत्ता, महामंत्री तालानगरी औद्योगिक विकास एसोसिएशन।
अलीगढ़ में 5 से 50 रुपये तक का ताला बनता है। सरकार को इसमें 18 फीसदी की जीएसटी मिलती है, लेकिन इतना बड़ा टैक्स लेने के बाद सुविधाएं नहीं मिलती हैं। अगर कोई गलियों में अपनी इकाई चला रहा है तो वह तमाम तरह की जांच और कार्रवाई से बच जाता है। वहीं, अगर कोई फैक्टरी चल रही है तो उस पर लगातार कार्रवाई का शिकंजा कसा रहता है।-मुकेश लिम्का, सासनीगेट औद्योगिक वेलफेयर संस्थान।
मुंबई, राजकोट और कुछ दक्षिण भारतीय शहरों में ताला उत्पादन बढ़ा है। दूसरा महंगाई का असर है, जिससे मांग कुछ सीमित हुई है। ताला कोई फैशनेबल आइटम नहीं है, जिसे बार-बार बदला जाए। इससे स्थानीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मांग पर कुछ असर पड़ा है, इस वक्त मांग कुछ कम है।-अंबरीश गर्ग, लॉक्स एंड हार्डवेयर ट्रेडर्स एसोसिएशन।

अब ताला उद्योग में काम करना मुश्किल है। लगभग छह महीने पहले ही लोहे की कीमत 72 से 75 रुपये किलो थी, जो 11 दिसंबर को 50 से 52 रुपये किलो तक है। धातुओं के दाम में बहुत उतार चढ़ाव हो रहा है। इससे माल बना कर रखना बहुत रिस्की हो गया है। अगर सरकार इसका हल निकाले तभी बात बन सकती है। हम लगातार मेटल बैंक बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।-चंद्रशेखर शर्मा, पूर्व अध्यक्ष अलीगढ़ लॉक्स मेन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से ताला उद्योग को कोई सीधा लाभ नहीं मिला। हां, कुछ इकाइयां अपने पुराने स्थान से नए स्थान पर जरूर आ गई हैं। इससे उत्पादन नहीं बढ़ा है, उत्पादन वही है। अभी तक इंस्पेक्टर राज खत्म नहीं हुआ है। मसलन, अगर किसी फैक्टरी में निकिल पॉलिश हो रही है और अगर उसमें ईटीपी प्लांट लगा है तो उसका थर्ड पार्टी निरीक्षण कराने में ही लाखों रुपये तक खर्च होते हैं। ऐसे हालात में कारोबार कैसे बढ़ पाएगा।-राजीव अग्रवाल, प्लस प्वाइंट।
मेरी प्रतिस्पर्धा अगर जर्मनी की किसी ताला कंपनी से हो रही है तो वो 850 करोड़ रुपये का निवेश कर सिंगल विंडो की सुविधा लेती है। उस विदेशी कंपनी की फैक्टरी पांच से छह महीने में चालू हो जाती है। हम इतना निवेश एक साथ नहीं कर सकते, इसलिए हमें आईटीआई औद्योगिक आस्थान से छेरत औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्ट करने में ही डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त लग गया है। इन्वेस्टर्स समिट से यकीनन फायदा तो हुआ लेकिन जितना फायदा स्थानीय कंपनियों को मिलना चाहिए उतना नहीं मिला।-मो. अली, लिंक लॉक्स
वर्तमान में ताला उद्योग में मजदूरों और कामगारों की किल्लत है, जिससे मनचाहा उत्पादन नहीं हो रहा है। नई पीढ़ी इस काम में नहीं आ रही है। जब ऑर्डर होता है तो माल नहीं बन पाता है। इससे खरीदने वाले राजकोट और मोदी नगर से माल ले लेते हैं। इसका समाधान होना चाहिए।-रिषभ अग्रवाल, रावणटीला।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed