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दिल पर ली.. लेकिन दर्द दे गई किडनैपिंग
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Fri, 14 Oct 2016 01:50 AM IST
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बेशक छह माह पुराने रहस्य से पर्दा उठ गया। मगर बेहद दुखद रहा। परिवार के धैर्य पर तो कोई टिप्पणी करना बेईमानी होगा। पुलिस के भी ओहदेदारों ने भी निखिल की सकुशल बरामदगी दिल पर ली। मगर सफलता न मिली।
जब लगा कि कोई सूचनाएं लीक कर रहा है तो व्हाट्सएप पर ‘निखिल किडनैपिंग’ नाम से ग्रुप बना। इस ग्रुप में एसपी सिटी, निखिल के पिता और पुलिस के वह चंद लोग शामिल किए, जो खास थे। पुलिस ने परिवार से मिलना और बातचीत तक बंद कर दी।
हर सूचना का आदान प्रदान इसी ग्रुप पर हुआ। हां, देर लगी, पर यह देर दर्द दे गई। मगर वह चेहरा सामने आ गया, जिसे परिवार अपना मानकर चल रहा था।
नवागत एसएसपी राजेश पांडेय का अधिकारियों से वार्ता में पुराने अनवर्ककाउट अपराधों पर जिक्र हुआ। एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव ने उन्हें बताया कि वैसे तो कई केस हैं। मगर निखिल की सकुशल वापसी प्राथमिकता में है।
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खुद एसपी सिटी जब जिले में आए, तभी यह अपहरण हुआ। उनके साथ सर्विलांस इंचार्ज छोटेलाल सबसे ज्यादा सकुशल बरामदगी को चिंतित थे। जब साक्ष्य संकलित हुए और अभिषेक का नाम सामने आया तो पुलिस ने उसे बुलाया।
मगर खुद निखिल के परिजन उसे अपना बताकर छुड़ा ले गए। वह हर जगह परिवार के साथ था। लेकिन जब हकीकत सामने आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। इस गिरफ्तारी व खुलासा टीम में एसपी सिटी व छोटेलाल के अलावा एसओ बन्नादेवी अमित, एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, एएसआई राकेश यादव, एमपी सिंह, ऋषीपाल सिंह, सुभाष, सुखवीर, मोहनलाल, अखिल, मुकेश आदि शामिल रहे हैं।
आरोपी की जुबानी, अहपरण की कहानी
डीएस कॉलेज से बीए एसएलबी छात्र व दीवानी में अवैतनिक एक दफ्तर में कार्यरत अभिषेक व निखिल पड़ोसी हैं। अक्सर मुलाकात के दौरान बातचीत होती थी। चंचल प्रवत्ति के निखिल ने अभिषेक से अपनी किसी गर्ल फ्रेंड का जिक्र किया।
अभिषेक ने उसे मिलवाने का भरोसा दिलाया। निखिल से बातचीत में पता चला कि पापा प्राइवेट शिक्षक हैं। मां मेडिकल में नर्स हैं। अब नया वेतनमान लगने वाला है, मां का वेतन 1.30 लाख रुपये होने वाला है। यह सुन अभिषेक के मन में लालच आ गया।
अभिषेक की प्रेमिका उस पर रुपये कमाने पर ही शादी का दबाव डाल रही थी। इस पर अभिषेक ने निखिल का अपहरण करना तय किया। घटना वाले दिन उसे स्कूल के बजाय लालच देकर मदार गेट पर कार्लगर्ल के पास ले गया। वहां उसे बातों में उलझाकर नशे की दो गोलियां खिला दीं।
बस बेहोश होने पर उसे टैक्सी से सीधे फिरोजाबाद ले गया। वहां देवा के घर निखिल को छोड़ खुद वापस लौट आया। इसके बाद रेंसम कॉल की। मगर जब पुलिस देख ली तो डर गया। इधर, रात में देवा का फोन आया कि उसे होश आ गया है और वह बहुत शोर कर रहा है।
