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पाक नागरिक फर्जी पते से कर रहा था तस्करी
अभिषेक शर्मा
Updated Fri, 04 Aug 2017 01:51 AM IST
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महानगर के सासनी गेट बीबी की सराय का फर्जी पता बताकर एक पाकिस्तानी नागरिक नशे के उत्पाद की तस्करी कर रहा था, मगर गिरफ्तारी के समय पुलिस को भनक नहीं लगी।
अलीगढ़ और उत्तराखंड पुलिस ने उसे तीन बार गिरफ्तार किया। जब अदालत में उसके पते के सत्यापन की बारी आई तो भेद खुल गया। वह पाकिस्तान के करांची स्थित गांधी रोड का रहने वाला निकला।
उसे अलीगढ़ की ऊपरकोट कोतवाली पुलिस ने भी दो बार तस्करी में गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक में उसे 5 साल की सजा हो चुकी है और दूसरे में ट्रायल लंबित है। उसे अलीगढ़ जेल भेज दिया गया है और अब 28 अगस्त को दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अधिवक्ता मुहैया कराने के लिए तलब किया है।
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उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में इकबाल पुत्र अब्दुल सत्तार निवासी गांधी रोड करांची (पाकिस्तान) को पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ में उसने अपना पता बीबी की सराय सासनी गेट अलीगढ़ बताया और स्वीकारा कि 2007 में उसे कोतवाली ऊपरकोट पुलिस ने भी तस्करी में जेल भेजा था। जमानत पर छूट आया तो 2010 में उसकी फिर कोतवाली से गिरफ्तारी हुई।
जेल गया तो मुक्तेश्वर की अदालत ने उसे अपने यहां के मुकदमे में तलब कर लिया। उसे मुक्तेश्वर न्यायालय ने 10 साल की सजा व एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया और 2010 के अलीगढ़ के मुकदमे में भी उसे 5 साल की सजा सुना दी गई। अब चूंकि 2007 का अलीगढ़ का मुकदमा अदालत में लंबित था तो यहां की अदालत की तलबी पर उसे मुक्तेश्वर से पिछले माह यहां शिफ्ट कर दिया गया।
इधर, अदालती प्रक्रिया में पते का सत्यापन कराया। स्थानीय लोगों ने भेद खोला कि वह मूल रूप से पाकिस्तान का है। एसएसपी के निर्देश पर सीओ एलआईयू ने जांच की। जांच में उसके पाकिस्तानी होने की तस्दीक हो गई और पत्र कारागार प्रशासन को भेज दिया गया।
दूतावास ने जांच कराई, तो इकबाल का पता सही होने का सच सामने आया। बताया गया कि तस्करी करते-करते वह भारत आ गया। पकड़े जाने पर इकबाल उल्टे-सीधे पते बताकर बचता रहा। अब पाकिस्तानी दूतावास ने उसे 28 अगस्त को तलब किया है, जहां उसे रिहाई व अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए काउंसलर उपलब्ध कराने संबंधी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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अलीगढ़ और उत्तराखंड पुलिस ने उसे तीन बार गिरफ्तार किया। जब अदालत में उसके पते के सत्यापन की बारी आई तो भेद खुल गया। वह पाकिस्तान के करांची स्थित गांधी रोड का रहने वाला निकला।
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उसे अलीगढ़ की ऊपरकोट कोतवाली पुलिस ने भी दो बार तस्करी में गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक में उसे 5 साल की सजा हो चुकी है और दूसरे में ट्रायल लंबित है। उसे अलीगढ़ जेल भेज दिया गया है और अब 28 अगस्त को दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अधिवक्ता मुहैया कराने के लिए तलब किया है।
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उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में इकबाल पुत्र अब्दुल सत्तार निवासी गांधी रोड करांची (पाकिस्तान) को पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ में उसने अपना पता बीबी की सराय सासनी गेट अलीगढ़ बताया और स्वीकारा कि 2007 में उसे कोतवाली ऊपरकोट पुलिस ने भी तस्करी में जेल भेजा था। जमानत पर छूट आया तो 2010 में उसकी फिर कोतवाली से गिरफ्तारी हुई।
जेल गया तो मुक्तेश्वर की अदालत ने उसे अपने यहां के मुकदमे में तलब कर लिया। उसे मुक्तेश्वर न्यायालय ने 10 साल की सजा व एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया और 2010 के अलीगढ़ के मुकदमे में भी उसे 5 साल की सजा सुना दी गई। अब चूंकि 2007 का अलीगढ़ का मुकदमा अदालत में लंबित था तो यहां की अदालत की तलबी पर उसे मुक्तेश्वर से पिछले माह यहां शिफ्ट कर दिया गया।
इधर, अदालती प्रक्रिया में पते का सत्यापन कराया। स्थानीय लोगों ने भेद खोला कि वह मूल रूप से पाकिस्तान का है। एसएसपी के निर्देश पर सीओ एलआईयू ने जांच की। जांच में उसके पाकिस्तानी होने की तस्दीक हो गई और पत्र कारागार प्रशासन को भेज दिया गया।
दूतावास ने जांच कराई, तो इकबाल का पता सही होने का सच सामने आया। बताया गया कि तस्करी करते-करते वह भारत आ गया। पकड़े जाने पर इकबाल उल्टे-सीधे पते बताकर बचता रहा। अब पाकिस्तानी दूतावास ने उसे 28 अगस्त को तलब किया है, जहां उसे रिहाई व अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए काउंसलर उपलब्ध कराने संबंधी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।