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गणेश चतुर्थी : राजस्थानी कला से निखरती हैं गजानन की प्रतिमाएं

Thu, 25 Aug 2022 01:48 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 01:48 AM IST
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Ganesh Chaturthi: Statue of Gajanan shines from the art of Rajasthan
गणेश महोत्सव की तैयारियों को लेकर आगरा रोड पर गणेश जी की मूर्ति तैयार करते कारीगर। - फोटो : CITY OFFICE
जन्माष्टमी पर्व की धूम खत्म होते ही शहर को गणेश चतुर्थी के रंग में सराबोर करने की तैयारी है । इन दिनों राजस्थान से आए मूर्तिकार भगवान गणेश की प्रतिमाएं बना रहे हैं। ज्यादातर प्रतिमा इको फ्रेंडली हैं जो पर्यावरण को भी सुरक्षित रखेंगी तो वही भगवान श्री गणेश जी शहर वासियों को पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश देते हुए नजर आएंगे। भगवान श्री गणेश की मूर्ति बनाते वक्त मूर्तिकार भी श्रद्धालुओं की आस्था का पूरा ध्यान रख रहे हैं। पिछले दो साल से कोरोना के चलते यह महोत्सव धूमधाम से नहीं मनाया गया था। शहर में आगरा रोड, रामघाट रोड, जीटी रोड एवं सारसौल के निकट भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की जा रही हैं।
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राजस्थान के कलाकार प्रतिमाओं में अपनी कला के रंग भर रहे हैं। इस बार 15 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। बड़ी प्रतिमाएं देखी जा रहीं हैं। आगरा रोड स्थित रूसा हॉस्पिटल के निकट राजस्थान के कलाकार चेतराम ने बताया कि इस बार 15 फीट ऊंची प्रतिमाओं की मांग है। पूरा परिवार दिन-रात प्रतिमा को बनाने में जुटा हुआ है गणपति बप्पा के नैन नक्श पर जहां ध्यान दिया जा रहा है वहीं पर उनके आसन को भी खास बनाया जा रहा है, जिस पर भगवान गणेश विराजमान होंगे। इस बार छोटी प्रतिमाओं की भी मांग है, क्योंकि घर- घर लोग अब भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने लगे हैं। जिले में बन रही प्रतिमाएं अन्य जिलों में भी जाती हैं। हाथरस, मथुरा, एटा, बुलंदशहर जिलों में भी प्रतिमाएं अलीगढ़ से जाती हैं।
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गणेश मंदिर से हुई थी शुरुआत
गणेश उत्सव की धूम सबसे अधिक मुंबई में रहती है। मगर अब धीरे- धीरे शहर में भी गणेश महोत्सव धूमधाम से मनाया जाने लगा है। गणेश महोत्सव की शुरुआत अचल ताल स्थित गणेश मंदिर से हुई थी। करीब 50 साल पहले मंदिर के महंत मुंबई से एक छोटी भगवान गणेश की प्रतिमा लेकर आए थे, उसके बाद से अचल ताल स्थित गणेश मंदिर में गणेश उत्सव की शुरुआत हुई। पहली बार उन्होंने बैलगाड़ी से शोभायात्रा निकाली थी ।भगवान गणेश की छोटी सी प्रतिमा को स्वयं गोद में लेकर उन्होंने भ्रमण किया था। हालांकि तमाम लोग इस परंपरा से अनजान थे। 10 वर्षों में पूरे जिले में जिस प्रकार से गणेश महोत्सव मनाया जाने लगा है । शहर के सर्राफा बाजार में महाराष्ट्र के कारीगर रहते हैं वह भी गणेश महोत्सव को धूमधाम से मनाते हैं।
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झूम उठता है शहर
जीटी रोड स्थित शहर के प्रसिद्ध श्री वार्ष्णेय मंदिर में भी गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। भव्यता से भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। टीकाराम मंदिर में भी गणेश महोत्सव विगत वर्षों में मनाया जाता रहा है। यहां मथुरा, आगरा और दिल्ली के कलाकारों को बुलाया जाता रहा है। अब शहर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कराने के लिए शहर में पांडाल भी सजाए जाने लगे हैं। घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएंगी।

शुभ महुर्त
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि विघ्नों के हरने वाले देवता प्रथम पूज्य पार्वतीपुत्र, शिवपुत्र, गजानन श्री गणेश की आराधना जो भक्त करता है, उसको आने वाले विघ्नों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भाद्रपद चतुर्दशी तक (दस दिन) अर्थात गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेशजी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है।
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