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अलीगढ़ में गंगा तट पर लगेंगे अमरूद के बाग
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आशीष निगम
नमामि गंगे योजना के तहत अब गंगा के तटों के पास अमरूद के बड़े बाग लगाए जाएंगे। जहां अमरूद की मशहूर किस्में उगाई जाएंगी। अलीगढ़ सहित आसपास के जिलों में सासनी के स्वादिष्ट अमरूद की मांग सर्वाधिक रहती है। किसानों को इसका बेहतर भाव भी मिलता है। इसलिए इस किस्म को खासतौर पर बढ़ावा दिया जाएगा। अतरौली में सांकरा के आसपास के गांवों के किसानों को अमरूद के बागों से आमदनी बढ़ाने का मंत्र दिया जाएगा। इसके लिए अमरूद की पौध, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मनरेगा योजना से पौधों के लिए गड्ढा खोदने आदि की सहूलियत दी जाएगी। कई योजनाओं के लाभ देकर किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वह आगे आकर इसका लाभ उठा सकें। जिले में गंगा तट पर लगभग 120 हेक्टेयर जमीन पर ये बाग लगवाए जाएंगे। इन बागों में सिर्फ अमरूद पैदा करने का फायदा ही नहीं होता। इससे गंगा तटों पर अचानक जमीन धसकने की समस्या को भी दूर किया जाएगा। पेड़ों की जड़ें तटों को मजबूती प्रदान करेंगी। सरकार पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए भी गंगा के किनारे इस तरह की योजनाओं को लागू कर रहा है। इससे पहले भी गंगा के किनारे फलदार पौधे लगवाए जा चुके हैं।
अमरूद के बाग लगाकर किसान एक बेहतर आमदनी का जरिया बना सकते हैं। उद्यान विभाग इसमें पूरी मदद कर रहा है। किसान आएं और बरसात से पहले इसकी तैयारी कर लें।
- नंदकिशोर सहानिया, जिला उद्यान अधिकारी।
अमरूद की खेती
1- सासनी का मशहूर अमरूद एल-49, इलाहाबादी सफेदा और कायमगंज का अमरूद जिले में एक हजार हेक्टेयर में पैदा किया जाता है। सबसे ज्यादा सासनी का अमरूद पैदा होता है।
2- बाजार में इन किस्मों की पौध लगभग 35 से लेकर 120 रुपये तक में मिलती है। नमामि गंगे योजना के तहत उद्यान विभाग 29 रुपये में अमरूद की पौध देगा।
3- गंगा के किनारे अमरूद के बाग लगाने वाले किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर अनुदान योजना का लाभ मिलेगा।
4- वर्तमान में जिले में एक हजार हेक्टेयर में अमरूद के बाग हैं। गंगा के किनारे 120 हेक्टेयर में नए बाग लगेंगे।
5- बाजार में अमरूद 30 से लेकर 50 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है। सासनी के साथ कुछ बाहरी किस्मों के अमरूद भी बिक रहे हैं।
जिले में फल विकास कार्यक्रम
1- वर्ष 2019-20 में 1350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नए बाग लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष 950 हेक्टेयर पर काम हुआ।
2- वर्ष 2020-21 में 1330 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नए बाग लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष 872 हेक्टेयर पर काम हुआ
3- वर्ष 2019-20 में फलों के 16300 पौधे बांटने के लक्ष्य के सापेक्ष 233960 पौधे बांटे गए।
4- वर्ष 2020-21 में फलों के 16300 पौधे बांटने के लक्ष्य के सापेक्ष 206200 पौधे बांटे गए।
5- इन फलों में आम, अमरूद, आंवला और नींबू की प्रजाति के फल शामिल हैं।
6- अलीगढ़ में 10,610 हेक्टेयर में फलों के बाग, मंडल में लगभग 47550 हेक्टेयर में बाग हैं।
7- अलीगढ़ में फलों का उत्पादन 115921 लाख मीट्रिक टन, मंडल में लगभग 564162 लाख मीट्रिक टन।
8- वर्ष 2019-20 में 358 हेक्टेयर और वर्ष 2020-21 में 425 हेक्टेयर पुराने बागों को ठीक किया गया।
