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जर्जर स्कूल भवन: मौत के साये में पढ़ रहे मासूम
अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2016 01:20 AM IST
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जर्जर स्कूल भवन: मौत के साये में पढ़ रहे मासूम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बेसिक शिक्षा महकमे में जिले में सालाना करीब सवा अरब रुपये का बजट आता है। विभाग लाखों रुपये अपनी रैलियों पर खर्च कर देता है लेकिन परिषदीय स्कूलों की दशा खस्ता है। शहर में ही डेढ़ दर्जन परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हैं। इन परिषदीय स्कूलों की दीवारें और छत कब गिर पड़े, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में परिषदीय स्कूलों के बच्चे मौत के साये में पढ़ रहे हैं।
शहर में ही करीब डेढ़ दर्जन परिषदीय स्कूल बेहद जर्जर हालत में हैं। यह सभी स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं और इनके भवन स्वामियों का बेसिक शिक्षा विभाग से विवाद चल रहा है। शहरी क्षेत्र में जमीन न मिलने के कारण यह परिषदीय स्कूल दशक ों पुराने इन्हीं जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। किराए के स्कूली भवनों की मरम्मत न होेने की वजह से इनकी काफी समय से मरम्मत नहीं हुई है।
ऐसे में यह गिरासू हालत में हैं। क ई स्कूलों की दीवारों और छत से अक्सर प्लास्टर अथवा सीमेंट झड़ता है। यहां हमेशा हादसे का डर रहता है। बरसात के समय इनकी छतों से पानी टपकता है। शिक्षक -शिक्षिकाओं को खुद यह भय लगा रहता है कि गिरासू भवनों की वजह से कोई दुर्घटना न हो जाए। पिछले दिनों गभाना क्षेत्र में एक स्कूल की छत बारिश में गिर पड़ी थी। वह तो गनीमत रही कि उस समय वहां कोई बच्चा नहीं था।
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स्कूल काफी समय से किराए के जर्जर कमरों में चल रहा है। बरसात में यहां पानी टपकता है। छत से प्लास्टर झड़ता है। कई बार इसकी शिकायत उच्चाधिकारियोें से की जा चुकी है, लेकिन आज तक मरम्मत नहीं हुई। इसकी वजह से बारिश में तो बच्चों को वापस भेजने में ही हम भलाई समझते हैं। -गरिमा रानी शिक्षिका, शिक्षिका प्राइमरी पाठशाला संख्या 60, बेगपुर
काफी पुराना विद्यालय है और किराए के भवन में चल रहा है। एक हिस्से का तो लंबे समय से कोई उपयोग ही नहीं हो रहा। मैं यहां वर्ष 2012 से अध्यापिका हूं। इस विद्यालय के भवन की भी मरम्मत कराई जाए। इसकी मांग उच्चाधिकारियों से की गई है। यदि मरम्मत न कराई गई तो भविष्य यहां भी बच्चों के लिए समस्या खड़ी होंगी। - बसंती देवी शिक्षिका, कन्या पाठशाला विश्नूपुरी
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शहर में ही करीब डेढ़ दर्जन परिषदीय स्कूल बेहद जर्जर हालत में हैं। यह सभी स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं और इनके भवन स्वामियों का बेसिक शिक्षा विभाग से विवाद चल रहा है। शहरी क्षेत्र में जमीन न मिलने के कारण यह परिषदीय स्कूल दशक ों पुराने इन्हीं जर्जर भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। किराए के स्कूली भवनों की मरम्मत न होेने की वजह से इनकी काफी समय से मरम्मत नहीं हुई है।
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ऐसे में यह गिरासू हालत में हैं। क ई स्कूलों की दीवारों और छत से अक्सर प्लास्टर अथवा सीमेंट झड़ता है। यहां हमेशा हादसे का डर रहता है। बरसात के समय इनकी छतों से पानी टपकता है। शिक्षक -शिक्षिकाओं को खुद यह भय लगा रहता है कि गिरासू भवनों की वजह से कोई दुर्घटना न हो जाए। पिछले दिनों गभाना क्षेत्र में एक स्कूल की छत बारिश में गिर पड़ी थी। वह तो गनीमत रही कि उस समय वहां कोई बच्चा नहीं था।
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स्कूल काफी समय से किराए के जर्जर कमरों में चल रहा है। बरसात में यहां पानी टपकता है। छत से प्लास्टर झड़ता है। कई बार इसकी शिकायत उच्चाधिकारियोें से की जा चुकी है, लेकिन आज तक मरम्मत नहीं हुई। इसकी वजह से बारिश में तो बच्चों को वापस भेजने में ही हम भलाई समझते हैं। -गरिमा रानी शिक्षिका, शिक्षिका प्राइमरी पाठशाला संख्या 60, बेगपुर
काफी पुराना विद्यालय है और किराए के भवन में चल रहा है। एक हिस्से का तो लंबे समय से कोई उपयोग ही नहीं हो रहा। मैं यहां वर्ष 2012 से अध्यापिका हूं। इस विद्यालय के भवन की भी मरम्मत कराई जाए। इसकी मांग उच्चाधिकारियों से की गई है। यदि मरम्मत न कराई गई तो भविष्य यहां भी बच्चों के लिए समस्या खड़ी होंगी। - बसंती देवी शिक्षिका, कन्या पाठशाला विश्नूपुरी