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अब नहीं मिली पुलिस को नेपाल जाने की अनुमति
Updated Fri, 06 Jul 2018 01:16 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
हत्या के मुकदमे में नेपाल निवासी वारंटी की खोज में सिविल लाइंस पुलिस एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। दो बार पुलिस टीम नेपाल हो आई। मगर उसका सुराग नहीं लग रहा। फिर से पुलिस ने नेपाल जाने की अनुमति शासन से मांगी थी। मगर नहीं मिली। अब मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई की तारीख नियत है और एसएसपी को पेश होना है। इसके लिए पुलिस जवाब तैयार करने में जुटी है।
मूलरूप से नेपाल के जिला कैलाली थाना बोनिया के गांव बुटकऊआ निवासी सुरेश बहादुर व प्रेम बहादुर यहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहते थे। फरवरी 2004 में प्रेम बहादुर के चार साल के बेटे विनोद की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई।
सुरेश को नामजद कराया गया। पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर मंजूरगढ़ी से बालक विनोद की लाश बरामद की। सुरेश को जेल भेज दिया गया और कोर्ट में चार्जशीट दायर हुई। 2009 में सत्र न्यायालय से सुरेश को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया।
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इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। कोर्ट ने सुरेश को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए। हाजिर न होने पर सुरेश के खिलाफ दिसंबर 2016 में गैर जमानती वारंट जारी हुए। वारंट जारी होने के बाद से सिविल लाइंस पुलिस सुरेश को तलाश कर रही है। अप्रैल व जुलाई में सिविल लाइंस थाने की पुलिस दारोगा इसरार अहमद की अगुवाई में नेपाल जा चुकी है, मगर वह हाथ नहीं लगा।
अब इस मामले में 9 जुलाई की तारीख नियत है, जिसमें एसएसपी को कोर्ट में प्रस्तुत होना है। इसके चलते पुलिस ने एक बार फिर नेपाल जाने की अनुमति शासन से मांगी थी। मगर नहीं मिली। अब पुलिस जवाब दाखिल करने की तैयारी में है।
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हत्या के मुकदमे में नेपाल निवासी वारंटी की खोज में सिविल लाइंस पुलिस एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। दो बार पुलिस टीम नेपाल हो आई। मगर उसका सुराग नहीं लग रहा। फिर से पुलिस ने नेपाल जाने की अनुमति शासन से मांगी थी। मगर नहीं मिली। अब मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में फिर सुनवाई की तारीख नियत है और एसएसपी को पेश होना है। इसके लिए पुलिस जवाब तैयार करने में जुटी है।
मूलरूप से नेपाल के जिला कैलाली थाना बोनिया के गांव बुटकऊआ निवासी सुरेश बहादुर व प्रेम बहादुर यहां फ्रेंड्स कॉलोनी में रहते थे। फरवरी 2004 में प्रेम बहादुर के चार साल के बेटे विनोद की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई।
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सुरेश को नामजद कराया गया। पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर मंजूरगढ़ी से बालक विनोद की लाश बरामद की। सुरेश को जेल भेज दिया गया और कोर्ट में चार्जशीट दायर हुई। 2009 में सत्र न्यायालय से सुरेश को साक्ष्यों की कमी के आधार पर बरी कर दिया।
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इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई। कोर्ट ने सुरेश को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए। हाजिर न होने पर सुरेश के खिलाफ दिसंबर 2016 में गैर जमानती वारंट जारी हुए। वारंट जारी होने के बाद से सिविल लाइंस पुलिस सुरेश को तलाश कर रही है। अप्रैल व जुलाई में सिविल लाइंस थाने की पुलिस दारोगा इसरार अहमद की अगुवाई में नेपाल जा चुकी है, मगर वह हाथ नहीं लगा।
अब इस मामले में 9 जुलाई की तारीख नियत है, जिसमें एसएसपी को कोर्ट में प्रस्तुत होना है। इसके चलते पुलिस ने एक बार फिर नेपाल जाने की अनुमति शासन से मांगी थी। मगर नहीं मिली। अब पुलिस जवाब दाखिल करने की तैयारी में है।