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अलीगढ़ : रोडवेज बसों में नहीं मिली सीट, निजी बसों की छत पर बैठकर किया सफर

Sun, 07 Nov 2021 12:54 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:54 AM IST
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Aligarh: Seat not found in roadways buses, traveled by sitting on the roof of private buses
गांधी पार्क बस स्टैंड पर भाई दूज पर बसों में रही भीड़। संवाद - फोटो : CITY OFFICE
भाईदूज के मौके पर हर साल की अपेक्षा यूं तो कम भीड़ रही, लेकिन यह भीड़ सामान्य से काफी अधिक थी। ऐसे में रोडवेज बसों में सीट पाने के लिए यात्रियों ने काफी मशक्कत की। बहनें बसों के अंदर खड़ी होकर सफर करती देखी गईं, जबकि निजी बसों की छत पर बैठकर लोग सफर करते हुए मिले। घंटों के इंतजार के बाद बस अड्डे पर कोई बस आती तो सीट पाने के लिए लोग खिड़कियों से चढ़ते।
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भाईदूज के मौके पर आसपास के जिलों के लिए सुबह से ही लोग रवाना होने लगे। कई लोगों ने रेलवे में आरक्षित टिकट न मिलने के चलते बसों की तरफ रुख किया। जबकि कई लोग बसों की भीड़भाड़ से बचने के लिए अपने वाहनों से निकले। मथुरा रोड, आगरा रोड, जीटी रोड, रामघाट रोड पर मोटरसाइकिल से सैकड़ों की संख्या में लोग अन्य जिलों के लिए रवाना हुए।
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जबकि गांधीपार्क बस अड्डे पर कासगंज, बरेली, मथुरा और आगरा की भीड़ अधिक थी। इस रूट पर बस मिलना और सीट मिलना एक बड़ी बात थी। सीट पाने के लिए लोग बसों की खिड़कियों से अंदर घुसे। जबकि मसूदाबाद और सैटेलाइट बस अड्डे पर नोएडा, दिल्ली, पलवल, मुरादाबाद, गाजियाबाद रूट पर भी यही नजारा देखने को मिला।
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किसी तरह अधिकारियों ने भीड़ को देखते हुए बसें उपलब्ध कराईं, लेकिन संख्या अधिक होने के चलते इन बसों से कोई राहत नहीं मिली। परेशान कई लोग तो टैक्सी लेकर अपने गंतव्य तक रवाना हुए। जबकि बसों के अंदर कई बहनें अन्य जिले तक खड़े-खड़े सफर करती हुईं मिलीं।
हालांकि मानवीय संवेदनाओं के आधार पर कुछ यात्रियों ने महिलाओं के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी। रोडवेज बसों से लाभ नहीं मिला तो लोगों ने निजी बसों से सफर तय किया। निजी बसों में भी सीट न मिलने पर यात्री बसों की छतों पर बैठ गए और सफर तय किया।

डग्गेमार वाहनों ने भी कमाया मुनाफा
यातायात के साधन कम थे तो डग्गेमार वाहन चालक सक्रिय हो गए। लोगों ने छोटा हाथी, लोडर, मैजिक आदि के माध्यम से अन्य जिलों के लिए प्रस्थान किया। हालांकि इस दौरान यात्रियों से मनमाफिक किराया भी वसूला गया। लोडरों में तो लोग खड़े-खड़े भी सफर करते रहे।
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