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अलीगढ़ः सवा साल में डेढ़ करोड़ रुपये भी खर्च नहीं कर सके माननीय
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आशीष श्रीवास्तव
विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जन प्रतिनिधि अपनी विधायक निधि का डेढ़ करोड़ रुपया भी खर्च नहीं कर पा रहे हैं। जिले में जर्जर सड़कें, पेयजल समेत अन्य समस्याओं के चलते रोजाना धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस सबके बावजूद विधायक विकास कार्यों के प्रस्ताव तक नहीं भेज पा रहे हैं। विधायक निधि के खर्च की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त, चिकित्सा, शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह अपनी विकास निधि का एक धेला भी खर्च नहीं कर सके हैं।
पूर्व मंत्री व विधायक बरौली ठा. दलवीर सिंह के खाते में 1.39 करोड़ तो विधायक कोल अनिल पाराशर के खाते में 1.06 करोड़ रुपया बाकी है। जिले के सात विधायकों और दो एमएलसी में से मात्र खैर व छर्रा विधायक ही पहली किश्त के रूप में मिला डेढ़ करोड़ रुपया शत प्रतिशत खर्च कर सके हैं। बाकी के खाते में अभी भी निधि का पैसा बचा हुआ है।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के तहत किसी भी विधायक को विकास कार्यों के लिये निधि नहीं मिली थी। इस साल उन्हें दो किश्तों में डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपया मिलना है। पहली किश्त का डेढ़ करोड़ रुपया मिल चुका है। दूसरी किश्त का पैसा आना बाकी है। फरवरी में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। विधायकों को अपनी निधि का पैसा आचार संहिता लगने से पहले खर्च करना होगा।
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लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सवा साल में विधायक अपनी निधि का पूरा पैसा खर्च नहीं कर सके तो शेष बचे करीब छह माह में यह कैसे खर्च होगा? यह बात दीगर है कि वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार के गठन के बाद के तीन सालों में मिला 5.50 करोड़ रुपया कुछेक को छोड़कर सभी ने खर्च कर लिया है। डीसी मनरेगा सचिन कुमार ने बताया कि जिले के दो जन प्रतिनिधियों ने इस वित्तीय वर्ष में मिली विधायक निधि का शत प्रतिशत इस्तेमाल कर लिया है। शेष की निधि का पैसा प्रस्तावों की कमी के चलते अभी खर्च नहीं हो सका है।
यह है वर्ष 2021-22 में मिली विधायक विकास निधि का हिसाब
-विधायक शहर : संजीव राजा-1.50 करोड़ मिला, 1.36 करोड़ खर्च, 13.53 लाख अवशेष।
-विधायक कोल : अनिल पाराशर-1.50 करोड़ मिला, 41630 रुपया खर्च, 1.06 करोड़ अवशेष।
-विधायक बरौली : ठा. दलवीर सिंह-1.50 करोड़ मिला, 10845 रुपया खर्च, 1.39 करोड़ अवशेष।
-विधायक खैर : अनूप प्रधान-1.50 करोड़ मिला, शत प्रतिशत खर्च, शून्य अवशेष।
-विधायक अतरौली संदीप सिंह : 1.50 करोड़ मिला, खर्च-शून्य, अवशेष 150 करोड़ रुपये।
-विधायक छर्रा : रवेंद्र पाल सिंह : 1.50 करोड़ मिला, शत प्रतिशत खर्च, शून्य अवशेष।
-विधायक इगलास : राजकुमार सहयोगी-1.50 करोड़ मिला, 1.45 करोड़ खर्च, 4.25 करोड़ अवशेष।
-एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह : 1.50 करोड़ मिला, 41 लाख खर्च, 1.09 करोड़ अवशेष।
-एमएलसी जयवीर सिंह : 1.50 करोड़ मिला, 7.17 लाख खर्च, 1.42 करोड़ अवशेष।
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विकास कार्यों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जन प्रतिनिधि अपनी विधायक निधि का डेढ़ करोड़ रुपया भी खर्च नहीं कर पा रहे हैं। जिले में जर्जर सड़कें, पेयजल समेत अन्य समस्याओं के चलते रोजाना धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस सबके बावजूद विधायक विकास कार्यों के प्रस्ताव तक नहीं भेज पा रहे हैं। विधायक निधि के खर्च की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्त, चिकित्सा, शिक्षा एवं प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह अपनी विकास निधि का एक धेला भी खर्च नहीं कर सके हैं।
पूर्व मंत्री व विधायक बरौली ठा. दलवीर सिंह के खाते में 1.39 करोड़ तो विधायक कोल अनिल पाराशर के खाते में 1.06 करोड़ रुपया बाकी है। जिले के सात विधायकों और दो एमएलसी में से मात्र खैर व छर्रा विधायक ही पहली किश्त के रूप में मिला डेढ़ करोड़ रुपया शत प्रतिशत खर्च कर सके हैं। बाकी के खाते में अभी भी निधि का पैसा बचा हुआ है।
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वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के तहत किसी भी विधायक को विकास कार्यों के लिये निधि नहीं मिली थी। इस साल उन्हें दो किश्तों में डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपया मिलना है। पहली किश्त का डेढ़ करोड़ रुपया मिल चुका है। दूसरी किश्त का पैसा आना बाकी है। फरवरी में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। विधायकों को अपनी निधि का पैसा आचार संहिता लगने से पहले खर्च करना होगा।
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लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सवा साल में विधायक अपनी निधि का पूरा पैसा खर्च नहीं कर सके तो शेष बचे करीब छह माह में यह कैसे खर्च होगा? यह बात दीगर है कि वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार के गठन के बाद के तीन सालों में मिला 5.50 करोड़ रुपया कुछेक को छोड़कर सभी ने खर्च कर लिया है। डीसी मनरेगा सचिन कुमार ने बताया कि जिले के दो जन प्रतिनिधियों ने इस वित्तीय वर्ष में मिली विधायक निधि का शत प्रतिशत इस्तेमाल कर लिया है। शेष की निधि का पैसा प्रस्तावों की कमी के चलते अभी खर्च नहीं हो सका है।
यह है वर्ष 2021-22 में मिली विधायक विकास निधि का हिसाब
-विधायक शहर : संजीव राजा-1.50 करोड़ मिला, 1.36 करोड़ खर्च, 13.53 लाख अवशेष।
-विधायक कोल : अनिल पाराशर-1.50 करोड़ मिला, 41630 रुपया खर्च, 1.06 करोड़ अवशेष।
-विधायक बरौली : ठा. दलवीर सिंह-1.50 करोड़ मिला, 10845 रुपया खर्च, 1.39 करोड़ अवशेष।
-विधायक खैर : अनूप प्रधान-1.50 करोड़ मिला, शत प्रतिशत खर्च, शून्य अवशेष।
-विधायक अतरौली संदीप सिंह : 1.50 करोड़ मिला, खर्च-शून्य, अवशेष 150 करोड़ रुपये।
-विधायक छर्रा : रवेंद्र पाल सिंह : 1.50 करोड़ मिला, शत प्रतिशत खर्च, शून्य अवशेष।
-विधायक इगलास : राजकुमार सहयोगी-1.50 करोड़ मिला, 1.45 करोड़ खर्च, 4.25 करोड़ अवशेष।
-एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह : 1.50 करोड़ मिला, 41 लाख खर्च, 1.09 करोड़ अवशेष।
-एमएलसी जयवीर सिंह : 1.50 करोड़ मिला, 7.17 लाख खर्च, 1.42 करोड़ अवशेष।