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लखनऊ से निकलेगा गुरसिकरन की 628 एकड़ विवादित जमीन के निस्तारण का रास्ता
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तहसील कोल के गुरसिकरन गांव की 628 एकड़ भूमि के विवाद के निस्तारण का रास्ता लखनऊ से निकलेगा। 30 दिंसबर को सचिवालय में इसके संबंध में बैठक प्रस्तावित की गई है। बैठक विशेष सचिव मंजूलता की अध्यक्षता में होगी। इसमें खेलकूद विभाग के प्रमुख सचिव, वन एवं वन्य जीव विभाग के प्रमुख, डीएम अलीगढ़, अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव, जिला वन अधिकारी अलीगढ़, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अलीगढ़ को बुलाया गया है।
गुरसिकरन में 628 एकड़ जमीन का विवाद 2012 से चल रहा है। पहले यह जमीन पशुपालन विभाग ने एफ्रो एक्शन फॉर फूड आर्गेनाइजेशन को 1947 से 1995 तक लीज पर दी थी। इस पर पशु मेला, गन्ना, गेहूं की खेती भी होती थी। 1995 में लीज खत्म होने के बाद से यह जमीन खाली हो गई। 2012 में सपा सरकार ने इस जमीन पर स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाने का एलान कर दिया।
इस बात पर हरदुआगंज निवासी नंद किशोर एनजीटी चले गए और उन्होंने वहां अपील की कि इस जमीन पर जंगल है। स्टेडियम बनने से जंगल नष्ट हो जाएगा। इसके बाद 22 प्रधानों ने संयुक्त तौर पर एक रिवीजन याचिका स्टेडियम बनने के पक्ष में दायर कर दी। एनजीटी ने दोनों पक्षों को सुना। इसके बाद सरकार को आदेश दिया कि मामले का निस्तारण शासन स्तर पर कराया जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त को इसके लिए प्रभारी बनाया गया। तब से लेकर इस मामले के निस्तारण के लिए यह चौथी बैठक होने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार की बैठक में इस मसले का हल निकल जाएगा। स्थानीय प्रधानों से भी इसके लिए सुझाव मांगे गए हैं। साथ ही वन विभाग को जमीन के अभिलेख लेकर प्रस्तुत होने का निर्देश दिया है।
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गुरसिकरन में 628 एकड़ जमीन का विवाद 2012 से चल रहा है। पहले यह जमीन पशुपालन विभाग ने एफ्रो एक्शन फॉर फूड आर्गेनाइजेशन को 1947 से 1995 तक लीज पर दी थी। इस पर पशु मेला, गन्ना, गेहूं की खेती भी होती थी। 1995 में लीज खत्म होने के बाद से यह जमीन खाली हो गई। 2012 में सपा सरकार ने इस जमीन पर स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाने का एलान कर दिया।
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इस बात पर हरदुआगंज निवासी नंद किशोर एनजीटी चले गए और उन्होंने वहां अपील की कि इस जमीन पर जंगल है। स्टेडियम बनने से जंगल नष्ट हो जाएगा। इसके बाद 22 प्रधानों ने संयुक्त तौर पर एक रिवीजन याचिका स्टेडियम बनने के पक्ष में दायर कर दी। एनजीटी ने दोनों पक्षों को सुना। इसके बाद सरकार को आदेश दिया कि मामले का निस्तारण शासन स्तर पर कराया जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त को इसके लिए प्रभारी बनाया गया। तब से लेकर इस मामले के निस्तारण के लिए यह चौथी बैठक होने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार की बैठक में इस मसले का हल निकल जाएगा। स्थानीय प्रधानों से भी इसके लिए सुझाव मांगे गए हैं। साथ ही वन विभाग को जमीन के अभिलेख लेकर प्रस्तुत होने का निर्देश दिया है।
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