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नुमाइश में आ रहे कश्मीरियों पर होगी नजर-ᄋᄂ₩￧ᅦU￙￰¢₩￙

Sun, 14 Jan 2018 01:21 AM IST
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:21 AM IST
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नुमाइश में आ रहे कश्मीरियों पर होगी नजर-ᄋᄂ₩￧ᅦU￙￰¢₩￙
दीपक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
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प्रसिद्ध राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (नुमाइश) में हर साल अलीगढ़ आने वाले कश्मीरी दुकानदारों पर इस बार खुफिया एजेंसियों की खास नजर रहेगी।

ताजा मन्नान वानी मामले के अलावा इसका एक कारण यह भी है कि 23 साल पहले सिविल लाइन इलाके के दुकानदार द्वारा कश्मीर के श्रीनगर से शालों के गट्ठर में छिपाकर एके-56 रायफल मंगवाई गई थी। श्रीनगर में सराय शाही का रहने वाला शाल कारोबारी जावेद यूसुफ यह असलहा लेकर यहां आया था। इस बार नुमाइश इसी 20 जनवरी से शुरू हो रही है।

इस घटना में उस समय जावेद यूसुफ के अलावा सात अन्य लोगों के नाम भी प्रकाश में आए थे। थाना सिविल लाइन के रजिस्टर नंबर 4 में दर्ज है कि इस मामले में ऊपर कोट के चौक बुंदू खां निवासी सुहेब अख्तर पुत्र मोहम्मद अख्तर भी शामिल था। सभी के खिलाफ टाडा के तहत मामला दर्ज हुआ था।
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इस घटना के बाद बीच-बीच में अलीगढ़ और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रों का नाम पृथकतावादी गतिविधियों में आता रहा। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र किसी भी प्रकार की कोई शिथिलता बरतना नहीं चाहता है।
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23 साल पहले की उस घटना के सभी आरोपियों के बारे में विवरण जुटाया जा रहा है कि वह अब कहां हैं और क्या कर रहे हैं? नुमाइश में आने वाले कश्मीरी दुकानदारों का भी विवरण जुटाया जा रहा है। इन दुकानदारों में ऐसे भी परिवार हैं जो तीन -चार पीढ़ियों से यहां पर दुकान लगाने आते हैं।

खुफिया तंत्र का मानना है कि यह सही है कि दुकानदारों में से किसी का भी उस घटना के बाद कहीं नाम नहीं आया है, लेकिन एएमयू के शोध छात्र मन्नान वानी प्रकरण के बाद खुफिया तंत्र सभी पहलुओं को एक बार फिर से पुष्ट कर लेना चाहता है।


यह भी पता चला है कि 23 साल पहले हुई घटना का चौक बुंदू खां का आरोपी सन 1994 तक गोरखपुर जेल में बंद था। यहां से जमानत पर बाहर आया। इसके बाद उसका कोई पता नहीं चला। सन 2008 में खुफिया तंत्र को यह इनपुट मिला था कि वह फर्जी पासपोर्ट के सहारे किसी खाड़ी देश में है।

दिलचस्प बात यह है कि यह फर्जी पासपोर्ट दोदपुर के पते पर बना था। इस पासपोर्ट के बनने में स्थानीय खुफिया तंत्र की लापरवाही भी उजागर हुई थी।

एके-56 रायफल लाने की घटना के आरोपी
- जावेद यूसुफ पुत्र मो. यूसुफ, सराय शाही, श्रीनगर
- मो. शरीफ उर्फ शेख जावेद पुत्र अमरुद्दीन धौर्रा, हुड़िया खन्नूर पंजाब
- बरकत अहसानी पुत्र नियामत निवासी अमिर निशां, अलीगढ़
-सुहेब अख्तर पुत्र मो. अख्तर, निवासी चौक बुंदू खां ऊपर कोट, अलीगढ़
- यासीन पुत्र नजीर, सेंटर प्वाइंट अलीगढ़
- यासीन का नौकर रऊफ, धौर्रा माफी, अलीगढ़
- सज्जाद आलम पुत्र आलमगीर, रशीद मंजिल, मुजफ्फराबाद, पाकिस्तान
- गुलाम मोहम्मद बागरू (हिजबुल मुजाहिदीन का मारा गया कमांडर)
- मंजीत सिंह गिल उर्फ इकबाल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, कपूरथला पंजाब
- दीपक उर्फ साकिब उर्फ देवेंद्र, दयालपुर पंजाब
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