Aligarh: बंदूकों से दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले जवान उठा रहे हल, आलू के बाजार पाक-चीन को दे रहे शिकस्त
विदेशों में एक्सपोर्ट किए जाने वाले आलू का साइज बड़ा होता है। इसका वजन लगभग 250 ग्राम होता है। सामान्य तौर पर एक क्विंटल में ऐसा 25 किलो आलू ही निकल पाता है। इसको चुन कर ही बोरों में पैक किया जाता है।
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देश की सीमाओं पर बंदूकों से दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले जवान अब हल उठा कर बेहतरीन आलू पैदा कर रहे हैं। यही नहीं बड़े पैमाने पर इसका एक्सपोर्ट कर पाकिस्तान व चीन को शिकस्त भी दे रहे हैं।
गोंडा ब्लॉक के करीब 600 किसान आलू की बड़ी पैदावार कर रहे हैं। इसमें सर्वाधिक संख्या पूर्व सैनिकों की है। इन्हीं पूर्व सैनिकों ने बहरीन को 60 टन आलू एक्सपोर्ट किया है। ये आलू वहां बहुत पसंद किया गया और वहां के बड़े खरीदारों ने पाकिस्तान और चीन से भेजे जाने वाले आलू को नकार दिया। अब उन्हें अलीगढ़ का आलू पसंद आ रहा है, क्योंकि यह स्वाद में बेेमिसाल और साइज में बेहतरीन है।
इससे पहले इन्हीं किसानों ने दक्षिण अमेरिका के गुयाना को 60 टन आलू भेजा था। इन किसानों का नेतृत्व कोमलिका एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) कर रही है। जिसके संचालक सेवानिवृत्त कैप्टन आरपी पचौरी हैं। वह सेना की सिग्नल कोर में 33 वर्ष तैनात रहे हैं। कारगिल युद्ध में उन्होंने लद्दाख सेक्टर में दुश्मन से मुकाबले में अपना अहम योगदान दिया था। वे कहते हैं कि असलहा हो या आलू, पाकिस्तान और चीन को टक्कर देने का मजा कुछ और ही है। इससे जोश बढ़ता है। गोंडा ब्लॉक के 50 से अधिक सेवानिृवत्त सैन्य कर्मी इस काम में उनके साथ हैं।
ऐसे चुना जाता है एक्सपोर्ट का बेहतरीन आलू
विदेशों में एक्सपोर्ट किए जाने वाले आलू का साइज बड़ा होता है। इसका वजन लगभग 250 ग्राम होता है। सामान्य तौर पर एक क्विंटल में ऐसा 25 किलो आलू ही निकल पाता है। इसको चुन कर ही बोरों में पैक किया जाता है।
14.95 करोड़ का प्रसंस्करित आलू गया कई देशों में
वर्ष 2024 में लगभग 10.83 टन प्रसंस्करित आलू मलयेशिया, इंडोनेशिया, दुबई, कुवैत, इस्राइल, उरग्वे और बांग्लादेश भेजा गया है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 14.95 करोड़ रुपये है। यह एक्सपोर्ट अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल की कंपनी ने किया है।
आगरा में हुई बैठक में जुटे 2200 एफपीओ, किसानों को मॉडल से बताएंगे खेती के तरीके
21 जनवरी को आगरा के एमजी रोड स्थित एक होटल होली डे इन में भारत एफपीओ कांफिग्रेशन की बैठक हुई। इसमें पूरे देश के 22 प्रदेशों में संचालित 2200 एफपीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस संगठन के मैनेजिंग डायरेक्टर अलीगढ़ निवासी रिटायर्ड कैप्टन आरपी पचौरी ही हैं। उन्होंने बताया कि आगरा की बैठक में एक्सपोर्ट को बढ़ाने पर जोर दिया गया। तय हुआ कि किसानों को मॉडल के जरिए खेती के अत्याधुनिक तरीके बताए और समझाएं जाएं, ताकि वह खेती में नवाचार कर आगे बढ़ सकें और उनके खाद्य पदार्थों का एक्सपोर्ट बढ़ाया जा सके।
मिलेट उत्पादों के एक्सपोर्ट के लिए स्वाद के बाद पैकिंग पर कर रहे काम
इसी एफपीओ ने बीती 8 से 10 जनवरी के बीच दिल्ली में हुए एक्सपो में बाजरा और मिलेट से बने उत्पाद प्रदर्शित किए थे। इसमें बालूशाही और अन्य उत्पाद शामिल थे। कैप्टन पचौरी ने बताया कि उनके उत्पाद तो विदेशी खरीदारों को बहुत पसंद आए लेकिन पैकिंग आकर्षक नहीं होने के कारण बड़ा आर्डर नहीं मिला। इसलिए अब पैकिंग पर काम किया जा रहा है। जल्द ही मिलेट उत्पाद भी एक्सपोर्ट किए जाएंगे।
बीते दो वर्ष में आलू का एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है। अच्छी किस्म का आलू पैदा होने से यह संभव हो सका है। लगभग नौ देशों में इसका एक्सपोर्ट हो रहा है। जिसे आगे बढ़ाया जा रहा है। एफपीओ इसमें बेहतर काम कर रहे हैं।-शिवानी तोमर, जिला उद्यान अधिकारी।
अलीगढ़ आलू की पैदावार करने वाला बड़ा जिला है। यहां से काफी प्रयास के बाद आलू का एक्सपोर्ट शुरू हुआ है। गुयाना, बहरीन, मलयेशिया, इंडोनेशिया, दुबई, कुवैत, इस्राइल, उरग्वे और बांग्लादेश तक आलू भेजा जा रहा है।-बीपी सिंह, कृषि निर्यात विभाग।