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नमामि गंगे योजना के तहत अब गंगा के तटों के पास अमरूद के बड़े बाग लगाए जाएंगे। जहां अमरूद की मशहूर किस्में उगाई जाएंगी। अलीगढ़ सहित आसपास के जिलों में सासनी के स्वादिष्ट अमरूद की मांग सर्वाधिक रहती है। किसानों को इसका बेहतर भाव भी मिलता है। इसलिए इस किस्म को खासतौर पर बढ़ावा दिया जाएगा। अतरौली में सांकरा के आसपास के गांवों के किसानों को अमरूद के बागों से आमदनी बढ़ाने का मंत्र दिया जाएगा। इसके लिए अमरूद की पौध, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मनरेगा योजना से पौधों के लिए गड्ढा खोदने आदि की सहूलियत दी जाएगी। कई योजनाओं के लाभ देकर किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वह आगे आकर इसका लाभ उठा सकें। जिले में गंगा तट पर लगभग 120 हेक्टेयर जमीन पर ये बाग लगवाए जाएंगे। इन बागों में सिर्फ अमरूद पैदा करने का फायदा ही नहीं होता। इससे गंगा तटों पर अचानक जमीन धसकने की समस्या को भी दूर किया जाएगा। पेड़ों की जड़ें तटों को मजबूती प्रदान करेंगी। सरकार पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए भी गंगा के किनारे इस तरह की योजनाओं को लागू कर रहा है। इससे पहले भी गंगा के किनारे फलदार पौधे लगवाए जा चुके हैं।
अमरूद के बाग लगाकर किसान एक बेहतर आमदनी का जरिया बना सकते हैं। उद्यान विभाग इसमें पूरी मदद कर रहा है। किसान आएं और बरसात से पहले इसकी तैयारी कर लें।
- नंदकिशोर सहानिया, जिला उद्यान अधिकारी।
अमरूद की खेती
1- सासनी का मशहूर अमरूद एल-49, इलाहाबादी सफेदा और कायमगंज का अमरूद जिले में एक हजार हेक्टेयर में पैदा किया जाता है। सबसे ज्यादा सासनी का अमरूद पैदा होता है।
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2- बाजार में इन किस्मों की पौध लगभग 35 से लेकर 120 रुपये तक में मिलती है। नमामि गंगे योजना के तहत उद्यान विभाग 29 रुपये में अमरूद की पौध देगा।
3- गंगा के किनारे अमरूद के बाग लगाने वाले किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर अनुदान योजना का लाभ मिलेगा।
4- वर्तमान में जिले में एक हजार हेक्टेयर में अमरूद के बाग हैं। गंगा के किनारे 120 हेक्टेयर में नए बाग लगेंगे।
5- बाजार में अमरूद 30 से लेकर 50 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है। सासनी के साथ कुछ बाहरी किस्मों के अमरूद भी बिक रहे हैं।
जिले में फल विकास कार्यक्रम
1- वर्ष 2019-20 में 1350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नए बाग लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष 950 हेक्टेयर पर काम हुआ।
2- वर्ष 2020-21 में 1330 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नए बाग लगाने के लक्ष्य के सापेक्ष 872 हेक्टेयर पर काम हुआ
3- वर्ष 2019-20 में फलों के 16300 पौधे बांटने के लक्ष्य के सापेक्ष 233960 पौधे बांटे गए।
4- वर्ष 2020-21 में फलों के 16300 पौधे बांटने के लक्ष्य के सापेक्ष 206200 पौधे बांटे गए।
5- इन फलों में आम, अमरूद, आंवला और नींबू की प्रजाति के फल शामिल हैं।
6- अलीगढ़ में 10,610 हेक्टेयर में फलों के बाग, मंडल में लगभग 47550 हेक्टेयर में बाग हैं।
7- अलीगढ़ में फलों का उत्पादन 115921 लाख मीट्रिक टन, मंडल में लगभग 564162 लाख मीट्रिक टन।
8- वर्ष 2019-20 में 358 हेक्टेयर और वर्ष 2020-21 में 425 हेक्टेयर पुराने बागों को ठीक किया गया।