दर्द: राजनीति नहीं मदद चाहिए, नेता आते हैं और फोटो खिंचवाकर चले जाते, मीट व्यापारियों में एक की हालत बिगड़ी
पीटे गए मीट व्यापरियों को देखने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और एनजीओ पदाधिकारी आए। वहीं घायल और उनके परिजनों का कहना है कि नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने और वीडियो बनवाने आते हैं, जबकि उन्हें इस समय दवा, सही इलाज और आर्थिक मदद की जरूरत है।
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अलीगढ़ के अलहदादपुर में भीड़ के हमले से गंभीर रूप से घायल हुए चारों मीट व्यापारी जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएन मेडिकल कॉलेज) में भर्ती हैं। पिछले सात दिनों से अस्पताल में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और एनजीओ पदाधिकारियों का आना जाना लगा हुआ है। मदद को बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं। वहीं घायल और उनके परिजनों का कहना है कि नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने और वीडियो बनवाने आते हैं, जबकि उन्हें इस समय दवा, सही इलाज और आर्थिक मदद की जरूरत है।
घायल और उनके परिवारों के अनुसार, नेता यहां आकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और आश्वासन देते हैं कि उनकी बात संसद तक पहुंचेगी। लेकिन संसद से पहले उन्हें तत्काल इलाज और आर्थिक सहायता की जरूरत है। सिर्फ आश्वासनों से परिवार की कोई मदद नहीं होती है। घायल कदीम ने बताया कि नेताओं ने कैमरों के सामने बड़े-बड़े बयान दिए, लेकिन उनके जाने के बाद किसी ने यह भी नहीं पूछा कि उन्हें अस्पताल से दवा मिल रही है या नहीं।
एक अन्य घायल अरबाज ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि जब नेता आते हैं तो उनके साथ भीड़ आती है और वे कैमरों के सामने बड़े-बड़े बयान दे रहे होते हैं। उनके जाने के बाद तो डॉक्टर भी देखने नहीं आते। घायल की बहन निशा ने तंज कसते हुए कहा कि जितनी नेतागिरी हो रही है, अगर उतनी संजीदगी से इलाज हो, तो अब तक बहुत राहत मिल जाती।
घायल अकील के पिता सलीम कुरैशी ने घटना के दिन हुए नुकसान का जिक्र करते हुए बताया कि 24 मई को उनका 3.50 लाख रुपये का माल (मीट) भी बर्बाद हो गया, पैसे और मोबाइल भी लूट लिए गए। घर के लोग अस्पताल में हैं और उन्हें दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंने सबसे बड़ी जरूरत आर्थिक मदद को बताया, जो किसी भी नेता से नहीं मिली है। घायल अकील ड्राइवर के भाई आसिफ कहते हैं कि इस तरह सांत्वना के नाम पर संवेदनहीनता और सिर्फ दिखावे की राजनीति हो रही है जबकि पीड़ित परिवार इलाज और आर्थिक सहायता के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
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घायलों में एक मीट व्यापारी की हालत बिगड़ी, आईसीयू में भर्ती
24 मई को अलहदाद पुर में भीड़ के हमले में बुरी तरह घायल हुए अतरौली के चार मीट व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। एक घायल अकील ड्राइवर की गंभीर हालत होने पर उसके परिजन उसे निजी नर्सिंग होम में ले गए हैं, जहां वह आईसीयू में भर्ती है। अन्य तीन घायलों का कहना है कि उनको अपने पैसे खर्च कर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। एक-एक घायल का 80-80 हजार रुपये तक खर्चा हो चुका है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन घायलों पर डिस्चार्ज हो जाने के लिए दबाव बना रहा है।
घायल अकील ड्राइवर की बुधवार रात को बिगड़ी तबीयत
गंभीर घायल अकील ड्राइवर के भाई आसिफ कहते हैं कि बुधवार की रात उनके भाई को मेडिकल कॉलेज में उल्टी हुई। कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। घर वालों से सलाह की तो यही तय हुआ कि अगर जान बचानी है तो प्राइवेट नर्सिंग होम में ले चलो। वहां पर उमस के मारे बुरा हाल था। दवाएं तक हमें अपने पैसे से खरीदनी पड़ रही थीं। कोई सुनने वाला नहीं था।
घायल कदीम बोले... हर 12 घंटे बाद डिस्चार्ज स्लिप लेकर आ जाते हैं
घायल कदीम ने बताया कि अभी उसके सिर के जख्मों से खून रिस रहा है। कानों में दर्द है। बैठा नहीं जाता है। इसके बाद भी अस्पताल के लोग हर 12 घंटे बाद डिस्चार्ज स्लिप लेकर आ जाते हैं। अस्पताल में दवाएं तक नहीं मिल रही हैं। अब तक 70 हजार रुपये अपने पास से खर्च किए हैं। काम बंद है। परिवार का पैसा खर्च हुआ है।
अरबाज ने कहा मेरा होंठ फटा है जबड़ा हिला है, दवाएं नहीं दे रहे
घायल अरबाज ने कहा मेरा होंठ बुरी तरह फटा है। जबड़ा हिला है। मुझे अस्पताल से दवाएं नहीं मिल रही हैं। घर में जमा पैसों से दवाएं खरीदी हैं। यहां पर डॉक्टर देखने तक नहीं आ रहे हैं। नेता लोग आए फोटो खिंचवाए, वीडियो बनवाई और चले गए लेकिन पैसे से मदद के नाम पर कुछ नहीं मिला।
हमने चारों घायलों की जांच की। सभी की हालत खतरे से बाहर है। सभी को बुधवार को ही डिस्चार्ज कर दिया गया है। सभी का इलाज चिकित्सा मैनुअल के अनुसार किया गया है। - प्रो. अमजद अली रिजवी, चिकित्सा अधीक्षक, जेएन मेडिकल कॉलेज