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अलीगढ़ः कोरोना ने छीना भाई-बहन का प्यार

Sat, 14 Aug 2021 12:36 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 12:36 AM IST
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Corona took away the love of brother and siste
इकराम वारिस
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कोरोना ने कई भाइयों से उनकी बहनों को तो कई बहनों से उनके भाइयों को छीन लिया है। ऐसे में इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर बहन का प्यार नहीं सजेगा, जबकि टीका के लिए बहन को भाई का ललाट नहीं मिलेगा। भाई से मिलने वाले शगुन को याद करके बहनें फफक पड़ती हैं, तो भाइयों की आंखें भी बहनों को याद करके नम हो जाती हैं। अब उनके जेहन में सिर्फ उनकी यादें रह गई हैं। फोटो एलबम, मोबाइल में सहेजी तस्वीर देखकर यादों की किताब खुलने लगती है। जैसे-जैसे तस्वीर आंखों से गुजरती जाती हैं, वैसे-वैसे आंखों से आंसू बहने शुरू हो जाते हैं। अब सिर्फ उनके पास यादें शेष हैं। रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर ऐसे ही कुछ भाइयों और बहनों ने अपने दर्द व यादों को साझा किया।
राखी तो है पर भाई की कलाई नहीं
मडराक निवासी मीनू व मंजू कहती हैं, भाई अमित कुमार (24) अब इस दुनिया में नहीं है। उसे कोरोना ने हमसे छीन लिया। अब वह कलाई नहीं है, जिस पर राखी बांधती थीं। वह इकलौता भाई था। कहा, इस रक्षाबंधन पर राखी तो है लेकिन भाई की कलाई नहीं है। अब किसको राखी बांधूंगी। वह सबसे छोटा था। उसे रक्षाबंधन का इंतजार रहता था। वह कहता था कि दीदी आएंगी तो उसकी कलाई पर उनका प्यार और आशीर्वाद सजेगा। भाई के दुनिया से यूं चले जाने से परिवार टूट गया है। यादें करके परिवार के सदस्य खूब रोते हैं। अमित एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट थे।
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भाई जहां भी हैं आशीर्वाद दे रहे हैं
प्राथमिक पाठशाला भगौसा, अकराबाद के सहायक अध्यापक प्रशांत उपाध्याय (49) 2 मई 2021 को कोरोना से जंग हार गए। मेरठ निवासी रिचा शर्मा ने बताया कि कोविड-19 के लक्षण पाए जाने पर भाई को प्राइवेट अस्पताल में 24 अप्रैल 2021 को भर्ती कराया गया था। उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर लौट आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। रक्षाबंधन के त्योहार का भाई-बहन को इंतजार रहता था। फोन पर भाई पूछते कि घर कब आ रही हो। भाई का यूं बिछड़ जाना रुला रहा है। उनकी कमी हमेशा खलेगी। भाई जहां भी हैं, वहां से आशीर्वाद दे रहे हैं।
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शगुन शब्द सुनने के लिए तरसेंगे कान
लोधी विहार सासनीगेट निवासी रंजना गुप्ता (48) कोरोना से लड़ाई हार गई थीं। रंजना के गांधीनगर निवासी भाई राजेश कुमार (शिक्षक, हीरालाल बारहसैनी इंटर कॉलेज) ने बताया कि कोरोना ने उनकी बहन को 3 मई 2021 को छीन लिया। रंजना, हमेशा कहती थी देखो भैया, रक्षाबंधन का त्योहार आ रहा है। शगुन देने के लिए तैयार रहिएगा। वह छोटी थी। उसकी बातें सुनने के बाद उसे आश्वस्त करता था कि हां बिल्कुल दूंगा, पहले घर तो आ जाओ। आते ही बोलती थी शगुन तैयार है कि नहीं। उसकी बातें सुनकर सब हंसने लगते। अब ये शब्द सुनने के लिए कान तरसेंगे।

सगे भाइयों जैसा स्नेह देते थे टिंकू
अलीगढ़ के गांव कलाई निवासी टिंकू अग्रवाल अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्हें कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया था। टिंकू अग्रवाल के दो और भाई हैं, लेकिन सगी बहन नहीं है। पड़ोसी अग्रवाल व जैन परिवार में घनिष्ठता होने के चलते सुनीता जैन (वर्तमान निवासी रोहिणी, दिल्ली) तीनों भाइयों को राखी बांधने लगी थीं। भाइयों को भी सुनीता के रूप में बहन मिल गई। सुनीता ने बताया कि टिंकू की कमी हमेशा महसूस होगी। टिंकू का हंसता-खेलता चेहरा उनकी आंखों के सामने घूमने लगा। मुंहबोले नहीं, बल्कि सगे भाइयों जैसा उन्हें स्नेह देते थे।

अमित कुमार को राखी बांधती बहन मंजू ।

अमित कुमार को राखी बांधती बहन मंजू ।- फोटो : CITY OFFICE

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