सेहत पर नहीं ध्यान: 45 लाख की आबादी, 16 लाख मधुमेह के शिकार, गांव से ज्यादा शहर के लोग चपेट में
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में राजीव गांधी डायबिटीज सेंटर ने अलीगढ़ के 400 लोगों पर आठ महीने तक अध्ययन किया। जिसमें सामने आया कि गांव से ज्यादा शहर के लोग मधुमेह की गिरफ्त में है।
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अलीगढ़ जिले के लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 45 लाख की आबादी वाले जिले में 16 लाख लोग मधुमेह के शिकार हैं। इसका खुलासा जेएन मेडिकल कॉलेज के राजीव गांधी डायबिटीज सेंटर ने हुए अध्ययन में हुआ है। यह अध्ययन जिले के 400 लोगों पर आठ महीने तक हुआ है।
अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि गांव से ज्यादा शहर के लोग मधुमेह की गिरफ्त में है। मधुमेह की समस्या तेजी से बढ़ रही है। सेंटर के प्रोफेसर हामिद अशरफ ने अपनी टीम सदस्यों के साथ सितंबर 2024 में मधुमेह को लेकर अध्ययन शुरू किया। प्रो. अशरफ ने कहा कि जिले में हर तीसरा व्यक्ति मधुमेह की चपेट में है। इनमें 14 फीसदी लोगों में मधुमेह है, जबकि 13 फीसदी प्री-डायबिटिक हैं।
मुझे 15 साल से डायबिटीज है। नियमित दवाएं खा रही हूं। खानपान पर ध्यान रखना पड़ता है। - सुनीता गुप्ता
16 साल से डायबिटीज है। बीमारी के लक्षण किसी में नजर आएं तो जांच जरूर करानी चाहिए। - ममता जैन
पांच साल से मधुमेह की शिकायत है। दवाएं खाती हूं। बीच-बीच में डायबिटीज स्तर की चेक कराती हूं। - सुमन अग्रवाल
गांव से ज्यादा शहर के लोग गिरफ्त में
प्रो. हामिद अशरफ ने बताया कि गांव से ज्यादा शहर के लोग मधुमेह की गिरफ्त में हैं। अध्ययन में गांव रठगांव, जवां, छेरत सहित आठ गांवों के लोग और शहर के ऊपरकोट, सर सैयद नगर, धौर्रामाफी, जमालपुर सहित अन्य मोहल्ले के लोग शामिल हैं। इनकी आयु 18 से 60 वर्ष थी। अध्ययन में गांव के 30 और शहर के 70 फीसदी लोगों को मधुमेह है। लोगों का उपवास प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट, रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट, ए-1सी टेस्ट (दो से तीन महीनों में मापता है), ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट किया गया। इसके बाद विश्लेषण करके रिपोर्ट तैयार की गई। आठ महीने तक लोगों पर निगरानी की गई।
हर महीने आठ करोड़ रुपये की दवा खा जाते मधुमेह के मरीज
अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह टिल्लू ने बताया कि जिले में हर महीने आठ करोड़ रुपये की दवा मधुमेह के मरीज खा जाते हैं। फफाला बाजार से सभी कंपनियों की 8 से 8.5 करोड़ रुपये की मधुमेह की दवाएं गांव और शहर के मेडिकल स्टोरों पर आपूर्ति हो रही हैं।