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पर्सनल आईडी पर टिकट बनाने वाले को जेल

Mon, 12 Nov 2018 01:32 AM IST
Updated Mon, 12 Nov 2018 01:32 AM IST
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पर्सनल आईडी पर  टिकट बनाने वाले को जेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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आप अपनी पर्सनल आईडी यानी पहचान पत्र का विशेष ध्यान रखें। शहर में आम आदमी की पर्सनल आईडी का दलाल धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। आरपीएफ क्राइम ब्रांच के छापे में शनिवार को ऐसी ही 35 पर्सनल आईडी मिली हैं।

जिनका इस्तेमाल रेलवे रिजर्वेशन के ई-टिकट के धंधे में हो रहा था। ऐसे ही फर्जी आईडी पर रेलवे रिजर्वेशन के कई कई टिकट बनाने वालों पर अब आरपीएफ क्राइम ब्रांच ने शिकंजा कस दिया है।
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रेलवे रोड, मेडिकल रोड सहित पुराने शहर के कुछ ऐसे ही दुकानदार पुलिस के निशाने पर हैं। आरपीएफ इंस्पेक्टर पीके ओझा और आरपीएफ क्राइम ब्रांच अलीगढ़ के इंस्पेक्टर आरके कौशिक ने बताया कि ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। शनिवार को छापे के बाद भागे पंकज वार्ष्णेय की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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वहीं छापे के दौरान पकड़े गए ज्ञानेश को रविवार को जेल भेज दिया गया है। आरपीएफ ने दलालों की धरपकड़ के लिए मुख्यालय के निर्देश पर टीम भी बना दी है। जिसमें आरपीएफ इंस्पेक्टर पीके ओझा, आरपीएफ क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर आरके कौशिक, हेड कांस्टेबिल नरेश कुमार, अजयपाल सिंह मीणा, एएसआई ओंकार सिंह, हैड कांस्टेबिल अमरनाथ, कांस्टेबिल अनवर खां शामिल हैं।

इधर, गौर हो कि आरपीएफ क्राइम ब्रांच की टीम ने शनिवार को कोयले वाली गली स्थित एक मकान में चल रहे टूर एंड ट्रैवल्स पर छापा मारा था। जिसमें 12 अग्रिम यात्रा की ई-टिकट कीमत लगभग 24543 रुपये, 28 वो टिकट जिन पर यात्रा की जा चुकी थी, कीमत 37200 रुपये, 167 पुराने टिकट का विवरण बरामद किया था। जो 35 पर्सनल आईडी पर बनाए गए थे।


दो मानीटर, दो सीपीयू, एक यूपीएस, दो माउस, दो कीबोर्ड, डोंगल, दो मोबाइल और 13560 रुपये नगद बरामद किए। छापे में मौके से संचालक पंकज वार्ष्णेय फरार हो गया और टिकट बना रहे जयगंज दिगंबर मंदिर वाली गली निवासी ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ धारा 143 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। रविवार को उसको जेल भेजा गया है। ज्ञानेश ने कबूल किया कि वह पूर्व में 200 से ज्यादा टिकट बना चुका है।
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