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एएमयू छात्रा असमा के कत्ल के आरोपी को 23 माह बाद जमानत
अभिषेक शर्मा
Updated Wed, 12 Apr 2017 02:21 AM IST
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कभी एएमयू प्रोफेसर पर आरोप लगाने और एएमयू इतिहास में पहली बार छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़कर चर्चाओं में रही एएमयू की पूर्व रिसर्च स्कॉलर असमा जावेद के कत्ल का आरोपी हार्डवेयर व्यापारी जावेद उल हसन जेल से रिहा हो गया। वह इस कत्ल के जुर्म में 23 माह तक जेल रहा और उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली।
तब जाकर उसकी रिहाई हो सकी। हालांकि वह अपनी गिरफ्तारी के पहले ही दिन से खुद को बेकुसूर बताता आ रहा है। मगर अब जेल से छूटने के बाद करीबियों के बीच चर्चा में इतना ही कहता है कि जेल जाने का हमेशा मलाल रहेगा। पिछले सप्ताह जेल से छूटने के बाद उसने मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी शुरू कर दी है और वह अब अपने साक्ष्यों के सहारे मुकदमे में अपने बचाव की कोशिश की जुगत भिड़ा रहा है।
एक थप्पड़ के बदले असमा की हत्याः मूल रूप से बलरामपुर के मौलाना आजाद नगर निकट पानी की टंकी कोतवाली नगर निवासी सेवानिवृत्त रोडवेजकर्मी हामिद जावेद की सबसे छोटी बेटी असमा ने वर्ष 2003-04 में पोस्ट ग्रेजुएशन में एएमयू में दाखिला लिया था। 2014 में पीएचडी पूरी होने के बाद वह हाथरस से बीटीसी कर रही थी और यहां शमशाद मार्केट इलाके के अलहम्द अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या सी-8 में अकेली किराये पर रहती थी। इसी दौरान 8 मई 2015 को उसका कत्ल हो गया।
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तभी से परिजनों से संपर्क टूट गया। बाद में 13 मई को परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उसके फ्लैट से उसकी लाश बरामद की थी। इसके बाद 14 मई की रात पुलिस ने देहली गेट के शाहजमाल एडीए कॉलोनी निवासी जावेद उल हसन को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया था। जावेद असमा का करीबी दोस्त था।
पुलिस का कहना था कि रुपयों के आपसी विवाद में दोस्ती में एक थप्पड़ के बदले यह हत्या की गई थी। तभी से वह जेल में था। मार्च 2017 के अंतिम सप्ताह में जावेद को हाईकोर्ट से जमानत मिली और पिछले सप्ताह तमाम औपचारिकताओं के बाद उसकी रिहाई हो गई।
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तब जाकर उसकी रिहाई हो सकी। हालांकि वह अपनी गिरफ्तारी के पहले ही दिन से खुद को बेकुसूर बताता आ रहा है। मगर अब जेल से छूटने के बाद करीबियों के बीच चर्चा में इतना ही कहता है कि जेल जाने का हमेशा मलाल रहेगा। पिछले सप्ताह जेल से छूटने के बाद उसने मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी शुरू कर दी है और वह अब अपने साक्ष्यों के सहारे मुकदमे में अपने बचाव की कोशिश की जुगत भिड़ा रहा है।
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एक थप्पड़ के बदले असमा की हत्याः मूल रूप से बलरामपुर के मौलाना आजाद नगर निकट पानी की टंकी कोतवाली नगर निवासी सेवानिवृत्त रोडवेजकर्मी हामिद जावेद की सबसे छोटी बेटी असमा ने वर्ष 2003-04 में पोस्ट ग्रेजुएशन में एएमयू में दाखिला लिया था। 2014 में पीएचडी पूरी होने के बाद वह हाथरस से बीटीसी कर रही थी और यहां शमशाद मार्केट इलाके के अलहम्द अपार्टमेंट के फ्लैट संख्या सी-8 में अकेली किराये पर रहती थी। इसी दौरान 8 मई 2015 को उसका कत्ल हो गया।
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तभी से परिजनों से संपर्क टूट गया। बाद में 13 मई को परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उसके फ्लैट से उसकी लाश बरामद की थी। इसके बाद 14 मई की रात पुलिस ने देहली गेट के शाहजमाल एडीए कॉलोनी निवासी जावेद उल हसन को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया था। जावेद असमा का करीबी दोस्त था।
पुलिस का कहना था कि रुपयों के आपसी विवाद में दोस्ती में एक थप्पड़ के बदले यह हत्या की गई थी। तभी से वह जेल में था। मार्च 2017 के अंतिम सप्ताह में जावेद को हाईकोर्ट से जमानत मिली और पिछले सप्ताह तमाम औपचारिकताओं के बाद उसकी रिहाई हो गई।