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14 साल बाद केस बंद, नेपाल में नहीं मिला वारंटी
Updated Wed, 11 Jul 2018 01:48 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
बालक के अपहरण और हत्या के मुकदमे में 14 साल बाद अदालत ने मामले को खारिज कर दिया है। इस मामले में आरोपी को तलाशने कई बार पुलिस नेपाल गई। नेपाल निवासी वारंटी की खोज में सिविल लाइंस पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन उसका सुराग नहीं लग रहा। इस मामले में एसएसपी की पेशी अदालत में हुई जिसमें कह दिया गया कि इस पहचान और नाम का कोई भी आदमी अब वहां नहीं है। इसी के साथ यह केस बंद हो गया।
मूलरूप से नेपाल के जिला कैलाली थाना बोनिया के गांव बुटकऊआ निवासी सुरेश बहादुर व प्रेम बहादुर, दोनों यहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहते थे। फरवरी 2004 में प्रेम बहादुर के चार साल के बेटे विनोद की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई।
सुरेश बहादुर को नामजद कराया गया। पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर मंजूर गढ़ी से बालक विनोद की लाश बरामद की। सुरेश को जेल भेज दिया गया और कोर्ट में चार्जशीट दायर हुई।
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2009 में सत्र न्यायालय से सुरेश को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। कोर्ट ने सुरेश को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए। हाजिर न होने पर सुरेश बहादुर के खिलाफ दिसंबर 2016 में गैर जमानती वारंट जारी हुए।
वारंट जारी होने के बाद से सिविल लाइंस पुलिस सुरेश को तलाश कर रही है। अप्रैल व जुलाई में सिविल लाइंस थाने की पुलिस दारोगा इसरार अहमद की अगुवाई में नेपाल जा चुकी है, मगर वह हाथ नहीं लगा। अब अदालत में इस केस को बंद कर दिया गया है।
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बालक के अपहरण और हत्या के मुकदमे में 14 साल बाद अदालत ने मामले को खारिज कर दिया है। इस मामले में आरोपी को तलाशने कई बार पुलिस नेपाल गई। नेपाल निवासी वारंटी की खोज में सिविल लाइंस पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन उसका सुराग नहीं लग रहा। इस मामले में एसएसपी की पेशी अदालत में हुई जिसमें कह दिया गया कि इस पहचान और नाम का कोई भी आदमी अब वहां नहीं है। इसी के साथ यह केस बंद हो गया।
मूलरूप से नेपाल के जिला कैलाली थाना बोनिया के गांव बुटकऊआ निवासी सुरेश बहादुर व प्रेम बहादुर, दोनों यहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहते थे। फरवरी 2004 में प्रेम बहादुर के चार साल के बेटे विनोद की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई।
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सुरेश बहादुर को नामजद कराया गया। पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर मंजूर गढ़ी से बालक विनोद की लाश बरामद की। सुरेश को जेल भेज दिया गया और कोर्ट में चार्जशीट दायर हुई।
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2009 में सत्र न्यायालय से सुरेश को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। कोर्ट ने सुरेश को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए। हाजिर न होने पर सुरेश बहादुर के खिलाफ दिसंबर 2016 में गैर जमानती वारंट जारी हुए।
वारंट जारी होने के बाद से सिविल लाइंस पुलिस सुरेश को तलाश कर रही है। अप्रैल व जुलाई में सिविल लाइंस थाने की पुलिस दारोगा इसरार अहमद की अगुवाई में नेपाल जा चुकी है, मगर वह हाथ नहीं लगा। अब अदालत में इस केस को बंद कर दिया गया है।