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अमर उजाला शिक्षा अभियान : बच्चों की मनोदशा से सामंजस्य बैठाएं शिक्षक और अभिभावक, पढ़ाई से ही कामयाब बना जा सकता

Sat, 26 Mar 2022 11:44 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: सुशील कुमार Updated Sat, 26 Mar 2022 11:44 AM IST
सार

कोरोना काल के दो साल के बाद स्कूल खुले। ऑनलाइन पढ़ाई ऑफलाइन शुरू हो गई। बच्चे स्कूल आने लगे। उनमें उत्साह रहा। अब नए सत्र में पढ़ाई अपने उसी शिखरता को छुएगी, जैसे कोरोना काल से पहले छूती थी। खेल मैदान में बच्चे खिलाड़ी के रूप में खेलेंगे और आगे बढ़ेंगे।

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Amar Ujala Education Campaign Teachers and parents should be in harmony with the mood of the children only studies can be successful
अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : amar ujala

विस्तार

यह बात सौ आने सच है, जो परिस्थितियां कोरोना काल के बाद उपजी हैं, उससे निपटना एक चुनौती है। मगर इस चुनौती से पार पाना भी संभव है। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों में हौसला भरना होगा, उन्हें यह बताना होगा कि पढ़ाई ही एक ऐसा शस्त्र है, जिससे कामयाब इंसान बना जा सकता है। सफलता की सीढ़ी तक पहुंचा जा सकता है। साथ ही कोरोना काल में बच्चों को मानसिक बीमारी या अवसाद से लड़ने के लिए तैयार करने की भी जिम्मेदारी अभिभावक और टीचर को निभानी होगी।   

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कोरोना काल के बाद स्कूल खुले। धीरे-धीरे बच्चों का यूपी सरकार के आदेश के बाद आना हुआ। कोरोना के घटते संक्रमण की वजह से बच्चों की तादाद में इजाफा होता गया। सितंबर में स्कूल खुल गए। बच्चे भी आने शुरू हो गए। ऑनलाइन से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। स्कूल गुलजार हो गया। सांस्कृतिक और खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू हो गईं।
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यह बात बिल्कुल सही है कि कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई पर असर थोड़ा-बहुत पड़ा था। जिन शिक्षण संस्थानों के पास ऑनलाइन पढ़ाई की ज्यादा सुविधाएं थीं, वहां पढ़ाई गतिमान रही। जब स्कूल खुले तो पढ़ाई फिर पटरी पर आने लगी। यह सिलसिला नए सत्र में भी जारी रहेगा। -डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, शिक्षक, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
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कोरोना काल के दो साल के बाद स्कूल खुले। ऑनलाइन पढ़ाई ऑफलाइन शुरू हो गई। बच्चे स्कूल आने लगे। उनमें उत्साह रहा। अब नए सत्र में पढ़ाई अपने उसी शिखरता को छुएगी, जैसे कोरोना काल से पहले छूती थी। खेल मैदान में बच्चे खिलाड़ी के रूप में खेलेंगे और आगे बढ़ेंगे। -एसएम राशिद, शिक्षक, अलबरकात स्कूल

कोरोना काल में बच्चे की पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई। ऑनलाइन पढ़ाई ऑफलाइन का ठोस विकल्प नहीं हो सकता। मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि इस कोरोना महामारी से निजात दिलाएं। जन-जीवन पटरी पर आए। अब स्कूल खुल गया है। इससे मैं बहुत खुश हूं। -शेखर वार्ष्णेय, अभिभावक

मैं दावे से कह सकता हूं कि जो क्लास रूम में पढ़ाई होती है, उसका कोई जोड़ नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाई तो बच्चा कर रहा था, लेकिन मैं स्कूल खुलने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही स्कूल खुला, मैंने बच्चे को भेज दिया। नए सत्र में भी यह क्रम जारी रहेगा। -पीयूष, अभिभावक

कोरोना काल के बाद जब स्कूल खुला, तो मैं बहुत खुश हो गया था, क्योंकि घर पर रहकर बोर हो गया था। सोच रहा था कि अपने दोस्तों और टीचर से मिलूंगा। पढ़ूंगा और खेलूंगा। स्कूल आकर बहुत खुश हो गया। नए सत्र में भी पढ़ने आऊंगा। -आर्यन, कक्षा पांच, हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल

