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ऑपरेशन राकेश में लगे 4 दिन..चंद घंटों में तोड़ दिया रैकेट
Updated Wed, 28 Feb 2018 01:28 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अक्सर सुर्खियों और विवादों में रहने वाला पुराना आरटीओ कंपाउंड और उसी परिसर में रहने वाले पूर्व विधायक ठा.राकेश सिंह की गिरफ्तारी की खबर भर से जिले में सियासी भूचाल आ गया था। जितने-मुंह उतनी बातें हो रही थीं।
मंगलवार सुबह से ही समर्थकों की भीड़ ने थाना घेर लिया और जेल भेजने तक यह क्रम जारी रहा। मगर शाम होते ही जब अंतरराष्ट्रीय मार्केट से ट्रिपिंग कर नार्थ इंडिया के उग्रवादियों और हथियार तस्करों की मदद से अलीगढ़ तक पहुंचने वाली विदेशी पिस्टलों के इस सप्लायर रैकेट के पांच सदस्यों की विदेशी हथियारों सहित लखनऊ में गिरफ्तारी की खबर प्रसारित हुई तो सभी अवाक रह गए।
इससे पहले समर्थकों ने थाना, अस्पताल और जेल के बाहर पूर्व विधायक के समर्थन में जमकर हंगामा व नारेबाजी की।
पैदल गए अस्पताल, जीप से गए जेल
रात करीब साढ़े बारह बजे पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार कर जब थाने पहुंचाया गया तो थाने आकर राकेश सिंह ने परिजनों को सूचना देने की बात कही। इस पर उनकी पत्नी से बात कराई गई। इसके बाद उनकी पत्नी की सूचना पर परिजनों, करीबियों व समर्थकों का थाने पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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रात करीब तीन बजे एसटीएफ के थाने में रहने तक सभी को इधर उधर रखा गया। मगर एसटीएफ के जाने के बाद सभी मिलने को उतावले हुए। इस पर उन्हें एक-एक कर मिलवाया गया। इधर, सुबह होते ही भीड़ जमा हुई तो फिर दो-दो कर मुलाकात शुरू कराई गई। इस दौरान पूरे समय पूर्व विधायक इंस्पेक्टर रूम में मौजूद रहे। दोपहर करीब 11 बजे जब उन्हें गाड़ी से अस्पताल ले जाया जाने लगा तो भीड़ ने थाने का गेट घेरकर गाड़ी रोकने की कोशिश की।
गाड़ी को वापस अंदर ले जाना पड़ा। फिर समर्थकों संग वह पैदल अस्पताल पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी होती रही। इसके बाद वाहनों से काफिले संग उन्हें कचहरी पहुंचाया गया। जहां दोपहर तीन बजे तक जमानत प्रक्रिया न होने पर उन्हें सीजेएम परिसर में रखा गया। जमानत न मिलने पर उन्हें तीन बजे करीब जेल ले जाया गया। जहां समर्थकों ने जमकर राकेश सिंह के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान सीओ तृतीय संजीव दीक्षित, इंस्पेक्टर गांधीपार्क, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस, इंस्पेक्टर बन्नादेवी, क्यूआरटी आदि पूरी समय मौजूद रहे।
कोर्ट में नहीं टिके सियासी तर्क
सीजेएम न्यायालय में क्वार्सी पुलिस ने धारा 3/25 के तहत गिरफ्तारी दिखाकर राकेश सिंह को पेश किया। मगर अदालत में अधिवक्ताओं ने इस धारा में रिमांड न स्वीकार करने का यह कहते हुए विरोध किया कि यह आरोप बनता ही नहीं है, जबकि धारा गलत लगाई है। इस पर पुलिस ने सहवन (त्रुटिवस) प्रार्थना पत्र देकर विदेशी प्रतिबंधित हथियार रखने की धारा 7/25/1-क का रिमांड दाखिल किया। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और फिर उनकी ओर से दिया गया जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसके बाद एडीजे-प्रथम एमएल निगम के यहां दोपहर करीब ढाई बजे अंतरिम जमानत खारिज कर सुनवाई की अगली तारीख नियत करने के बाद उन्हें जेल भेजा गया। इस दौरान पूर्व विधायक की ओर से अधिवक्ता रामबाबू शर्मा, बुद्धपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह, गणेश शर्मा आदि ने बहस करते हुए तर्क दिए कि इन्हें सियासी साजिश के तहत फंसाया गया है। बहस के दौरान यह तर्क न टिके। इस मौके पर अधिवक्ता जेसी माहेश्वरी, पीके ठाकुर, जगदीश सारस्वत आदि भी मौजूद रहे।
चार दिन से चल रही थी रैकी
इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए लखनऊ एसटीएफ की टीम चार दिन से शहर में डेरा डाले हुए थी। लगातार टीमें यह होमवर्क कर रही थीं कि किस तरह कब कहां कैसे उठाया जाना है। कौन कब कहां मिल सकता है। इनमें नागेंद्र को लेकर भी पुलिस लगातार रैकी कर रही थी। चार दिन के ऑपरेशन को सोमवार रात उस समय पूरा किया गया, जब विधायक अकेले घर में प्रवेश किए और उनको यह पूर्ण विश्वास था कि अब वह अकेले हैं और हथियार भी मिलेगा।
