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अलीगढ़ : एमएओ में खिलाफत मूवमेंट को गांधीजी का मिला था समर्थन
सार
एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक प्रो. राहत अबरार ने बताया कि पहली बार 25 अक्तूबर 1920 और दूसरी बार 1925 में आए थे। प्रो. राहत बताते हैं कि महात्मा गांधी ने मौलाना शौकत अली और मौलाना अली जौहर से कहकर जामा मिल्लिया में इस्लामिया शब्द जुड़वाया।महात्मा गांधी ने यहां किया था प्रवासप्रो. अबरार बताते हैं कि महात्मा गांधी जब भी अलीगढ़ आते थे तो मुस्तफा कमाल शेरवानी की कोठी पर रुकते थे, वहां पर अलीगढ़ पब्लिक स्कूल है और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय अब्दुल मजीद ख्वाजा की कोठी में भी रुकते थे, वहां पर वर्तमान में यूनिवर्सिटी का एकेडमिक टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर है।स्ट्रेची हॉल के सामने फूंके गए थे विदेशी कपड़ेप्रो. अबरार कहते हैं कि महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को एएमयू के छात्रों ने हाथों हाथ लिया। महात्मा गांधी के हाथ से लिखा उर्दू का पत्र संरक्षित है।
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अलीगढ़ : अक्तूबर 1920 में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज अलीगढ़ में गांधीजी। संवाद
- फोटो : CITY OFFICE
विस्तार
इकराम वारिस
अलीगढ़। मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (एमएओ कॉलेज) में मौलाना शौकत अली और मौलाना अली जौहर के खिलाफत मूवमेंट को महात्मा गांधी ने समर्थन दिया था। एक दिसंबर 1920 को एमएओ कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की शक्ल में वजूद में आई थी।
एएमयू और गांधी का खास रिश्ता है, जब महात्मा गांधी का स्वदेशी और असहयोग आंदोलन को धार की जरूरत थी, तो इसी यूनिवर्सिटी के छात्रों से भरपूर सहयोग मिला। शायद उनके प्रेम की यही वजह रही है कि वो दो बार एएमयू आए थे। एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक प्रो. राहत अबरार ने बताया कि पहली बार 25 अक्तूबर 1920 और दूसरी बार 1925 में आए थे।
एएमयू छात्रसंघ ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था, उस वक्त कॉलेज अंग्रेजी माध्यम से चल रहा था, लेकिन महात्मा गांधी चाहते थे कि एक ऐसा इदारा हो, जहां उर्दू माध्यम में पढ़ाई हो। 25 अक्तूबर 1920 को महात्मा गांधी की मौजूदगी में जामा मस्जिद में जामिया मिल्लिया बनी। प्रो. राहत बताते हैं कि महात्मा गांधी ने मौलाना शौकत अली और मौलाना अली जौहर से कहकर जामा मिल्लिया में इस्लामिया शब्द जुड़वाया।
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महात्मा गांधी ने यहां किया था प्रवास
प्रो. अबरार बताते हैं कि महात्मा गांधी जब भी अलीगढ़ आते थे तो मुस्तफा कमाल शेरवानी की कोठी पर रुकते थे, वहां पर अलीगढ़ पब्लिक स्कूल है और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय अब्दुल मजीद ख्वाजा की कोठी में भी रुकते थे, वहां पर वर्तमान में यूनिवर्सिटी का एकेडमिक टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर है।
स्ट्रेची हॉल के सामने फूंके गए थे विदेशी कपड़े
प्रो. अबरार कहते हैं कि महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को एएमयू के छात्रों ने हाथों हाथ लिया। स्ट्रेची हॉल के सामने विदेशी कपड़ों को छात्रों ने आग के हवाले कर दिया था। इसी यूनिवर्सिटी में महात्मा गांधी से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण वस्तुएं संरक्षित हैं। महात्मा गांधी के हाथ से लिखा उर्दू का पत्र संरक्षित है।
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अलीगढ़। मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (एमएओ कॉलेज) में मौलाना शौकत अली और मौलाना अली जौहर के खिलाफत मूवमेंट को महात्मा गांधी ने समर्थन दिया था। एक दिसंबर 1920 को एमएओ कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की शक्ल में वजूद में आई थी।
एएमयू और गांधी का खास रिश्ता है, जब महात्मा गांधी का स्वदेशी और असहयोग आंदोलन को धार की जरूरत थी, तो इसी यूनिवर्सिटी के छात्रों से भरपूर सहयोग मिला। शायद उनके प्रेम की यही वजह रही है कि वो दो बार एएमयू आए थे। एएमयू के उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक प्रो. राहत अबरार ने बताया कि पहली बार 25 अक्तूबर 1920 और दूसरी बार 1925 में आए थे।
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एएमयू छात्रसंघ ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था, उस वक्त कॉलेज अंग्रेजी माध्यम से चल रहा था, लेकिन महात्मा गांधी चाहते थे कि एक ऐसा इदारा हो, जहां उर्दू माध्यम में पढ़ाई हो। 25 अक्तूबर 1920 को महात्मा गांधी की मौजूदगी में जामा मस्जिद में जामिया मिल्लिया बनी। प्रो. राहत बताते हैं कि महात्मा गांधी ने मौलाना शौकत अली और मौलाना अली जौहर से कहकर जामा मिल्लिया में इस्लामिया शब्द जुड़वाया।
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महात्मा गांधी ने यहां किया था प्रवास
प्रो. अबरार बताते हैं कि महात्मा गांधी जब भी अलीगढ़ आते थे तो मुस्तफा कमाल शेरवानी की कोठी पर रुकते थे, वहां पर अलीगढ़ पब्लिक स्कूल है और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय अब्दुल मजीद ख्वाजा की कोठी में भी रुकते थे, वहां पर वर्तमान में यूनिवर्सिटी का एकेडमिक टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर है।
स्ट्रेची हॉल के सामने फूंके गए थे विदेशी कपड़े
प्रो. अबरार कहते हैं कि महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को एएमयू के छात्रों ने हाथों हाथ लिया। स्ट्रेची हॉल के सामने विदेशी कपड़ों को छात्रों ने आग के हवाले कर दिया था। इसी यूनिवर्सिटी में महात्मा गांधी से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण वस्तुएं संरक्षित हैं। महात्मा गांधी के हाथ से लिखा उर्दू का पत्र संरक्षित है।