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सेना भर्ती की जगह कहीं खानी न पड़े जेल की हवा

Sat, 17 Nov 2018 01:49 AM IST
Updated Sat, 17 Nov 2018 01:49 AM IST
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सेना भर्ती की जगह कहीं खानी न पड़े जेल की हवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की भावना रखने वाले खिलाड़ियों के लिए 15 नवंबर से मथुरा में भर्ती मेला शुरू हो गया है, लेकिन नौकरी पाने की चाह में कुछ खिलाड़ी गलत तरीकों का सहारा ले रहे हैं। स्कैनिंग से फर्जी खेल सर्टिफिकेट तैयार करा कर भर्ती में दे रहे। जब वह पकड़े जाते हैं तो खिलाड़ी अधिकारियों के हाथ-पैर जोड़ते नजर आते हैं। ऐसे ही दो मामले कल हाथरस में रहने वाले खिलाड़ियों के सामने आए। यह खिलाड़ी अलीगढ़ में रहकर तैयारी कर रहे हैं।

मथुरा के ईगल गार्डन में 15 नवंबर से शुरू हुई सेना भर्ती प्रक्रिया में करीब 1 लाख अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं। इस भर्ती का एक शेड्यूल तैयार किया गया है। गुरुवार को पहले दिन हाथरस की सभी तहसीलों के अभ्यर्थियों को फिजीकल टेस्ट और प्रमाण पत्र जांच आदि प्रक्रिया के लिए बुलाया गया था।
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भर्ती के दौरान दो खिलाड़ियों के प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। क्योंकि सभी सर्टिफिकेट यूपी एथलेटिक एसोसिएशन के थे, इसलिए अधिकारियों ने इसे लखनऊ में संस्था के सचिव पीके श्रीवास्तव के पास जांच के लिए भेजा। जांच में यह फर्जी पाए गए। इसका खुलासा होने पर अधिकारियों ने खिलाड़ियों पर कार्रवाई करने की रणनीति बनाई।
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दोनों खिलाड़ियों ने बताया कि उन्होंने स्कैनिंग करा नकली सर्टिफिकेट बनाए थे। उन्होंने सेना अधिकारियों से माफी मांगी। बाद में अधिकारियों ने भविष्य खराब होने के चलते दोनों खिलाड़ियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया।

इस भर्ती में शनिवार को आज अलीगढ़, अतरौली और तहसील कोल, 18 नवंबर को गभाना व इगलास तहसील और 19 नवंबर को खैर तहसील के अभ्यर्थियों का फिजीकल टेस्ट और प्रमाण पत्रों की जांच होनी है। अगर किसी खिलाड़ी ने कोई भी दस्तावेज फर्जी बनवाए हैं तो वह अब सेना की कार्रवाई से बच नहीं सकता। कहीं ऐसा न हो कि नौकरी भी न मिले और भविष्य अंधकार में हो जाए।


मथुरा की सेना भर्ती में इस तरीके के दो मामले संज्ञान में आए हैं। दोनों खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। सेना अधिकारियों ने उन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजा था। बाद में खिलाड़ियों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। पहले विजेता खिलाड़ियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं होता था, लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन है। इसलिए खिलाड़ी थोड़ा सतर्क रहे। किसी भी तरीके का फर्जीवाड़ा उनका भविष्य खत्म कर सकता है।
-पीके श्रीवास्तव, सचिव, यूपी एथलेटिक एसोसिएशन
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