अभिषेक देवा को 500 रुपये भी देकर आया था। उसने जवाब दिया कि तुम जैसे चाहो मैनेज करो। उधर, से देवा ने कहा कि क्या मार दूं। तो अभिषेक ने कह दिया कि तुम्हें जो बेहतर लगे। बस वहां निखिल की हत्या हो गई। इस दौरान बच्चे का बैग आदि एक दोस्त की मदद से फिंकवा दिया।
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जब लगा कि कोई सूचनाएं लीक कर रहा है तो व्हाट्सएप पर ‘निखिल किडनैपिंग’ नाम से ग्रुप बना। इस ग्रुप में एसपी सिटी, निखिल के पिता और पुलिस के वह चंद लोग शामिल किए, जो खास थे। पुलिस ने परिवार से मिलना और बातचीत तक बंद कर दी।
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हर सूचना का आदान प्रदान इसी ग्रुप पर हुआ। हां, देर लगी, पर यह देर दर्द दे गई। मगर वह चेहरा सामने आ गया, जिसे परिवार अपना मानकर चल रहा था।
नवागत एसएसपी राजेश पांडेय का अधिकारियों से वार्ता में पुराने अनवर्ककाउट अपराधों पर जिक्र हुआ। एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव ने उन्हें बताया कि वैसे तो कई केस हैं। मगर निखिल की सकुशल वापसी प्राथमिकता में है।
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खुद एसपी सिटी जब जिले में आए, तभी यह अपहरण हुआ। उनके साथ सर्विलांस इंचार्ज छोटेलाल सबसे ज्यादा सकुशल बरामदगी को चिंतित थे। जब साक्ष्य संकलित हुए और अभिषेक का नाम सामने आया तो पुलिस ने उसे बुलाया।
मगर खुद निखिल के परिजन उसे अपना बताकर छुड़ा ले गए। वह हर जगह परिवार के साथ था। लेकिन जब हकीकत सामने आई तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। इस गिरफ्तारी व खुलासा टीम में एसपी सिटी व छोटेलाल के अलावा एसओ बन्नादेवी अमित, एसओजी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह, एएसआई राकेश यादव, एमपी सिंह, ऋषीपाल सिंह, सुभाष, सुखवीर, मोहनलाल, अखिल, मुकेश आदि शामिल रहे हैं।
आरोपी की जुबानी, अहपरण की कहानी
डीएस कॉलेज से बीए एसएलबी छात्र व दीवानी में अवैतनिक एक दफ्तर में कार्यरत अभिषेक व निखिल पड़ोसी हैं। अक्सर मुलाकात के दौरान बातचीत होती थी। चंचल प्रवत्ति के निखिल ने अभिषेक से अपनी किसी गर्ल फ्रेंड का जिक्र किया।
अभिषेक ने उसे मिलवाने का भरोसा दिलाया। निखिल से बातचीत में पता चला कि पापा प्राइवेट शिक्षक हैं। मां मेडिकल में नर्स हैं। अब नया वेतनमान लगने वाला है, मां का वेतन 1.30 लाख रुपये होने वाला है। यह सुन अभिषेक के मन में लालच आ गया।
अभिषेक की प्रेमिका उस पर रुपये कमाने पर ही शादी का दबाव डाल रही थी। इस पर अभिषेक ने निखिल का अपहरण करना तय किया। घटना वाले दिन उसे स्कूल के बजाय लालच देकर मदार गेट पर कार्लगर्ल के पास ले गया। वहां उसे बातों में उलझाकर नशे की दो गोलियां खिला दीं।
बस बेहोश होने पर उसे टैक्सी से सीधे फिरोजाबाद ले गया। वहां देवा के घर निखिल को छोड़ खुद वापस लौट आया। इसके बाद रेंसम कॉल की। मगर जब पुलिस देख ली तो डर गया। इधर, रात में देवा का फोन आया कि उसे होश आ गया है और वह बहुत शोर कर रहा है।
अभिषेक देवा को 500 रुपये भी देकर आया था। उसने जवाब दिया कि तुम जैसे चाहो मैनेज करो। उधर, से देवा ने कहा कि क्या मार दूं। तो अभिषेक ने कह दिया कि तुम्हें जो बेहतर लगे। बस वहां निखिल की हत्या हो गई। इस दौरान बच्चे का बैग आदि एक दोस्त की मदद से फिंकवा दिया।