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कासगंज दंगे के खिलाफ तिरंगे लेकर निकले एएमयू छात्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
Updated Wed, 31 Jan 2018 02:05 AM IST
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कासगंज प्रकरण को लेकर मार्च निकाल बाब-ए-सैयद पर प्रदर्शन करते एएमयू छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज दंगे के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्र दोपहर करीब ढाई बजे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर सड़क पर उतरे। इस दौरान ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। छात्रों ने पुलिस-प्रशासन पर मुसलमानों के ऊपर जुल्म करने एवं बेगुनाहों को फंसाने का आरोप लगाते हुए दंगा की सीबीआई जांच कराने की मांग की। इस दौरान मोदी, योगी, आरएसएस एवं भाजपा उनके निशाने पर रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एएमयू कैंपस के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
कासगंज दंगे के विरोध में एएमयू छात्र संघ द्वारा मौलाना आजाद लाइब्रेरी से कलक्ट्रेट तक मार्च निकालने का एलान किया गया था। इसकी भनक लगने के बाद सुबह से ही पुलिस अधिकारी एवं एएमयू प्रशासन के लोग सक्रिय हो गए थे। छात्र नेताओं से बात कर किसी तरह उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय तक आकर प्रदर्शन करने पर राजी किया गया। एहतियात के तौर पर बाब-ए-सैयद से लेकर एएमयू सर्किल तक भारी संख्या में पुलिस-फोर्स तैनात कर दी गई थी।
दोपहर करीब ढाई बजे छात्र हाथ में तिरंगा एवं एएमयू का झंडा तथा नारे लिखे तख्तियां लेकर मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन से निकले। रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने आरएएफ एवं पुलिस के जवान रोड रोक कर तैनात थे ताकि उससे आगे (सर्किल या कलक्ट्रेट तक) जाने से उनको रोका जा सके। कुछ छात्र पुलिस बैरियर पार कर सर्किल तक जाना चाहते थे लेकिन छात्र नेताओं की सजगता के कारण उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय के पहले ही रोक दिया गया। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि सरकार चंदन के परिजनों को 50 लाख रुपये दे, हमें एतराज नहीं है। दंगा में घायल अकरम एवं अन्य लोगों को 20-20 लाख रुपये दिये जाए। उन्होंने कहा कि गांधी को मारने वालों ने ही कासगंज को जलाया है। नाम देख-देख कर दुकानों को जलाया गया। उन्होंने कहा कि दंगा में एक आंख गवां चुका अकरम शांति की अपील कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि हमारे पास भगवा नहीं, तिरंगा है। हम हिंदुस्तान से प्यार करते है। बीजेपी के लोगों को शर्म करना चाहिए। एएमयू छात्र संघ के सचिव मो. फहद ने कहा कि दंगे के नाम पर गलत लोगों को फंसाया जा रहा है। एएमयू का एक पूर्व छात्र जो अलीगढ़ में कोचिंग करता है और दंगे के दिन भी अलीगढ़ में था, उसको भी फंसाया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले सबूत चाहिए, उसके बाद ही किसी की गिरफ्तारी होने देंगे। इंसाफ नहीं मिला तो हम चुप नहीं बैठेंगे। बाद में छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को दिया, जिसमें सांप्रदायिक हिंसा के कारणों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन की भूमिका एवं दंगा पीड़ितों को मुआवजा आदि की मांग की गई है। इस दौरान एसएसपी राजेश कुमार पांडेय, एसडीएम सिटी एसबी सिंह, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, एएमयू प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान, डीएसडब्ल्यू प्रो. जमशेद सिद्दीकी, डिप्टी प्रॉक्टर प्रो. मो. अहमद आदि दल-बल के साथ मौजूद थे। प्रदर्शन के काफी देर बाद तक एसएसपी राजेश पांडेय एहतियातन सर्किल के पास खड़े रहे।
निशाने पर रही भाजपा सरकार
‘तिरंगा हमारी शान है’, ‘हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई’ जैसे स्लोगन लिखी तख्तियों के साथ मार्च कर रहे एएमयू के छात्रों ने मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाले लोगों को भी करारा जवाब दिया। हालांकि इस दौरान भाजपा, संघ, मोदी एवं योगी सरकार के खिलाफ भी नारे लगे। यह सवाल भी उठाया गया कि देश के सबसे बड़े दुश्मन चीन के खिलाफ भाजपाई मुर्दाबाद के नारे क्यों नहीं लगाते। कासगंज दंगे के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों के मार्च का नजारा भाजपा या आरएसएस से जुड़े संगठनों के तिरंगा जुलूस की तरह ही था। बस फर्क यह था कि इसमें भाजपा, संघ, मोदी एवं योगी आदि के खिलाफ नारे लग रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जताया कि उन्हें हिंदुस्तान एवं तिरंगा से हमेशा बेहद प्यार रहा है। छात्र नेताओं ने सवाल उठाया कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन चीन है। भाजपाई ‘चीन मुर्दाबाद’ के नारे क्यों नहीं लगाते। मुस्लिम इलाकों में जाकर चिढ़ाने के पीछे के कारणों को समझना होगा। भाजपा सरकार पर दंगा फैलाने का आरोप भी छात्र नेताओं ने लगाए। कासगंज दंगे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। छात्रों के निशाने पर यूपी पुलिस भी रही।
‘पाकिस्तान’ पर फिसली जुबान
