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जिले में दौड़ रहीं 97 एंबुलेंस खटारा
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राहुल कुमार
जिले में 97 निजी एंबुलेंस खटारा हैं, इनको बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के दौड़ाया जा रहा है। इनमें से करीब 90 प्रतिशत छोटी एंबुलेंस सीएनजी/एलपीजी से चल रही हैं। इनकी किट की भी जांच नहीं कराई गई है। बिना फिटनेस के दौड़ रही ये एंबुलेंस मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती हैं। आलम ये है कि परिवहन विभाग के नोटिस के बाद भी संचालक मनमानी कर रहे हैं। इसके बावजूद महकमा इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।
परिवहन विभाग के मुताबिक, वर्तमान में 331 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें से 97 एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कराए ही दौड़ रही हैं। इनके हूटर, लाइट, बंपर, सीट, बॉडी, धुआं की क्या स्थिति है, इसके बारे में विभाग को जानकारी नहीं है। जबकि 90 प्रतिशत में सीएनजी/एलपीजी किट लगी है। वह भी किस स्थिति में इससे भी महकमा अंजान है। एंबुलेंस की स्थिति और मानक बेशक अधूरे हैं। मगर, संचालक तीमारदारों से पैसा पूरा वसूलते हैं। शहरी क्षेत्र में 10 किमी की दूरी का 600 से 800 रुपया लिया जा रहा है।
सबसे अधिक निजी एंबुलेंस रामघाट रोड और जेएन मेडिकल कालेज के आसपास खड़ी रहती हैं। आलम यह है कि निजी एंबुलेंस संचालक मरीज को सरकारी अस्पताल में ले जाने की बजाय निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। वहां पर इनका कमीशन तय रहता है। कई बार जेएन मेडिकल कालेज के बाहर एंबुलेंस चालकों में विवाद भी हो चुका है। पिछले दिनों तो फायरिंग तक की गई थी।
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पंजीकरण 331 का, दौड़ रहीं 600 से अधिक
जिले में 331 एंबुलेंस का पंजीकरण है। मगर, हकीकत 600 से अधिक एंबुलेंस दौड़ रही हैं। इनको लेकर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। कई अस्पताल संचालक तो खुद अपने अस्पताल के नाम से इन अपंजीकृत एंबुलेंस को चलवा रहे हैं।
जिले में 97 एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के चल रही हैं। कोरोना काल के चलते प्रदेश सरकार ने सभी वाहनों को 31 मार्च तक की छूट दी है। इसके चलते कार्रवाई नहीं की जा रही है। इनको प्रशासन अनुभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। 31 मार्च के बाद प्रवर्तन टीम इन खटारा एंबुलेंस के खिलाफ अभियान चलाएगी। बिना पंजीकरण के जो एंबुलेंस चल रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।- फरीदउद्दीन, आरटीओ प्रवर्तन, अलीगढ़ संभाग
न सिर्फ अलीगढ़ बल्कि प्रदेश के कई जिलों में खटारा, डग्गामार एंबुलेंस संचालित हो रहीं हैं। इनके खिलाफ सबसे पहले तो अस्पताल संचालकों को ही कदम उठाना चाहिए। परिवहन विभाग व यातायात पुलिस भी कार्रवाई करे।
रवि सिसौदिया, प्रदेश अध्यक्ष, ऑल यूपी एंबुलेंस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन
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जिले में 97 निजी एंबुलेंस खटारा हैं, इनको बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के दौड़ाया जा रहा है। इनमें से करीब 90 प्रतिशत छोटी एंबुलेंस सीएनजी/एलपीजी से चल रही हैं। इनकी किट की भी जांच नहीं कराई गई है। बिना फिटनेस के दौड़ रही ये एंबुलेंस मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती हैं। आलम ये है कि परिवहन विभाग के नोटिस के बाद भी संचालक मनमानी कर रहे हैं। इसके बावजूद महकमा इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है।
परिवहन विभाग के मुताबिक, वर्तमान में 331 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। इनमें से 97 एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कराए ही दौड़ रही हैं। इनके हूटर, लाइट, बंपर, सीट, बॉडी, धुआं की क्या स्थिति है, इसके बारे में विभाग को जानकारी नहीं है। जबकि 90 प्रतिशत में सीएनजी/एलपीजी किट लगी है। वह भी किस स्थिति में इससे भी महकमा अंजान है। एंबुलेंस की स्थिति और मानक बेशक अधूरे हैं। मगर, संचालक तीमारदारों से पैसा पूरा वसूलते हैं। शहरी क्षेत्र में 10 किमी की दूरी का 600 से 800 रुपया लिया जा रहा है।
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सबसे अधिक निजी एंबुलेंस रामघाट रोड और जेएन मेडिकल कालेज के आसपास खड़ी रहती हैं। आलम यह है कि निजी एंबुलेंस संचालक मरीज को सरकारी अस्पताल में ले जाने की बजाय निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। वहां पर इनका कमीशन तय रहता है। कई बार जेएन मेडिकल कालेज के बाहर एंबुलेंस चालकों में विवाद भी हो चुका है। पिछले दिनों तो फायरिंग तक की गई थी।
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पंजीकरण 331 का, दौड़ रहीं 600 से अधिक
जिले में 331 एंबुलेंस का पंजीकरण है। मगर, हकीकत 600 से अधिक एंबुलेंस दौड़ रही हैं। इनको लेकर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। कई अस्पताल संचालक तो खुद अपने अस्पताल के नाम से इन अपंजीकृत एंबुलेंस को चलवा रहे हैं।
जिले में 97 एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के चल रही हैं। कोरोना काल के चलते प्रदेश सरकार ने सभी वाहनों को 31 मार्च तक की छूट दी है। इसके चलते कार्रवाई नहीं की जा रही है। इनको प्रशासन अनुभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। 31 मार्च के बाद प्रवर्तन टीम इन खटारा एंबुलेंस के खिलाफ अभियान चलाएगी। बिना पंजीकरण के जो एंबुलेंस चल रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।- फरीदउद्दीन, आरटीओ प्रवर्तन, अलीगढ़ संभाग
न सिर्फ अलीगढ़ बल्कि प्रदेश के कई जिलों में खटारा, डग्गामार एंबुलेंस संचालित हो रहीं हैं। इनके खिलाफ सबसे पहले तो अस्पताल संचालकों को ही कदम उठाना चाहिए। परिवहन विभाग व यातायात पुलिस भी कार्रवाई करे।
रवि सिसौदिया, प्रदेश अध्यक्ष, ऑल यूपी एंबुलेंस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन