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दिल्ली से आने वाले लाखों रुपये के माल में हो रही कर चोरी
अमर उजाला ब्यूरो/आशीष निगम
Updated Tue, 02 Feb 2016 01:30 AM IST
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दिल्ली से रोजाना लाखों रुपये की कर चोरी का माल ट्रकों मेें भरकर धड़ल्ले अलीगढ़ लाया जा रहा है। इसमें किराना, रेडीमेड, फुटवियर, कास्मेटिक, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल्स आइटम, रोजमर्रा की जरूरतों के सामान, औद्योगिक कच्चा माल आदि सब शामिल हैं।
ये माल शहर की मिश्रित आबादी वाले इलाकों में उतारा जा रहा है। ट्रक से उतारने के बाद छोटे टेंपो की मदद से कार्टन सही ठिकानों तक पहुंचाए जा रहे हैं। ऐसा नहीं कि वाणिज्य कर विभाग की मोबाइल टीम और स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के अधिकारियों को इसकी भनक नहीं, पर इस ओर से जानबूझ कर अनदेखी करने का ओराप है।
कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों पर तो चोरों को ‘सेफ रास्ता’ मुहय्या कराने का भी आरोप लगाया जा रहा है। प्रशासनिक दबाव बढ़ने पर वे कार्रवाई के नाम पर कुछ नग पकड़ कर उसपर टैक्स और जुर्माना ‘ठोंक’ कर इतिश्री कर लेते हैं।
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इस कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो दिल्ली में ‘जी गैंग’ 12 टन वजनी ट्रक को दिल्ली से हरियाणा होकर अलीगढ़-पलवल मार्ग तक पहुंचाता है।
जिसके लिए 12 हजार रुपये प्रति ट्रक की वसूली होती है। पलवल से यहां के कारोबारी ‘चंद पुलिस अधिकारियों’ और अपने ‘आदरणीय वाणिज्य कर अधिकारियों’ के आशीर्वाद से माल शहर के अंदर पहुंचाते हैं। जिला स्तर पर कर कलेक्शन की समीक्षा मीटिंगों में चुनाव और दूसरी व्यस्तताओं का हवाला देकर अधिकारी टैक्स लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाने के बहाने तो गढ़ लेते हैं, लेकिन टैक्स चोरों की पनाह बन चुके ‘अड्डों’ पर कार्रवाई नहीं करते।
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ये माल शहर की मिश्रित आबादी वाले इलाकों में उतारा जा रहा है। ट्रक से उतारने के बाद छोटे टेंपो की मदद से कार्टन सही ठिकानों तक पहुंचाए जा रहे हैं। ऐसा नहीं कि वाणिज्य कर विभाग की मोबाइल टीम और स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम के अधिकारियों को इसकी भनक नहीं, पर इस ओर से जानबूझ कर अनदेखी करने का ओराप है।
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कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों पर तो चोरों को ‘सेफ रास्ता’ मुहय्या कराने का भी आरोप लगाया जा रहा है। प्रशासनिक दबाव बढ़ने पर वे कार्रवाई के नाम पर कुछ नग पकड़ कर उसपर टैक्स और जुर्माना ‘ठोंक’ कर इतिश्री कर लेते हैं।
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इस कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो दिल्ली में ‘जी गैंग’ 12 टन वजनी ट्रक को दिल्ली से हरियाणा होकर अलीगढ़-पलवल मार्ग तक पहुंचाता है।
जिसके लिए 12 हजार रुपये प्रति ट्रक की वसूली होती है। पलवल से यहां के कारोबारी ‘चंद पुलिस अधिकारियों’ और अपने ‘आदरणीय वाणिज्य कर अधिकारियों’ के आशीर्वाद से माल शहर के अंदर पहुंचाते हैं। जिला स्तर पर कर कलेक्शन की समीक्षा मीटिंगों में चुनाव और दूसरी व्यस्तताओं का हवाला देकर अधिकारी टैक्स लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाने के बहाने तो गढ़ लेते हैं, लेकिन टैक्स चोरों की पनाह बन चुके ‘अड्डों’ पर कार्रवाई नहीं करते।