Chhath: 36 घंटे का व्रत किया पूरा, बोलीं महिलाएं- मन में खुशी अपार, छठी मइया दर्शन से भईल निहाल
छठ महापर्व के चौथे दिन 8 नवंबर को व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख- समृद्धि की कामना की।
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सिर पर प्रसाद की टोकरी, शीतल धरती पर नंगे पांव, कदम घाट की ओर आगे बढ़ रहे थे। छठ मइया के गीत गाते हुए महिलाएं घाट की ओर बढ़ रही थीं। उगते सूर्यदेव को अर्घ्य देने की इतनी बेताबी थी कि तड़के तीन बजे ही घरों से महिलाएं निकल पड़ीं। टीकाराम मंदिर और बदरबाग रेलवे कॉलोनी के घाट झालरों और लाइटों के प्रकाश से नहा उठे थे। वेदी पर दीपक जगमग हो उठे थे। बिहार और पूर्वांचल की कमी यह घाट पूरा कर रहे थे।
छठ महापर्व के चौथे दिन 8 नवंबर को व्रतियों ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख- समृद्धि की कामना की। अर्घ्य देने के लिए व्रतियों ने बांस की टोकरी और सूप में जल, दूध, मिठाई, अनाज, पकवान आदि सजाकर रखे थे। अर्घ्य देकर एक- दूसरे को प्रसादी बांटी। इसके बाद व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत का परायण किया। व्रतधारियों ने अगले बरसिया जल्दी अइहा हे छठ मइया... कह दे पूरी अरजिया हमार, मन में खुशी अपार, छठ मइया दर्शन से भईल निहाल... जैसे गीत गाते हुए छठ माता का गुणगान किया।
लोक आस्था का महापर्व छठ 5 नवंबर को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हुआ था। 6 नवंबर से खरना के साथ व्रतियों ने लगातार 36 घंटे का संकल्प ले रखा था। 7 नवंबर को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। इसलिए सभी को 8 नवंबर को उदय होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने की बेसब्री से प्रतीक्षा थी। रात भर महिलाओं ने परिवार के साथ छठ मइया के गीत गाए। तड़के तीन बने डाला सजाकर घाटों की ओर चलने की तैयारियां शुरू हो गई। सुबह का समय होने से मौसम में ठंडक थी, मगर इससे भी अधिक लोगों में अपार आस्था थी।
महिलाएं और परिवार के सदस्य नंगे पांव ही घाटों की ओर बढ़ रहे थे। हाथों में गन्ने थे, सिर पर प्रसाद की टोकरी में सिंघाड़ा, मूली, सेब, अमरूद, गाजर आदि मौसमी फल और सब्जियां व ठेकुआ प्रसाद रखा गया था। सेंटर प्वाइंट के टीकाराम मंदिर व बदरबाग पहुंचते ही आस्था का सैलाव उमड़ पड़ा। घाटों पर पहुंचकर व्रतियों ने वेदी पूजन किया। फिर सभी सूर्यदेव के उदय होने का इंतजार करते रहे। लालिमा लिए सूर्यदेव की आगवानी हुई तो डाला लिए व्रती घाट में पहुंच गई। धूप-दीप जलाकर आरती की और छठी मइया से प्रार्थना की।
सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और छठ माता की सुख-समृद्धि की कामना की। सभी ने अगले साल फिर से छठ मईया से आने की मंगल कामना की। इसके वाद व्रतियों ने घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद बांटा। इसके बाद घर पर पहुंचकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का परायण किया। टीकाराम मंदिर के पुजारी राजू पंडित ने बताया कि इस बार लोगों में छठ मईया के व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
सोशल मीडिया पर छाया पर्व
छठ मइया के पर्व को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने एक-दूसेर को शुभकामना संदेश का आदान-प्रदान किया। बच्चों ने अर्घ्य देने के समय सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर शेयर भी किया तो दूर बैठे रिश्तेदारों को फोन कर छठ पर्व की शुभकामनाएं दी।