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डीएलएड प्रशिक्षुओं को अब योजना बनाकर पढ़ाना होगा
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जिले के ढाई हजार डीएलएड प्रशिक्षुओं को बेसिक शिक्षा विभाग के विभिन्न स्कूलों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। इस बार केडब्ल्यूएल और फाइव ई मॉड्यूल से डीएलएड प्रशिक्षु बच्चों को शिक्षा देंगे। बच्चों को पढ़ाने से पहले इसकी योजना बनाकर साथ ले जानी होगी।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व संबद्ध विभिन्न कॉलेजों में अध्ययनरत डीएलएड प्रशिक्षुओं को अंतिम सत्र की ट्रेनिंग पर बेसिक स्कूलों में भेजा जा रहा है। अब तक चलने वाली ट्रेनिंग में इस बार काफी बदलाव किए गए हैं। पिछले साल जहां प्रशिक्षुओं ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। लेकिन इस बार प्रशिक्षुओं को केडब्ल्यूएल व फाइव-ई मॉड्यूल से बच्चों को पढ़ाना होगा।
उप शिक्षा निदेशक व प्राचार्य आईपीएस सोलंकी ने बताया कि नए शासनादेश के हिसाब से अब बच्चों को पढ़ाना होगा। केडब्ल्यूएल का मतलब बच्चे को ज्ञान कितना है, वह क्या चाहता है और किस तरीके से उसकी पढ़ने में रुचि रहती है।
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फाइव-ई का मतलब पाठ्यक्रम योजना तैयार करते समय यह ध्यान रखना होगा कि बच्चों को कैसे व्यस्त रखा जाना है, उसके अंदर की प्रतिभा को खोजना और उत्सुकता बढ़ाने के साथ हर विषय को ठीक प्रकार से समझाना है। अगर समझ में नहीं आए तो फिर एक बार विस्तार से बताना है।
पढ़ाई के बाद बच्चों का मूल्यांकन भी करना है कि हमारे द्वारा पढ़ाया गया विषय बच्चों की कितनी समझ में आया है। इन मॉड्यूल से जहां शिक्षण कार्य बेहतर होगा, वहीं बच्चों को भी पढ़ने में आनंद आएगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा।
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जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान व संबद्ध विभिन्न कॉलेजों में अध्ययनरत डीएलएड प्रशिक्षुओं को अंतिम सत्र की ट्रेनिंग पर बेसिक स्कूलों में भेजा जा रहा है। अब तक चलने वाली ट्रेनिंग में इस बार काफी बदलाव किए गए हैं। पिछले साल जहां प्रशिक्षुओं ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। लेकिन इस बार प्रशिक्षुओं को केडब्ल्यूएल व फाइव-ई मॉड्यूल से बच्चों को पढ़ाना होगा।
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उप शिक्षा निदेशक व प्राचार्य आईपीएस सोलंकी ने बताया कि नए शासनादेश के हिसाब से अब बच्चों को पढ़ाना होगा। केडब्ल्यूएल का मतलब बच्चे को ज्ञान कितना है, वह क्या चाहता है और किस तरीके से उसकी पढ़ने में रुचि रहती है।
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फाइव-ई का मतलब पाठ्यक्रम योजना तैयार करते समय यह ध्यान रखना होगा कि बच्चों को कैसे व्यस्त रखा जाना है, उसके अंदर की प्रतिभा को खोजना और उत्सुकता बढ़ाने के साथ हर विषय को ठीक प्रकार से समझाना है। अगर समझ में नहीं आए तो फिर एक बार विस्तार से बताना है।
पढ़ाई के बाद बच्चों का मूल्यांकन भी करना है कि हमारे द्वारा पढ़ाया गया विषय बच्चों की कितनी समझ में आया है। इन मॉड्यूल से जहां शिक्षण कार्य बेहतर होगा, वहीं बच्चों को भी पढ़ने में आनंद आएगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा।