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सचिव और लेखपाल की लापरवाही से ‘परलोक’ पहुंची विधवा पेंशन
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राहुल दक्ष
जनपद में महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से कराए गए विधवा पेंशन के सत्यापन में बड़ा खुलासा सामने आया है। ग्राम सचिव और लेखपालों की लापरवाही के चलते 213 विधवाओं की पेंशन राशि विभाग उनके मरने के बाद भी खाते में पहुंच रही थी। इतना ही नहीं 43 अपात्र विधवा महिलाओं को भी पेंशन राशि जारी करने की बात सामने आई है। सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। इन सभी महिलाओं का नाम पेंशन सूची से हटाया गया है।
शासन के आदेश पर महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से विधवा पेंशन पाने वाली महिलाओं का सालाना सत्यापन कराया गया था। जनपद में कुल 27399 महिलाएं ऐसी थी जो विभाग से पेंशन पा रही थीं। जांच में सामने आया कि जिले की213 पेंशन लाभार्थी तो मौत के आगोश में समा चुकी हैं। इसके बाद भी उनको पेंशन राशि जारी की जा रही है। दूसरी ओर सत्यापन में 43 ऐसी महिलाएं भी सामने आई जो कि अपात्र होने के बाद भी पेंशन ले रहीं थीं।
जांच के बाद विभाग ने पेंशन सूची से उनका नाम हटा दिया है। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि पेंशन की राशि कब से कब तक बांटी गई, लेकिन माना जा रहा है कि अब तक लाखों रुपये इनके खाते में भेजे जा चुके हैं। इस खेल के पीछे ग्राम सचिव और शहर के संबंधित लेखपालों की लापरवाही सामने आई हैं। दरअसल लेखपाल की शहरी क्षेत्र में और ग्राम सचिव की ग्रामीण क्षेत्र में जिम्मेदारी होती है कि वो अपने यहां के लाभार्थियों का समय-समय पर सत्यापन कर संबंधित विभाग को उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दे। मगर, उन्होंने ऐसा नहीं किया। डीपीओ स्मिता सिंह के मुताबिक सत्यापन के आधार पर मृतक और अपात्र विधवा महिलाओं के नामों को पेंशन सूची से बाहर कर दिया गया है।
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जनपद में महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से कराए गए विधवा पेंशन के सत्यापन में बड़ा खुलासा सामने आया है। ग्राम सचिव और लेखपालों की लापरवाही के चलते 213 विधवाओं की पेंशन राशि विभाग उनके मरने के बाद भी खाते में पहुंच रही थी। इतना ही नहीं 43 अपात्र विधवा महिलाओं को भी पेंशन राशि जारी करने की बात सामने आई है। सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। इन सभी महिलाओं का नाम पेंशन सूची से हटाया गया है।
शासन के आदेश पर महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से विधवा पेंशन पाने वाली महिलाओं का सालाना सत्यापन कराया गया था। जनपद में कुल 27399 महिलाएं ऐसी थी जो विभाग से पेंशन पा रही थीं। जांच में सामने आया कि जिले की213 पेंशन लाभार्थी तो मौत के आगोश में समा चुकी हैं। इसके बाद भी उनको पेंशन राशि जारी की जा रही है। दूसरी ओर सत्यापन में 43 ऐसी महिलाएं भी सामने आई जो कि अपात्र होने के बाद भी पेंशन ले रहीं थीं।
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जांच के बाद विभाग ने पेंशन सूची से उनका नाम हटा दिया है। हालांकि अब तक यह साफ नहीं हुआ है कि पेंशन की राशि कब से कब तक बांटी गई, लेकिन माना जा रहा है कि अब तक लाखों रुपये इनके खाते में भेजे जा चुके हैं। इस खेल के पीछे ग्राम सचिव और शहर के संबंधित लेखपालों की लापरवाही सामने आई हैं। दरअसल लेखपाल की शहरी क्षेत्र में और ग्राम सचिव की ग्रामीण क्षेत्र में जिम्मेदारी होती है कि वो अपने यहां के लाभार्थियों का समय-समय पर सत्यापन कर संबंधित विभाग को उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दे। मगर, उन्होंने ऐसा नहीं किया। डीपीओ स्मिता सिंह के मुताबिक सत्यापन के आधार पर मृतक और अपात्र विधवा महिलाओं के नामों को पेंशन सूची से बाहर कर दिया गया है।
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