मार्च के दौरान एक युवक ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगा दिया। दरअसल रजिस्ट्रार कार्यालय के पहले प्रदर्शन सभा को संबोधित करने जब एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन पहुंचे तो एक छात्र की जुबान फिसल गई। वह ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का उच्चारण कर गया। लेकिन पूरा नारा लगाने से पहले वह संभल गया और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगा। इस संबंध में फैजुल हसन का कहना है कि मानवीय भूल के कारण ऐसा हुआ। दरअसल युवक की जुबान तो फिसली पर उसने तुरंत सुधार कर लिया।
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कासगंज दंगे के विरोध में एएमयू छात्र संघ द्वारा मौलाना आजाद लाइब्रेरी से कलक्ट्रेट तक मार्च निकालने का एलान किया गया था। इसकी भनक लगने के बाद सुबह से ही पुलिस अधिकारी एवं एएमयू प्रशासन के लोग सक्रिय हो गए थे। छात्र नेताओं से बात कर किसी तरह उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय तक आकर प्रदर्शन करने पर राजी किया गया। एहतियात के तौर पर बाब-ए-सैयद से लेकर एएमयू सर्किल तक भारी संख्या में पुलिस-फोर्स तैनात कर दी गई थी।
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दोपहर करीब ढाई बजे छात्र हाथ में तिरंगा एवं एएमयू का झंडा तथा नारे लिखे तख्तियां लेकर मौलाना आजाद लाइब्रेरी कैंटीन से निकले। रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने आरएएफ एवं पुलिस के जवान रोड रोक कर तैनात थे ताकि उससे आगे (सर्किल या कलक्ट्रेट तक) जाने से उनको रोका जा सके। कुछ छात्र पुलिस बैरियर पार कर सर्किल तक जाना चाहते थे लेकिन छात्र नेताओं की सजगता के कारण उन्हें रजिस्ट्रार कार्यालय के पहले ही रोक दिया गया। एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि सरकार चंदन के परिजनों को 50 लाख रुपये दे, हमें एतराज नहीं है। दंगा में घायल अकरम एवं अन्य लोगों को 20-20 लाख रुपये दिये जाए। उन्होंने कहा कि गांधी को मारने वालों ने ही कासगंज को जलाया है। नाम देख-देख कर दुकानों को जलाया गया। उन्होंने कहा कि दंगा में एक आंख गवां चुका अकरम शांति की अपील कर रहा है।
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उन्होंने कहा कि हमारे पास भगवा नहीं, तिरंगा है। हम हिंदुस्तान से प्यार करते है। बीजेपी के लोगों को शर्म करना चाहिए। एएमयू छात्र संघ के सचिव मो. फहद ने कहा कि दंगे के नाम पर गलत लोगों को फंसाया जा रहा है। एएमयू का एक पूर्व छात्र जो अलीगढ़ में कोचिंग करता है और दंगे के दिन भी अलीगढ़ में था, उसको भी फंसाया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले सबूत चाहिए, उसके बाद ही किसी की गिरफ्तारी होने देंगे। इंसाफ नहीं मिला तो हम चुप नहीं बैठेंगे। बाद में छात्र नेताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को दिया, जिसमें सांप्रदायिक हिंसा के कारणों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन की भूमिका एवं दंगा पीड़ितों को मुआवजा आदि की मांग की गई है। इस दौरान एसएसपी राजेश कुमार पांडेय, एसडीएम सिटी एसबी सिंह, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, एएमयू प्रॉक्टर प्रो. एम मोहसिन खान, डीएसडब्ल्यू प्रो. जमशेद सिद्दीकी, डिप्टी प्रॉक्टर प्रो. मो. अहमद आदि दल-बल के साथ मौजूद थे। प्रदर्शन के काफी देर बाद तक एसएसपी राजेश पांडेय एहतियातन सर्किल के पास खड़े रहे।
निशाने पर रही भाजपा सरकार
‘तिरंगा हमारी शान है’, ‘हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई’ जैसे स्लोगन लिखी तख्तियों के साथ मार्च कर रहे एएमयू के छात्रों ने मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाले लोगों को भी करारा जवाब दिया। हालांकि इस दौरान भाजपा, संघ, मोदी एवं योगी सरकार के खिलाफ भी नारे लगे। यह सवाल भी उठाया गया कि देश के सबसे बड़े दुश्मन चीन के खिलाफ भाजपाई मुर्दाबाद के नारे क्यों नहीं लगाते। कासगंज दंगे के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों के मार्च का नजारा भाजपा या आरएसएस से जुड़े संगठनों के तिरंगा जुलूस की तरह ही था। बस फर्क यह था कि इसमें भाजपा, संघ, मोदी एवं योगी आदि के खिलाफ नारे लग रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने जताया कि उन्हें हिंदुस्तान एवं तिरंगा से हमेशा बेहद प्यार रहा है। छात्र नेताओं ने सवाल उठाया कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन चीन है। भाजपाई ‘चीन मुर्दाबाद’ के नारे क्यों नहीं लगाते। मुस्लिम इलाकों में जाकर चिढ़ाने के पीछे के कारणों को समझना होगा। भाजपा सरकार पर दंगा फैलाने का आरोप भी छात्र नेताओं ने लगाए। कासगंज दंगे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए। छात्रों के निशाने पर यूपी पुलिस भी रही।
‘पाकिस्तान’ पर फिसली जुबान
मार्च के दौरान एक युवक ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगा दिया। दरअसल रजिस्ट्रार कार्यालय के पहले प्रदर्शन सभा को संबोधित करने जब एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन पहुंचे तो एक छात्र की जुबान फिसल गई। वह ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का उच्चारण कर गया। लेकिन पूरा नारा लगाने से पहले वह संभल गया और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगा। इस संबंध में फैजुल हसन का कहना है कि मानवीय भूल के कारण ऐसा हुआ। दरअसल युवक की जुबान तो फिसली पर उसने तुरंत सुधार कर लिया।