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बापू ने हमेशा की दलितों के हित की बात
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:16 AM IST
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कार्यक्रम को संबोधित करते प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब।
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विवेक बंसल ने रामघाट रोड स्थित शुभम समागम बैंक्वेट हॉल में महात्मा गांधी स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें अलीगढ़ महानगर के बुद्धिजीवी वर्ग के नागरिकों ने उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपिता के जीवन पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। विवेक बंसल ने कार्यक्रम संचालित करते हुए मुख्य अतिथि व प्रमुख वक्ता प्रो. इरफ ान हबीब व अलीगढ़ के सुप्रसिद्ध कवि व गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का स्वागत करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्र ीका से अंग्रेजों का विरोध करना शुरू किया था।
उनके समर्थन में गोपाल कृष्ण गोखले, बाल गंगाधर तिलक आदि खड़े हुए। बापू ने हमेशा दलितों के हित की बात की उन्होंने प्रांतीय असेंबलियों में आरक्षण दिलाया और केंद्रीय असेंबली में अंग्रेजों की मर्जी के बिना 18 प्रतिशत आरक्षण दिलाया। उन पर अंग्रेजों के साथ हुए पूना समझौते को लेकर आरोप लगाए गए और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के साथ उनके मतभेद की भी खबर उड़ाई गई। यदि उनमें मतभेद होते तो बाबा साहब संविधान में बापू द्वारा दिए गए प्रावधानों को सम्मिलित नहीं करते। वर्ष 1916, 1920 व 1931 में अलीगढ़ आये थे और खिलाफ त आंदोलनों में भाग लिया था।
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वास्तव में बापू देश के सच्चे सपूत थे। उन्होंने न सिर्फ देश की आजादी के आंदोलन का समर्थन किया अपितु देश में छुआ छूत व जातिवाद पर आधारित सामाजिक ढांचे को बदलने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्य वक्ता प्रो इरफ़ ान हबीब ने कहा कि महात्मा गांधी एक ऐसी शख्सियत थे जिसने पूरे विश्व में रंगभेद के विरुद्ध आवाज उठायी। उनकी आवाज की बदौलत जिन देशों में अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था वहां वे लोग श्वेतों के साथ बराबरी का दर्जा पा सकें।
दक्षिण अफ्र ीका जहां अश्वेतों की आबादी भारी बहुमत में थी और शासन श्वेत कर रहे थे, वहां गांधी की प्रेरणा से अंग्रेजों के विरुद्ध ऐसा आंदोलन चला कि अंग्रेजों को मजबूर होकर अश्वेतों को सत्ता में भागीदारी देनी पड़ी, जो आगे चलकर पूर्ण सत्ता में बदल गई। डॉ. हमवीर सिंह, डॉ. अब्दुल सत्यभान, प्रो. मोहम्मद अफ़ ज़ाल खान, डॉ. विपिन कुमार वार्ष्णेय, डॉ. नजमुद्दीन अंसारी, प्रो एम मुबारक हुसैन, डॉ. चंद्रहास, जॉनी फ ॉस्टर, संदीप जैन एड, रूही खान, सुषमा शर्मा एड, बॉबी, लाल, विजय लक्ष्मी सिंह, राम सिंह, एसएम शहरोज हरिकांत शर्मा, सुरेश पचौरी, मजहर उल कमर, इशरत आलम, हसीं अहमद, इम्तियाज़ हसनैन, सलाउद्दीन कुरैशी, सर्वेश कुमार, अनिल कुमार अग्रवाल आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
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इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपिता के जीवन पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। विवेक बंसल ने कार्यक्रम संचालित करते हुए मुख्य अतिथि व प्रमुख वक्ता प्रो. इरफ ान हबीब व अलीगढ़ के सुप्रसिद्ध कवि व गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का स्वागत करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्र ीका से अंग्रेजों का विरोध करना शुरू किया था।
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उनके समर्थन में गोपाल कृष्ण गोखले, बाल गंगाधर तिलक आदि खड़े हुए। बापू ने हमेशा दलितों के हित की बात की उन्होंने प्रांतीय असेंबलियों में आरक्षण दिलाया और केंद्रीय असेंबली में अंग्रेजों की मर्जी के बिना 18 प्रतिशत आरक्षण दिलाया। उन पर अंग्रेजों के साथ हुए पूना समझौते को लेकर आरोप लगाए गए और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के साथ उनके मतभेद की भी खबर उड़ाई गई। यदि उनमें मतभेद होते तो बाबा साहब संविधान में बापू द्वारा दिए गए प्रावधानों को सम्मिलित नहीं करते। वर्ष 1916, 1920 व 1931 में अलीगढ़ आये थे और खिलाफ त आंदोलनों में भाग लिया था।
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वास्तव में बापू देश के सच्चे सपूत थे। उन्होंने न सिर्फ देश की आजादी के आंदोलन का समर्थन किया अपितु देश में छुआ छूत व जातिवाद पर आधारित सामाजिक ढांचे को बदलने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्य वक्ता प्रो इरफ़ ान हबीब ने कहा कि महात्मा गांधी एक ऐसी शख्सियत थे जिसने पूरे विश्व में रंगभेद के विरुद्ध आवाज उठायी। उनकी आवाज की बदौलत जिन देशों में अश्वेतों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था वहां वे लोग श्वेतों के साथ बराबरी का दर्जा पा सकें।
दक्षिण अफ्र ीका जहां अश्वेतों की आबादी भारी बहुमत में थी और शासन श्वेत कर रहे थे, वहां गांधी की प्रेरणा से अंग्रेजों के विरुद्ध ऐसा आंदोलन चला कि अंग्रेजों को मजबूर होकर अश्वेतों को सत्ता में भागीदारी देनी पड़ी, जो आगे चलकर पूर्ण सत्ता में बदल गई। डॉ. हमवीर सिंह, डॉ. अब्दुल सत्यभान, प्रो. मोहम्मद अफ़ ज़ाल खान, डॉ. विपिन कुमार वार्ष्णेय, डॉ. नजमुद्दीन अंसारी, प्रो एम मुबारक हुसैन, डॉ. चंद्रहास, जॉनी फ ॉस्टर, संदीप जैन एड, रूही खान, सुषमा शर्मा एड, बॉबी, लाल, विजय लक्ष्मी सिंह, राम सिंह, एसएम शहरोज हरिकांत शर्मा, सुरेश पचौरी, मजहर उल कमर, इशरत आलम, हसीं अहमद, इम्तियाज़ हसनैन, सलाउद्दीन कुरैशी, सर्वेश कुमार, अनिल कुमार अग्रवाल आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे।