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एएमयू छात्रसंघ ने दी थी राजनारायण और बहुगुणा को आजीवन सदस्यता
Fri, 12 Jun 2020 12:50 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क,दीपक शर्मा , अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क,दीपक शर्मा , अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Fri, 12 Jun 2020 12:50 AM IST
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एएमयू
- फोटो : Amar Ujala
साढे़ चार दशक पहले 12 जून, आज ही के दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद 1975 में देश में इमरजेंसी लगाने की जमीन तैयार हो गई थी। 9 दिन बाद 21 जून को देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था। उस दौरान आपातकाल के दो बड़े नेताओं राजनारायण और एचएन बहुगुणा को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ ने अपने यहां आजीवन सदस्यता दी।
एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि एएमयू समुदाय उस समय इंदिरा गांधी के खिलाफ था, क्योंकि इंदिरा ने 1972 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक्ट में बदलाव कर दिया था। जिसके खिलाफ लंबा आंदोलन चला। इमरजेंसी के दौरान ही विश्वविद्यालय छात्र संघ के तत्कालीन सचिव आजम खां और अध्यक्ष आरिफ मोहम्मद खान जेल गए थे।
राजनारायण को आजीवन सदस्यता देने वाले समारोह में प्रत्यक्षदर्शी रहे एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही। इंदिरा गांधी के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले नेता राजनारायण ने विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं को चुनाव भी लड़वाया।
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सहारनपुर के रहने वाले छात्र संघ के पूर्व सचिव एसएम आरिफ को राजनारायण ने एटा से चुनाव लड़वाया। इसी तरह पूर्व छात्रों को भी चुनाव के मैदान में उतारा। राजनारायण उस समय कैंपस में बहुत लोकप्रिय हो गए थे। इसलिए विश्वविद्यालय के इतिहास में 12 जून की तारीख एक अहम मुकाम है। उस समय प्रोफेसर एएम खुसरो वाइस चांसलर थे और इंदिरा गांधी के विश्वासपात्र मो. यूनुस एएमयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में सदस्य थे।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी कहते हैं कि यह तारीख है, हमें सिखाती है कि लोकतंत्र की कीमत क्या है। आपातकाल सिर्फ एक खास अवधि नहीं है बल्कि परीक्षा और प्रयोग का वह दौर है, जिससे हमें अपनी व्यवस्था की प्रासंगिकता समझ में आती है। आज के समय फिर से वैसी ही परिस्थितियां बन रही हैं और एक बार फिर से उसी प्रकार के प्रतिरोध की आवश्यकता है।
यह था घटनाक्रम
1971 के आम चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और अन्य प्रकार की अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को विपक्षी नेता राज नारायण में इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। 12 जून 1975 को हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव अमान्य करार कर दिया। यहीं से इमरजेंसी की जमीन तैयार हो गई और 21 जून 1975 को आपातकाल घोषित कर दिया गया।
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एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि एएमयू समुदाय उस समय इंदिरा गांधी के खिलाफ था, क्योंकि इंदिरा ने 1972 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक्ट में बदलाव कर दिया था। जिसके खिलाफ लंबा आंदोलन चला। इमरजेंसी के दौरान ही विश्वविद्यालय छात्र संघ के तत्कालीन सचिव आजम खां और अध्यक्ष आरिफ मोहम्मद खान जेल गए थे।
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राजनारायण को आजीवन सदस्यता देने वाले समारोह में प्रत्यक्षदर्शी रहे एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि यह बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही। इंदिरा गांधी के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले नेता राजनारायण ने विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं को चुनाव भी लड़वाया।
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सहारनपुर के रहने वाले छात्र संघ के पूर्व सचिव एसएम आरिफ को राजनारायण ने एटा से चुनाव लड़वाया। इसी तरह पूर्व छात्रों को भी चुनाव के मैदान में उतारा। राजनारायण उस समय कैंपस में बहुत लोकप्रिय हो गए थे। इसलिए विश्वविद्यालय के इतिहास में 12 जून की तारीख एक अहम मुकाम है। उस समय प्रोफेसर एएम खुसरो वाइस चांसलर थे और इंदिरा गांधी के विश्वासपात्र मो. यूनुस एएमयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल में सदस्य थे।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी कहते हैं कि यह तारीख है, हमें सिखाती है कि लोकतंत्र की कीमत क्या है। आपातकाल सिर्फ एक खास अवधि नहीं है बल्कि परीक्षा और प्रयोग का वह दौर है, जिससे हमें अपनी व्यवस्था की प्रासंगिकता समझ में आती है। आज के समय फिर से वैसी ही परिस्थितियां बन रही हैं और एक बार फिर से उसी प्रकार के प्रतिरोध की आवश्यकता है।
यह था घटनाक्रम
1971 के आम चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और अन्य प्रकार की अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को विपक्षी नेता राज नारायण में इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। 12 जून 1975 को हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का चुनाव अमान्य करार कर दिया। यहीं से इमरजेंसी की जमीन तैयार हो गई और 21 जून 1975 को आपातकाल घोषित कर दिया गया।