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लिंग परीक्षण में डॉ. दिव्या का सरेंडर
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:41 AM IST
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सरेंडर करने पहुंची डॉ. दिव्या
- फोटो : Amar Ujala
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लिंग परीक्षण कांड में आरोपी क्वार्सी के बेला मार्ग स्थित जीवन हास्पिटल के डाक्टर दंपति में से डॉ. दिव्या चौधरी ने बुधवार को सीकर न्यायालय में समर्पण कर दिया। यहां उन्होंने अपनी जमानत के लिए याचिका दी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। डॉ. दिव्या चौधरी कोे अदालत ने जेल भेज दिया है। इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख छह दिसंबर तय की गई है।
गत 16 अक्तूबर को राजस्थान पुलिस और राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल ने संयुक्त रूप सेे छापामार कार्रवाई करते हुए बेला मार्ग स्थित जीवन सुपर स्पेशियलिटी सेंटर पर डॉ. दिव्या चौधरी को लिंग परीक्षण करते हुए रंगेहाथों पकड़ा था। टीम ने अल्ट्रासाउंड कक्ष और मशीन को सील कर दिया था। राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल के सीआई श्रीराम बड़सरा ने बताया कि उन्होंने उस समय दलालों को भी पकड़ लिया था और सभी सबूत उनके पास थे। इसके बाद भी डॉ. दिव्या के पति डॉ. जयंत शर्मा ने स्थानीय दो भाजपा विधायकों और सहयोगियों की मदद से टीम पर हमला करवाया। साथ ही डॉ. दिव्या और दलालों को छुड़ाने का प्रयास किया। इस बीच मौका पाकर डॉ. दिव्या चौधरी मौके से खिसक गईं। टीम ने दलाल महेश कुमार, रिंकू और लालचंद को गिरफ्तार कर लिया।
17 अक्तूबर को टीम ने पीसीपीएनडीटी थाने में डॉ. दिव्या चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसके बाद डॉ. दिव्या ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सभी जगह से निराश होने के बाद बुधवार को डॉ. दिव्या ने सीकर न्यायालय पहुंचकर एसीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सूचना पर पीसीपीएनडीटी की टीम ने मौके पर पहुंच कर डॉ. दिव्या को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बुधवार को ही डॉ. दिव्या की ओर से सीकर न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दी गई, जो अदालत से खारिज हो गई। पीसीपीएनडीटी टीम ने पूछताछ के बाद डॉ. दिव्या को जेल भिजवा दिया। वहीं इस मामले में आरोपी डॉ. दिव्या के पति डॉ. जयंत अभी फरार हैं।
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इनामी योजना के जरिये कसेंगे शिकंजा : सीएमओ
लिंग परीक्षण मामले में जीवन हास्पिटल के डाक्टरों पर बड़ी कार्रवाई के बाद भी शहर में गुपचुप तरीके से नर्सिंग होमों में लिंग परीक्षण का धंधा जारी है। जिन नर्सिंग होमों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, वह इस काम में लगे हुए हैं। कुछ ने तो लेबर रूप में ही अल्ट्रासाउंड मशीन लगा रखी है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल कहते हैं कि प्रदेश सरकार की एक योजना है, जिसमें लिंग परीक्षण की सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा, बल्कि उसे एक लाख रुपये का इनाम भी दिया जाएगा।
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गत 16 अक्तूबर को राजस्थान पुलिस और राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल ने संयुक्त रूप सेे छापामार कार्रवाई करते हुए बेला मार्ग स्थित जीवन सुपर स्पेशियलिटी सेंटर पर डॉ. दिव्या चौधरी को लिंग परीक्षण करते हुए रंगेहाथों पकड़ा था। टीम ने अल्ट्रासाउंड कक्ष और मशीन को सील कर दिया था। राजस्थान पीसीपीएनडीटी सेल के सीआई श्रीराम बड़सरा ने बताया कि उन्होंने उस समय दलालों को भी पकड़ लिया था और सभी सबूत उनके पास थे। इसके बाद भी डॉ. दिव्या के पति डॉ. जयंत शर्मा ने स्थानीय दो भाजपा विधायकों और सहयोगियों की मदद से टीम पर हमला करवाया। साथ ही डॉ. दिव्या और दलालों को छुड़ाने का प्रयास किया। इस बीच मौका पाकर डॉ. दिव्या चौधरी मौके से खिसक गईं। टीम ने दलाल महेश कुमार, रिंकू और लालचंद को गिरफ्तार कर लिया।
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17 अक्तूबर को टीम ने पीसीपीएनडीटी थाने में डॉ. दिव्या चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसके बाद डॉ. दिव्या ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सभी जगह से निराश होने के बाद बुधवार को डॉ. दिव्या ने सीकर न्यायालय पहुंचकर एसीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सूचना पर पीसीपीएनडीटी की टीम ने मौके पर पहुंच कर डॉ. दिव्या को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद बुधवार को ही डॉ. दिव्या की ओर से सीकर न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दी गई, जो अदालत से खारिज हो गई। पीसीपीएनडीटी टीम ने पूछताछ के बाद डॉ. दिव्या को जेल भिजवा दिया। वहीं इस मामले में आरोपी डॉ. दिव्या के पति डॉ. जयंत अभी फरार हैं।
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इनामी योजना के जरिये कसेंगे शिकंजा : सीएमओ
लिंग परीक्षण मामले में जीवन हास्पिटल के डाक्टरों पर बड़ी कार्रवाई के बाद भी शहर में गुपचुप तरीके से नर्सिंग होमों में लिंग परीक्षण का धंधा जारी है। जिन नर्सिंग होमों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है, वह इस काम में लगे हुए हैं। कुछ ने तो लेबर रूप में ही अल्ट्रासाउंड मशीन लगा रखी है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल कहते हैं कि प्रदेश सरकार की एक योजना है, जिसमें लिंग परीक्षण की सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा, बल्कि उसे एक लाख रुपये का इनाम भी दिया जाएगा।