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अक्सर सुर्खियों और विवादों में रहने वाला पुराना आरटीओ कंपाउंड और उसी परिसर में रहने वाले पूर्व विधायक ठा.राकेश सिंह की गिरफ्तारी की खबर भर से जिले में सियासी भूचाल आ गया था। जितने-मुंह उतनी बातें हो रही थीं।
मंगलवार सुबह से ही समर्थकों की भीड़ ने थाना घेर लिया और जेल भेजने तक यह क्रम जारी रहा। मगर शाम होते ही जब अंतरराष्ट्रीय मार्केट से ट्रिपिंग कर नार्थ इंडिया के उग्रवादियों और हथियार तस्करों की मदद से अलीगढ़ तक पहुंचने वाली विदेशी पिस्टलों के इस सप्लायर रैकेट के पांच सदस्यों की विदेशी हथियारों सहित लखनऊ में गिरफ्तारी की खबर प्रसारित हुई तो सभी अवाक रह गए।
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इससे पहले समर्थकों ने थाना, अस्पताल और जेल के बाहर पूर्व विधायक के समर्थन में जमकर हंगामा व नारेबाजी की।
पैदल गए अस्पताल, जीप से गए जेल
रात करीब साढ़े बारह बजे पूर्व विधायक ठा. राकेश सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार कर जब थाने पहुंचाया गया तो थाने आकर राकेश सिंह ने परिजनों को सूचना देने की बात कही। इस पर उनकी पत्नी से बात कराई गई। इसके बाद उनकी पत्नी की सूचना पर परिजनों, करीबियों व समर्थकों का थाने पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
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रात करीब तीन बजे एसटीएफ के थाने में रहने तक सभी को इधर उधर रखा गया। मगर एसटीएफ के जाने के बाद सभी मिलने को उतावले हुए। इस पर उन्हें एक-एक कर मिलवाया गया। इधर, सुबह होते ही भीड़ जमा हुई तो फिर दो-दो कर मुलाकात शुरू कराई गई। इस दौरान पूरे समय पूर्व विधायक इंस्पेक्टर रूम में मौजूद रहे। दोपहर करीब 11 बजे जब उन्हें गाड़ी से अस्पताल ले जाया जाने लगा तो भीड़ ने थाने का गेट घेरकर गाड़ी रोकने की कोशिश की।
गाड़ी को वापस अंदर ले जाना पड़ा। फिर समर्थकों संग वह पैदल अस्पताल पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी होती रही। इसके बाद वाहनों से काफिले संग उन्हें कचहरी पहुंचाया गया। जहां दोपहर तीन बजे तक जमानत प्रक्रिया न होने पर उन्हें सीजेएम परिसर में रखा गया। जमानत न मिलने पर उन्हें तीन बजे करीब जेल ले जाया गया। जहां समर्थकों ने जमकर राकेश सिंह के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान सीओ तृतीय संजीव दीक्षित, इंस्पेक्टर गांधीपार्क, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस, इंस्पेक्टर बन्नादेवी, क्यूआरटी आदि पूरी समय मौजूद रहे।
कोर्ट में नहीं टिके सियासी तर्क
सीजेएम न्यायालय में क्वार्सी पुलिस ने धारा 3/25 के तहत गिरफ्तारी दिखाकर राकेश सिंह को पेश किया। मगर अदालत में अधिवक्ताओं ने इस धारा में रिमांड न स्वीकार करने का यह कहते हुए विरोध किया कि यह आरोप बनता ही नहीं है, जबकि धारा गलत लगाई है। इस पर पुलिस ने सहवन (त्रुटिवस) प्रार्थना पत्र देकर विदेशी प्रतिबंधित हथियार रखने की धारा 7/25/1-क का रिमांड दाखिल किया। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और फिर उनकी ओर से दिया गया जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इसके बाद एडीजे-प्रथम एमएल निगम के यहां दोपहर करीब ढाई बजे अंतरिम जमानत खारिज कर सुनवाई की अगली तारीख नियत करने के बाद उन्हें जेल भेजा गया। इस दौरान पूर्व विधायक की ओर से अधिवक्ता रामबाबू शर्मा, बुद्धपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह, गणेश शर्मा आदि ने बहस करते हुए तर्क दिए कि इन्हें सियासी साजिश के तहत फंसाया गया है। बहस के दौरान यह तर्क न टिके। इस मौके पर अधिवक्ता जेसी माहेश्वरी, पीके ठाकुर, जगदीश सारस्वत आदि भी मौजूद रहे।
चार दिन से चल रही थी रैकी
इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए लखनऊ एसटीएफ की टीम चार दिन से शहर में डेरा डाले हुए थी। लगातार टीमें यह होमवर्क कर रही थीं कि किस तरह कब कहां कैसे उठाया जाना है। कौन कब कहां मिल सकता है। इनमें नागेंद्र को लेकर भी पुलिस लगातार रैकी कर रही थी। चार दिन के ऑपरेशन को सोमवार रात उस समय पूरा किया गया, जब विधायक अकेले घर में प्रवेश किए और उनको यह पूर्ण विश्वास था कि अब वह अकेले हैं और हथियार भी मिलेगा।