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डीएम की नाक के नीचे हो रहा है भ्रष्टाचार, दिखाई नहीं देता : सांसद
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शहर के नामचीन उद्यमी विजेंद्र कपूर की फैक्टरी सील करने एवं उनको गिरफ्तार किए जाने पर सांसद सतीश गौतम ने कड़ी आपत्ति जताई है। सांसद सतीश गौतम शराब कांड के लिए जिलाधिकारी एवं आबकारी विभाग को दोषी ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि अपनी गर्दन बचाने के लिए अधिकारी ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे वह होने नहीं देंगे। जिलाधिकारी के नाक के नीचे भ्रष्टाचार हो रहा है, वह दिखाई नहीं दे रहा है।
जहरीली शराब कांड के मामले में तालानगरी स्थित स्याही-सैनेटाइजर फैक्टरी में छापा मारा गया था। यह फैक्टरी शहर के नामचीन कारोबारी विजेंद्र कपूर की है। विजेंद्र कपूर विद्यानगर स्थित वैष्णव अपार्टमेंट में रहते हैं। इसी अपार्टमेंट में सांसद का भी फ्लैट है। सांसद सतीश गौतम ने विजेंद्र कपूर की फैक्टरी सील करने एवं पुलिस द्वारा हरदुआगंज थाने ले जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि निलंबित जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा के साथ छापा मारी होती है और फैक्टरी सील कर दी जाती है। बिना जांच एक प्रतिष्ठित उद्यमी की छवि खराब करना सही नहीं है।
अधिकारियों ने साक्ष्य दिखाने का भी अवसर विजेंद्र कपूर को नहीं दिया गया। सीओ अतरौली को भी यही कहा कि उनका उत्पीड़न न करें। पहले जांच करें, उसके बाद कोई कार्रवाई करें। सतीश गौतम का कहना है कि वह निर्दोष व्यापारी एवं उद्यमियों का उत्पीड़न नहीं होने देंगे। व्यापारियों की जांच हो सकती है तो अधिकारियों की जांच क्यों नहीं हो सकती। इनकी जांच के लिए अलग से टीम बननी चाहिए, जिसमें आईएएस न हो। किसी की मजाल है कि अधिकारियों की मर्जी के बिना एक भी शराब का ठेका चला सके।
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जहरीली शराब कांड के मामले में तालानगरी स्थित स्याही-सैनेटाइजर फैक्टरी में छापा मारा गया था। यह फैक्टरी शहर के नामचीन कारोबारी विजेंद्र कपूर की है। विजेंद्र कपूर विद्यानगर स्थित वैष्णव अपार्टमेंट में रहते हैं। इसी अपार्टमेंट में सांसद का भी फ्लैट है। सांसद सतीश गौतम ने विजेंद्र कपूर की फैक्टरी सील करने एवं पुलिस द्वारा हरदुआगंज थाने ले जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि निलंबित जिला आबकारी अधिकारी धीरज शर्मा के साथ छापा मारी होती है और फैक्टरी सील कर दी जाती है। बिना जांच एक प्रतिष्ठित उद्यमी की छवि खराब करना सही नहीं है।
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अधिकारियों ने साक्ष्य दिखाने का भी अवसर विजेंद्र कपूर को नहीं दिया गया। सीओ अतरौली को भी यही कहा कि उनका उत्पीड़न न करें। पहले जांच करें, उसके बाद कोई कार्रवाई करें। सतीश गौतम का कहना है कि वह निर्दोष व्यापारी एवं उद्यमियों का उत्पीड़न नहीं होने देंगे। व्यापारियों की जांच हो सकती है तो अधिकारियों की जांच क्यों नहीं हो सकती। इनकी जांच के लिए अलग से टीम बननी चाहिए, जिसमें आईएएस न हो। किसी की मजाल है कि अधिकारियों की मर्जी के बिना एक भी शराब का ठेका चला सके।
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