सितंबर से नियमित बच्चे स्कूल आ रहे हैं। सुखद यह है कि जो वार्षिक परीक्षा हुई, उसमें नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी विद्यार्थियों ने ऑफलाइन परीक्षा दी। जिन बच्चों की तबीयत खराब थी, उन्होंने दो-चार दिन के बाद परीक्षा दी। मैं गर्व से कहती हूं कि मेरे बच्चे ऑफलाइन में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मैंने अभिभावकों की काउंसिलिंग की थी। उन्हें भरोसा दिलाया था कि बच्चों को ऑफलाइन परीक्षा देने दें। भले ही उसे कम नंबर मिले या पासिंग मार्क लाए। कम से कम वह अपना पेपर तो देगा। वह परिस्थितियों का मुकाबला करेगा। -दीप्ति गोविला, प्रधानाचार्या, डीएस बाल मंदिर स्कूल

अभिभावक व टीचर पर बच्चों के सर्वांगीण विकास का जिम्मा ज्यादा : डॉ. बत्रा
समय लगेगा, लेकिन बदलाव जरूर आएगा। कुछ बच्चे पहली बार स्कूल जाएंगे, जो कभी स्कूल नहीं गए थे। कुछ बच्चों की पढ़ाई बीच में रुक गई थी। कोरोना महामारी के चलते दो साल तक बच्चे घर रहे, जब वह स्कूल जाएंगे, तो उनकी रुटीन बदलेगी, क्योंकि अभी तक अपनी मर्जी से वह सो रहे थे, उठ रहे थे। इससे उनमें थोड़ी सुस्ती भी आ गई है। ऑनलाइन पढ़ाई में जो टीचर होम वर्क दे रही थीं, उसे अपने हिसाब से करते थे, क्योंकि वह सामने नहीं होतीं थीं। अब बच्चों की अनुशासित वाली जिंदगी शुरू होने वाली है। कुछ बच्चे घर पर रहे तो कुछ बच्चों में सोशल एंग्जाइटी होगी। लंबे समय के बाद नए लोगों से मिलेंगे तो उनमें हिचक होगी और घबराएंगे भी। स्वभाव से बच्चे चिड़चिड़े हो गए हैं। बच्चे रुटीन में आएंगे और ऑनलाइन मोड से ऑफलाइन में आने पर टीचर की भी मनोदशा बदली हुई होगी। बच्चों को पढ़ाने के दौरान एकाग्रचित होने में थोड़ा समय लगेगा।


ऑनलाइन के दौरान में बच्चे सुस्त रहे। वह बाहर खेलने भी नहीं जा रहे थे। बच्चे छोटे हैं तो अभिभावकों को उनके लिए रुटीन बनानी होगी। खेलने के लिए उन्हें बाहर भेजें और जो स्कूल में जो काम मिला हुआ है, उस पर दबाव न बनाकर उसे धीरे-धीरे पूरा कराएं। अभिभावकों की ड्यूटी है कि वह बच्चों पर पूरा ध्यान दें। ध्यान न देने से उसके प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ता है। बच्चों पर दबाव नहीं बनाना है और संतुलन बनाकर काम भी करना है। अभिभावकों को यह भी देखना होगा कि बच्चों के स्वभाव में क्या बदलाव आ रहा है। उदासी और चिड़चिड़ापन तो नहीं आ रहा है। बच्चा अपनी बात कह पा रहा है या नहीं। बच्चा डरा-डरा सा तो नहीं है। बच्चों के भाव पर अभिभावकों को ध्यान देना होगा। टीचर को भी सहनशीलता दिखानी होगी कि उन्हें बच्चों के साथ नरमी बरतनी होगी, क्योंकि बच्चे लंबे समय के बाद स्कूल आ रहे हैं। होम वर्क थोड़ा-थोड़ा दें। ज्यादा अनुशासन में रखने का दबाव न बनाएं। अगर बच्चा काम करके नहीं आया तो उसे काम करने का मौका दें। उसे कठोर दंड न दें। उसके माता-पिता से भी बात करें। -डॉ. पूनम बत्रा, मनोवैज्ञानिक सलाहकार

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